बांग्लादेश में भी 'BJP' की जीत, 105543 वोट पाकर अंदलीव रहमान की जीत ने बढ़ाई हलचल

1 hour ago

BJP in bangladesh: बांग्लादेश के संसदीय चुनाव 2026 में एक ऐसा नतीजा सामने आया, जिसने सीमापार लोगों को भी चौंका दिया है. चुनाव में बीजेपी नाम की पार्टी को एक सीट मिली, लेकिन यह भारत की पार्टी नहीं है. यह बांग्लादेश जातिय पार्टी है, जिसका नेतृत्व अंदलीव रहमान करते हैं. उन्होंने कड़े मुकाबले में जीत दर्ज की है. यह चुनाव उस दौर के बाद हुआ है, जब 2024 में छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना की सरकार सत्ता से हट गई थी.

भोला-1 सीट पर की जीत हासिल 
भोला-1 सीट पर अंदलीव रहमान ने बड़ी बढ़त के साथ जीत हासिल की है. आधिकारिक केंद्र से मिले आंकड़ों के अनुसार उन्हें 1,05,543 वोट मिले. उनके प्रतिद्वंद्वी जमात-ए-इस्लामी के उम्मीदवार मोहम्मद नजरुल इस्लाम को 75,337 वोट मिले. इस तरह उन्होंने साफ अंतर से जीत दर्ज की है. हालांकि उनकी पार्टी को इस चुनाव में सिर्फ यही एक सीट मिली. उसी क्षेत्र में हुए जनमत संग्रह में भी लोगों ने हां के पक्ष में भारी मतदान किया है.

पूरे देश की तस्वीर देखें तो चुनाव में सबसे बड़ी जीत  बांग्लादेश जातिय पार्टी यानी बीएनपी को मिली है. चुनाव आयोग ने आवामी लीग का पंजीकरण निलंबित कर दिया था. इसके बाद मुकाबला मुख्य रूप से बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी के बीच रह गया. अनौपचारिक नतीजों के मुताबिक बीएनपी ने 300 सदस्यीय जातीय संसद में 200 से ज्यादा सीटें हासिल कर ली हैं. इससे अंतरिम सरकार से चुनी हुई सरकार को सत्ता हस्तांतरण का रास्ता साफ हो गया है. अंतरिम व्यवस्था का नेतृत्व मुहम्मद यूनुस कर रहे थे.

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राजनीति में हुई तारिक रहमान की वापसी
इन चुनावों से तारिक रहमान की राजनीति में बड़ी वापसी हुई है. वह पूर्व राष्ट्रपति जियाऊर रहमान और पूर्व प्रधानमंत्री खलिदा जिया के बेटे हैं. लंबे समय तक निर्वासन और राजनीतिक विवादों के बाद अब वह सत्ता के करीब पहुंच गए हैं. माना जा रहा है कि वह रविवार को प्रधानमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं. उनकी जीत को ढाका की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है.

यह 13वां संसदीय चुनाव उस दौर के बाद हुआ है, जब 2024 में छात्र आंदोलन ने देश की राजनीति बदल दी थी. अवामी लीग पर रोक लगने और शेख हसीना के देश छोड़ने से सत्ता का खालीपन पैदा हो गया था. अब बीएनपी ने उस जगह को भर दिया है. अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने चुनाव में अच्छे मतदान और अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण माहौल को लोकतंत्र की वापसी का संकेत बताया है. इससे देश में नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है. 

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