Last Updated:November 29, 2025, 11:56 IST
एलन मस्क की स्पेस एक्स को अब भारत की एक प्राइवेट कंपनी स्काईरूट भी अंतरिक्ष मिशन में टक्कर देने उतर आई है. कंपनी ने ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-I बनाया है. सात मंजिला इमारत जितना ऊंचा देसी रॉकेट विक्रम-I को किसी भी लॉन्च साइट से केवल 24 घंटे में असेंबल कर और लॉन्च किया जा सकता है.
एलन मस्क की स्पेस एक्स की बादशाहत को चुनौती देने के लिए अब स्काईरूट ने पहला प्राइवेट रॉकेट विक्रम-I पेश किया है.दुनियाभर में चल रही स्पेस रेस में भारत ने एक बड़ी बढ़त हासिल कर ली है. दूर अंतरिक्ष में एलन मस्क की स्पेस एक्स की बादशाहत को चुनौती देने के लिए अब भारत की एक प्राइवेट कंपनी स्काईरूट भी मैदान में उतर आई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को हैदराबाद में भारतीय स्पेस स्टार्टअप स्काईरूट (Skyroot) के इन्फिनिटी कैंपस का उद्घाटन किया. इस दौरान उन्होंने देश के पहले प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-I से भी पर्दा उठाया.
पीएम मोदी ने इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आज के स्पेस इकोसिस्टम में निजी क्षेत्र बहुत तेजी से उभर रहा है. उन्होंने कहा, ‘भारत की प्राइवेट स्पेस प्रतिभा दुनिया में अपनी पहचान बना रही है. दुनिया में छोटे सैटेलाइट्स की मांग बहुत तेजी से बढ़ रही है. आज भारत का स्पेस सेक्टर दुनियाभर के निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन रहा है.’
प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि भारत का युवा हमेशा राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखता है. उन्होंने कहा कि जब सरकार ने स्पेस सेक्टर को खोला, तब देश के युवाओं, खासकर जेन-ज़ी पीढ़ी ने आगे बढ़कर इसका पूरा फायदा उठाया. उन्होंने बताया, ‘आज भारत के 300 से ज्यादा स्पेस स्टार्टअप अंतरिक्ष में देश के भविष्य को नई उम्मीद दे रहे हैं. इन स्टार्टअप्स की शुरुआत बहुत छोटी टीमों से हुई… कभी दो लोग, कभी पांच लोग, कभी किसी छोटे किराए के कमरे से… बहुत कम साधनों के साथ लेकिन नई ऊंचाइयों को छूने के संकल्प के साथ. मुझे उनसे मिलने का मौका मिला.’ उन्होंने जोड़ा कि यही भावना भारत में प्राइवेट स्पेस क्रांति की वजह बनी.
अब सवाल है कि विक्रम-I आखिर है क्या? और यह पल भारत की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं के लिए इतना अहम क्यों है?
मल्टी-स्टेज लॉन्च व्हीकल विक्रम-I को स्काईरूट ने बनाया है और इसका नाम भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक विक्रम साराभाई के नाम पर रखा गया है.
विक्रम-I लगभग 300 किलो तक का वजनी उपग्रह लोअर अर्थ ऑर्बिट में स्थापित करने की क्षमता रखता है. यह कार्बन फाइबर से बना है और एक साथ कई सैटेलाइट्स को कक्षा में स्थापित कर सकता है. इसमें 3D-प्रिंटेड लिक्विड इंजन भी लगाए गए हैं.
24 घंटे में ही लॉन्च को तैयार होगा 7 मंजिला विक्रम-I
स्काईरूट के अनुसार यह रॉकेट सात मंजिला इमारत जितना ऊंचा है. कंपनी का यह भी दावा है कि विक्रम-I को किसी भी लॉन्च साइट से केवल 24 घंटे में असेंबल कर और लॉन्च किया जा सकता है, जिससे ग्राहकों को स्पेस तक तेज और आसान पहुंच मिलती है.
स्काईरूट का कहना है कि विक्रम-I उन चुनिंदा रॉकेट्स में शामिल है, जिनमें ऑर्बिटल सैटेलाइट्स डिप्लॉय करने की क्षमता है. कंपनी ने बताया कि विक्रम-I को इस साल के अंत तक लॉन्च किया जाएगा. स्काईरूट के अधिकारियों ने इससे पहले बताया था कि कंपनी इस समय रॉकेट के अलग-अलग स्टेज की टेस्टिंग कर रही है, जो देशभर की कई सुविधाओं में चल रही है. टेस्टिंग पूरी होने के बाद इन्हें एक साथ जोड़कर श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर में लॉन्च किया जाएगा.
इसरो की नौकरी छोड़ बनाया खुद का रॉकेट
स्काईरूट ने नवंबर 2022 में भारत का पहला निजी तौर पर बना रॉकेट विक्रम-S लॉन्च किया था, जिसमें चेन्नई के स्टार्टअप स्पेसकिड्ज़, आंध्र प्रदेश के एन-स्पेसटेक और आर्मेनिया के बाजूमक्यू स्पेस रीसर्च लैब के तीन अलग-अलग पेलोड शामिल थे.
स्काईरूट एक हैदराबाद स्थित स्पेस स्टार्टअप है जिसके सपने बहुत बड़े हैं. इसे 2018 में पवन कुमार चंदना और नाग भरत डाका ने मिलकर शुरू किया था. दोनों इससे पहले इसरो में काम कर चुके हैं. चंदना ने पांच साल तक भारत के सबसे बड़े रॉकेट GSLV Mk-III पर काम किया, जबकि डाका ने VSSC में फ्लाइट कंप्यूटर इंजीनियर के तौर पर कई अहम ऑनबोर्ड कंप्यूटर मॉड्यूल्स के हार्डवेयर और फर्मवेयर तैयार किए, जो लॉन्च व्हीकल के सिक्वेंसिंग, नेविगेशन, कंट्रोल और गाइडेंस फंक्शंस संभालते हैं.
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An accomplished digital Journalist with more than 13 years of experience in Journalism. Done Post Graduate in Journalism from Indian Institute of Mass Comunication, Delhi. After Working with PTI, NDTV and Aaj T...और पढ़ें
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New Delhi,Delhi
First Published :
November 29, 2025, 11:56 IST

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