Last Updated:February 22, 2026, 08:03 IST
AI Summit Declaration: नई दिल्ली में आयोजित AI इम्पैक्ट समिट 2026 में भारत के ‘AI for All’ विजन को 86 देशों का समर्थन मिला. अमेरिका और चीन समेत दुनिया की बड़ी ताकतों ने नई दिल्ली डिक्लेरेशन पर सहमति जताई. इस घोषणा ने एआई को मानवता के साझा संसाधन के रूप में स्थापित किया, जबकि पाकिस्तान इस वैश्विक तकनीकी पहल से बाहर रह गया. लेकिन पाकिस्तान कहीं पीछे छूट गया. क्योंकि पाकिस्तान विकास की राह पर नहीं विनाश की राह पर चल रहा है.

AI Summit Declaration: भारत जहां दिन-प्रतिदिन तरक्की कर रहा है. वहीं पाकिस्तान तरक्की के नाम पर खुद को नुकसान पहुंचा रहा है. भारत ने अपनी राजधानी दिल्ली में एक बार फिर वैश्विक कूटनीति और टेक्नोलॉजी का लोहा AI इम्पैक्ट समिट 2026 करवाकर मनाया. AI इम्पैक्ट समिट में भारत ने ऐसा मंच तैयार किया, जहां दुनिया के 86 देशों ने एक साथ खड़े होकर ‘AI for All’ के विजन का समर्थन किया. इसमें चीन और अमेरिका का भी समर्थन शामिल है. भारत के घोषणा पत्र पर 86 देशें की मुहर ने बता दिया कि आज भारत चीन और अमेरिका को टेक्नोलॉजी में टक्कर दे रहा है. वहीं पाकिस्तान सपने में तरक्की कर रहा है. AI Impact Summit 2026 के समापन पर जारी हुए ‘नई दिल्ली डिक्लेरेशन’ से साफ हो गया कि AI के भविष्य में भारत की भूमिका अब निर्णायक होती जा रही है.
‘नई दिल्ली डिक्लेरेशन’ ने यह संदेश दिया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब कुछ अमीर देशों का विशेष अधिकार नहीं रहेगा. छोटे-छोटे लेकिन प्रभावी वाक्यों में दुनिया को चेताया गया कि आज लिए गए फैसले आने वाली पीढ़ियों की डिजिटल दुनिया तय करेंगे. भारत ने ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के सिद्धांत को तकनीकी नीति से जोड़ते हुए AI को मानवता के साझा संसाधन के रूप में पेश किया. दिलचस्प बात यह रही कि जहां 86 देशों ने समर्थन दिया, वहीं पाकिस्तान इस वैश्विक सहमति से बाहर रह गया.
भारत की टेक डिप्लोमेसी की बड़ी जीत
नई दिल्ली डिक्लेरेशन का मुख्य उद्देश्य AI को सहयोग, भरोसे और समान अवसरों के आधार पर विकसित करना है. इसमें AI संसाधनों को लोकतांत्रिक बनाने, तकनीकी असमानता कम करने और विकासशील देशों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया है. इस डिक्लेरेशन को सात प्रमुख ‘एक्शन पिलर्स’ में बांटा गया है, जिन्हें ‘चक्र’ कहा गया है. इन चक्रों में सुरक्षित AI सिस्टम, आर्थिक विकास, वैज्ञानिक शोध में एआई, सामाजिक सशक्तिकरण, मानव संसाधन विकास और नवाचार को बढ़ावा देना शामिल है. इसके तहत Global AI Impact Commons जैसे प्लेटफॉर्म बनाए जाएंगे, जहां देश एआई के सफल मॉडल और तकनीकी समाधान साझा कर सकेंगे. इसका मकसद तकनीक को तेज़ी से लागू करना और वैश्विक सहयोग बढ़ाना है. डिक्लेरेशन में Trusted AI Commons का भी जिक्र है, जो सरकारों और डेवलपर्स को सुरक्षित और भरोसेमंद एआई सिस्टम बनाने में मदद करेगा. यह प्लेटफॉर्म विभिन्न कानूनी और सांस्कृतिक ढांचों के अनुरूप एआई विकास को आसान बनाएगा.समझिए पूरी खबर
नई दिल्ली घोषणा भारत के लिए इतनी बड़ी उपलब्धि क्यों मानी जा रही है?
क्योंकि पहली बार एआई गवर्नेंस पर ग्लोबल साउथ की सोच को वैश्विक समर्थन मिला है. भारत ने विकसित और विकासशील देशों के बीच तकनीकी पुल बनाने की भूमिका निभाई है. इससे भारत की डिजिटल कूटनीति मजबूत हुई है और वह एआई नीति निर्माण में अग्रणी देश बनकर उभरा है.
अमेरिका और चीन का एक साथ समर्थन क्यों अहम है?
AI के क्षेत्र में दोनों देश प्रतिद्वंद्वी माने जाते हैं. ऐसे में दोनों का एक ही डिक्लेरेशन पर सहमत होना दिखाता है कि AI नियमों पर वैश्विक सहमति की जरूरत महसूस की जा रही है. यह भविष्य में साझा मानकों और सहयोग का रास्ता खोल सकता है.
पाकिस्तान के बाहर रहने का क्या मतलब है?
इसका संकेत यह है कि वैश्विक तकनीकी सहयोग में सक्रिय भागीदारी और कूटनीतिक संतुलन अहम है. पाकिस्तान का नाम साइन करने वाले देशों की सूची में नहीं होना उसकी सीमित भागीदारी को दर्शाता है, जबकि भारत वैश्विक मंच पर नेतृत्व की भूमिका में दिखा. साथ ही यह भी बताता है कि पाकिस्तान तरक्की की राह पर नहीं चलना चाहता है.
ग्लोबल साउथ को मिलेगा बड़ा फायदा
इस घोषणा का सबसे बड़ा लाभ विकासशील देशों को मिलने की उम्मीद है. एआई रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर साझा किया जाएगा. वैज्ञानिक सहयोग बढ़ेगा. मानव संसाधन विकास पर निवेश होगा. इससे तकनीकी असमानता कम करने और डिजिटल विकास को गति देने में मदद मिलेगी.
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सुमित कुमार News18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 3 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. News18 हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह...और पढ़ें
First Published :
February 22, 2026, 08:03 IST

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