Last Updated:January 23, 2026, 14:46 IST
Budget History : 1 फरवरी को देश का बजट आने वाला है, लेकिन आपको पता है कि भारत के बजट का इतिहास बड़ा ही रोचक है. जब से बजट पेश होना शुरू हुआ है, तब से अब तक कई ऐसे वाक्ये हुए हैं जो सुनने-पढ़ने में किसी अजूबे से कम नहीं लगते. हम आपके लिए ऐसी ही 10 घटनाओं की लिस्ट लेकर आए हैं.

पहले 5 बजे आता था बजट : ब्रिटिश राज में बजट शाम 5 बजे पेश किया जाता था, क्योंकि भारत में जब शाम के 5 बजते थे तो लंदन में सुबह 11:30 बज रहे होते. यह परंपरा तो आजादी के बाद भी साल 1999 तक चली. भाजपा सरकार में साल 2001 में यशवंत सिन्हा ने इसका समय सुबह 11 बजे कर दिया था.

बजट बंकर परंपरा : साल 1950 से पहले बजट राष्ट्रपति भवन में छपता था, लेकिन इसी साल बजट लीक हो गया. तब से बजट प्रिंटिंग नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में एक सीक्रेट बंकर में होती है. बजट टीम में शामिल करीब 100 लोगों को 8-10 दिन पहले ही 'लॉक-इन' कर दिया जाता है. उनके पास मोबाइल, इंटरनेट कुछ भी नहीं होता और न ही कोई बाहरी संपर्क रहता है. बजट गोपनीयता बनाए रखने के लिए आज भी यह परंपरा चल रही है.

हलवा सेरेमनी : आप सोच रहे होंगे कि आखिर बजट से पहले हलवा क्यों बनाया जाता है. यह भारतीय परंपरा से जुड़ी शुभ शुरुआत का संकेत है. जब से यह परंपरा शुरू हुई है, तब से अब तक सिर्फ कोरोनाकाल में एक बार टूटी है. इसमें बजट प्रिंटिंग शुरू होने से ठीक पहले वित्त मंत्रालय में बड़ी सी कढ़ाई में हलवा बनता है. वित्तमंत्री खुद इसे सर्व करते हैं और पूरी टीम को खिलाते हैं.
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सबसे छोटा बजट : जो लोग वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण का बजट भाषण सुनते आए हैं, उन्हें तो अंदाजा भी नहीं होगा कि आज 400-500 पन्ने में जारी होने वाला बजट एक बार महज 800 शब्दों का ही था. साल 1977 में अंतरिम वित्तमंत्री हीरूभाई एम. पटेल ने सिर्फ 800 शब्दों का बजट जारी किया था. वो सिर्फ आउटले (खर्च का ब्योरा) पढ़कर चुप हो गए, जबकि सबसे लंबा बजट निर्मला सीतारमण ने साल 2020 में 2 घंटे 42 मिनट का पेश किया था.

अनोखे टैक्स : आजादी के बाद 10 साल तक भारतीय नागरिकों को कई अनोखे टैक्स लगाए जाते थे. जैसे क्रॉसवर्ड पजल या कॉम्पिटिशन में जीते इनाम पर, गिफ्ट टैक्स, खर्च करने पर टैक्स! फिलहाल इसमें काफी बदलाव किया गया लेकिन आज भी गिफ्ट और मोटे खर्चे पर टैक्स लगाया जाता है.

2018 तक ब्रिटिश नियम : भारत के बजट को साल 2018 तक काले या लाल ब्रीफकेस जो ब्रिटिश ग्लैडस्टोन बॉक्स की कॉपी होता था, इसी का इस्तेमाल किया जाता रहा. साल 2019 में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने इस औपनिवेशिक परंपरा को छोड़कर लाल रंग का पारंपरिक 'बही-खाता' इस्तेमाल किया और तब से अब तक यही चल रहा है.

अंग्रेज नागरिक ने पेश किया था बजट : भारत का पहला बजट 7 अप्रैल, 1860 को पेश किया गया था. तब देश पर अंग्रेजी हुकूमत थी और इसका मकसद 1857 की क्रांति के बाद अंग्रेजी खजाने में राजस्व जुटाना था. तब इस बजट को ईस्ट इंडिया कंपनी की ओर से स्कॉटलैंडयार्ड के नागरिक जेम्स विल्स ने पेश किया था. इसी बजट में अंग्रेजों ने देश के नागरिकों पर टैक्स लगाया.

पाक नेता ने पेश किया भारत का बजट : आपको जानकर हैरानी होगी कि लेकिन यह 100 फीसदी सच है कि आजादी से ठीक पहले भारत का बजट एक पाकिस्तानी नेता ने पेश किया था. साल 1946 में लियाकत अली खान ने 'गरीब आदमी का बजट' पेश किया था, जिसमें अमीरों पर भारी टैक्स लगाए गए थे. बाद में लियाकत अली पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने थे.

पीएम ने पेश किया बजट : भरत के बजट इतिहास में अब तक 3 बार ही ऐसा मौका आया है, जब वित्तमंत्री के बजाय सीधे प्रधानमंत्री को बजट पेश करना पड़ा. पहले साल 1958 में देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू. इसके बाद साल 1970 में मोरारजी देसाई के इस्तीफे के बाद इंदिरा गांधी और फिर राजीव गांधी ने बतौर पीएम बजट पेश किया था.

रेल बजट का खात्मा : आपको जानकर हैरानी होगी कि देश में रेल बजट को अलग से पेश किया जाता था और यह परंपरा 92 साल तक चली. इसकी शुरुआत साल 1924 से हुई थी और 2017 में इसे खत्म करके आम बजट के साथ ही मर्ज कर दिया गया. तब दिवंगत नेता अरुण जेटली ने रेल बजट को आम बजट के साथ ही विलय कर दिया था.
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2 hours ago
