नई दिल्ली. अगर आप भी नोएडा, ग्रेटर नोएडा या फिर जेवर एयरपोर्ट के आसपास प्रॉपर्टी, मकान या जमीन खरीदने की सोच रहे हैं तो बजट बढ़ा लीजिए. यूपी सरकार गौतमबुद्ध नगर जिले में सर्कल रेट जल्द बढ़ाने वाली है, जिसके बाद प्रॉपर्टी की कीमतों में भी बड़ा उछाल आना तय है. सरकार ने फ्लैट, जमीन और कॉमर्शियल प्रॉपर्टी के लिए अलग-अलग सर्किल रेट बढ़ाने का फैसला किया है. जाहिर है कि इन प्रॉपर्टी की कीमतों में भी अलग-अलग तरह का उछाल आएगा.
यूपी स्टाम्प और पंजीकरण विभाग नए वित्तीय वर्ष में नोएडा में संशोधित संपत्ति सर्कल दरें लागू करने की संभावना है, जिसमें 20 फीसदी से 70 फीसदी तक की वृद्धि हो सकती है. गौतमबुद्ध नगर में संपत्ति की कीमतें, जिसमें नोएडा, ग्रेटर नोएडा, जेवर और यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र शामिल हैं, सर्कल दरों में वृद्धि के कारण बढ़ने की उम्मीद है.
स्टांप ड्यूटी में होगी बढ़ोतरी
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि सर्कल रेट में वृद्धि होने से स्टांप ड्यूटी बढ़ जाती है, जिससे संपत्ति खरीदने वालों के लिए लेन-देन की लागत बढ़ जाती है. खासकर उन लोगों के लिए जिनका बजट पहले से ही सीमित है और जो बढ़ती संपत्ति की कीमतों का सामना कर रहे हैं. लिहाजा सर्कल रेट में प्रस्तावित वृद्धि का निकट भविष्य में बिक्री पर भी कुछ प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि बढ़ी हुई संपत्ति की कीमतों के अलावा घर खरीदारों को अधिक स्टांप ड्यूटी शुल्क भी चुकाने होंगे.
क्या होता है सर्कल रेट
सरकार द्वारा निर्धारित सर्कल रेट्स संपत्ति के न्यूनतम मूल्यांकन को तय करते हैं, जिससे स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन की लागत निकाली जाती है. सर्कल रेट्स आमतौर पर हर साल संशोधित किए जाते हैं, लेकिन यूपी सरकार ने पिछले नौ साल से गौतमबुद्ध नगर जिले के लिए रेट्स नहीं बढ़ाए हैं. इसमें बदलाव के तहत, जिला मजिस्ट्रेट कृषि और गैर-कृषि भूमि के लिए प्रति हेक्टेयर या प्रति वर्ग मीटर की न्यूनतम कीमतें तय करते हैं. जिला प्रशासन द्वारा जारी रेट्स को डीएम सर्कल रेट्स कहा जाता है और ये विकास प्राधिकरणों द्वारा जारी किए गए सर्कल रेट्स से अलग होते हैं.
कितना बढ़ेगा सर्कल रेट
नोएडा में ऊंची इमारतों के सर्कल रेट में 20 फीसदी की बढ़ोतरी की संभावना है, जबकि ग्रेटर नोएडा में 30 फीसदी की वृद्धि देखी जाएगी. नोएडा के बहुमंजिला सर्कल रेट में प्रस्तावित 20 फीसदी की वृद्धि से उच्च वर्गीय सेक्टर जैसे 14ए, 15ए और 44 में वर्तमान दरें 1.03 लाख – 1.2 लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर से बढ़कर 1.2 लाख-1.4 लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर हो जाएंगी. ग्रेटर नोएडा में प्रस्तावित संशोधन से सेक्टर अल्फा 1 और 2, गामा 1 और 2, और बीटा 1 और 2 में कोंडोमिनियम फ्लैट के सर्कल रेट 28,000-28,500 रुपये प्रति वर्गमीटर से बढ़कर 36,400-37,050 रुपये प्रति वर्ग मीटर हो जाएंगे. जेवर क्षेत्र में, जहां नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बन रहा है, संपत्ति की कीमतों में प्रस्तावित सर्कल रेट में 70 फीसदी की वृद्धि का अनुमान है.
बढ़ जाएंगी मकानों की कीमतें
रियल एस्टेट विशेषज्ञों का कहना है कि नोएडा, जेवर और ग्रेटर नोएडा में सर्कल रेट्स में प्रस्तावित वृद्धि से घर खरीदने वालों पर बोझ बढ़ना तय है. सर्कल रेट्स बढ़ने से संपत्ति लेनदेन पर लगने वाले स्टांप शुल्क की कीमत भी बढ़ जाएगी. संपत्ति सलाहकार फर्म ANAROCK के वाइस चेयरमैन संतोश कुमार ने कहा कि यह इन क्षेत्रों में डेवलपर्स द्वारा पहले से ही आवासीय संपत्ति की कीमतों में बढ़ोतरी हो रही है और अब सर्कल रेट बढ़ने का भी असर होगा.
कहां-कितनी बढ़ी है कीमत
ANAROCK रिसर्च के अनुसार, नोएडा में औसत आवासीय कीमतों में साल 2019 के अंत से 2025 की पहली तिमाही तक 92 फीसदी की महत्वपूर्ण वृद्धि देखी गई है. यहां कीमत 2019 के अंत में 4,795 रुपये प्रति वर्गफुट से बढ़कर 2025 की पहली तिमाही के अंत तक लगभग 9,200 रुपये प्रति वर्ग फुट हो गई है. ग्रेटर नोएडा में औसत कीमतों में इसी अवधि में 97 फीसदी की वृद्धि हुई है, जो 3,340 रुपये प्रति वर्गफुट से बढ़कर 6,600 रुपये प्रति वर्गफुट हो गई है. गौर ग्रुप के सीएमडी और CREDAI नेशनल के चेयरमैन मनोज गौड़ का कहना है कि प्रस्तावित 20 फीसदी की वृद्धि से कुल कीमतों में भारी इजाफा होगा, जो पहले से ही दोगुनी हो चुकी हैं.
घर खरीदारों की बढ़ गई चिंता
सर्कल रेट में हो रही इस बढ़ोतरी की वजह से मकान खरीदारों की चिंता भी बढ़ गई है. नोएडा फेडरेशन ऑफ अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशंस के अध्यक्ष राजीव सिंह ने कहा कि कई घर खरीदार पंजीकरण और कब्जे के लिए एक दशक से अधिक समय से इंतजार कर रहे हैं. जब भी सर्कल रेट बढ़ते हैं तो ऐसे घर खरीदार भी प्रभावित होते हैं, क्योंकि उन्हें स्टाम्प ड्यूटी के लिए अधिक पैसे देने पड़ते हैं. लिहाजा ऐसे खरीदारों को सर्कल रेट से छूट दी जानी चाहिए, जिन्होंने पहले ही बुकिंग करा लिया था और पजेशन के बाद उन्हें रजिस्ट्री करानी होती है. यह नियम बदलना चाहिए.