Last Updated:February 14, 2026, 20:33 IST
West Bengal School: धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि ममता बनर्जी सरकार ने पश्चिम बंगाल में राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू नहीं की. राष्ट्रीय शिक्षा नीति मातृभाषा में शिक्षा की बात करती है, और पश्चिम बंगाल में यह बंगाली होनी चाहिए थी. पश्चिम बंगाल सरकार बंगाली में शिक्षा की अनुमति नहीं देना चाहती. उनके अनुसार, पश्चिम बंगाल में देश के कुल स्कूलों में से लगभग 50 प्रतिशत ऐसे स्कूल हैं जहां एक भी शिक्षक नहीं है.

कोलकाता. पश्चिम बंगाल की शिक्षा व्यवस्था वेंटिलेटर पर है. यह हम नहीं कह रहे, बल्कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) की तरफ से शनिवार को कोलकाता में पेश किए गए आंकड़े गवाही दे रहे हैं. उन्होंने ममता बनर्जी सरकार की पोल खोलते हुए एक बेहद डरावनी तस्वीर पेश की है. प्रधान ने खुलासा किया कि देश में सबसे ज्यादा शिक्षक-विहीन (Teacher-less) स्कूल अगर कहीं हैं, तो वो पश्चिम बंगाल में हैं. यही नहीं, राज्य सरकार की राजनीतिक जिद के कारण बंगाल ने केंद्र से मिलने वाले 10,000 करोड़ रुपये भी गंवा दिए हैं.
बीजेपी द्वारा आयोजित शिक्षक सम्मेलन में धर्मेंद्र प्रधान ने जो आंकड़े रखे, वे किसी भी अभिभावक की नींद उड़ाने के लिए काफी हैं. बंगाल में लगभग 4,000 सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जहां एक भी शिक्षक नहीं है. पूरे देश में जितने भी स्कूल बिना शिक्षकों के चल रहे हैं, उनमें से 50% अकेले पश्चिम बंगाल में हैं. यानी बाकी पूरा देश एक तरफ और ममता का बंगाल एक तरफ. शिक्षा व्यवस्था में आई यह गिरावट बताती है कि टीएमसी सरकार के राज में बच्चों के भविष्य के साथ कैसा खिलवाड़ हो रहा है.
NEP लागू न करने की जिद और 10,000 करोड़ का नुकसान
प्रधान ने आरोप लगाया कि ममता सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को अहंकार का मुद्दा बना लिया है. बार-बार अनुरोध करने के बावजूद बंगाल सरकार ने NEP लागू नहीं की. नतीजा यह हुआ कि समग्र शिक्षा मिशन के तहत मिलने वाली 10,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त केंद्रीय निधि राज्य को नहीं मिल पाई. केंद्रीय मंत्री ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि NEP मातृभाषा (बंगाली) में पढ़ाई की बात करती है, लेकिन ममता सरकार इसे लागू नहीं करना चाहती. क्या राज्य सरकार बंगाली में शिक्षा की अनुमति नहीं देना चाहती?
डिजिटल इंडिया में ‘बफरिंग’ करता बंगाल
जहां पूरा देश डिजिटल हो रहा है, वहां बंगाल के स्कूल पाषाण युग में जी रहे हैं. प्रधान ने बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर स्कूलों में इंटरनेट की पहुंच 70% है, लेकिन पश्चिम बंगाल के सरकारी स्कूलों में यह आंकड़ा गिरकर महज 16% रह गया है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने प्रतिष्ठित जादवपुर विश्वविद्यालय के लिए केंद्र द्वारा प्रस्तावित एक्स्ट्रा फंड को भी लेने से इनकार कर दिया.
2026 विधानसभा चुनाव: शिक्षा होगा मुख्य मुद्दा
केंद्रीय मंत्री ने साफ कर दिया कि अगर 2026 के विधानसभा चुनावों के बाद भाजपा सत्ता में आती है, तो शिक्षा क्षेत्र उनका ‘प्राइम फोकस’ होगा. उन्होंने बंगाल की जनता को संदेश दिया कि वर्तमान सरकार ने शिक्षा को बर्बाद कर दिया है और अब बदलाव ही एकमात्र रास्ता है.
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राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h...और पढ़ें
Location :
Kolkata,West Bengal
First Published :
February 14, 2026, 20:30 IST

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