Last Updated:January 22, 2026, 11:57 IST
I-PAC Raid: प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म I-PAC के ऑफिस और संस्था के प्रमुख प्रतीक जैन के आवास पर छापा मारा था. इस मामले ने उस वक्त राजनीतिक रंग ले लिया, जब बंगाल की सीएम रेड वाले स्थान पर पहुंच गईं. आरोप है कि सीएम ममता अपने साथ कुछ दस्तावेज भी लेकर चली गईं. जांच एजेंसी ने इससे मामले की छानबीन के प्रभावित होने और दखल देने का आरोप लाया है.
I-PAC Raid: I-PAC रेड मामले में इसके चीफ प्रतीक जैन और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं. इस तस्वीर में ममता के साथ अभिषेक बनर्जी (बीच में) और आई-पैक चीफ प्रतीक जैन दिख रहे हैं. (फाइल फोटो/PTI)I-PAC Raid: पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म I-PAC चौतरफा मुश्किलों में घिरती नजर आ रही है. बिना अस्तित्व वाली कंपनी से करोड़ों रुपये का अनसिक्योर्ड लोन लेने का खुलासा होने के बाद I-PAC पर कानूनी एजेंसियों का शिकंजा अब और कस सकता है. दूसरी तरफ, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने I-PAC चीफ प्रतीक जैन को समन करने की तैयारी में है. जांच एजेंसी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ भी लीगल एक्शन को आगे बढ़ाएगी. ईडी ने I-PAC पर मनी लॉन्ड्रिंग का गंभीर आरोप लगाया है. कंपनी के ऑफिस और इसके चीफ के आवास पर छापे भी मारे गए. जांच एजेंसी की कोलकाता में जब कार्रवाई चल रही थी तो अचानक से मौके पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पहुंच गईं और आरोप है कि कुछ अति महत्वपूर्ण दस्तावेज वे अपने साथ लेकर चली गईं. यह मामला कोर्ट भी पहुंच चुका है.
जानकारी के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच तेज कर दी है. एजेंसी के शीर्ष अधिकारियों ने बुधवार को कोलकाता में समीक्षा बैठक की, जिसमें ईडी के निदेशक राहुल नवीन भी मौजूद रहे. सूत्रों के मुताबिक, I-PAC प्रमुख प्रतीक जैन को जल्द ही पूछताछ के लिए समन जारी किया जा सकता है, क्योंकि उनके सहयोगियों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं और जांच एक अहम मोड़ पर पहुंच गई है. ईडी इस मामले में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य सरकार के अधिकारियों के खिलाफ ‘सबूत नष्ट करने’ के आरोपों पर आगे बढ़ने की तैयारी कर रही है. एजेंसी का दावा है कि उसके पास ऐसे वीडियो फुटेज हैं, जिनमें 8 जनवरी 2026 को I-PAC परिसरों पर तलाशी के दौरान मुख्यमंत्री और उनके सहयोगियों द्वारा दस्तावेजों और डिजिटल उपकरणों को हटाते हुए देखा गया है. ईडी का मानना है कि इन साक्ष्यों के आधार पर वह अलग मामला दर्ज कर सकती है.
क्या है मामला?
यह जांच कथित कोयला तस्करी घोटाले से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग की जांच का हिस्सा है. इस मामले में मुख्य आरोपी अनुप मज्जी पर आरोप है कि उसने ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) के लीज क्षेत्र से अवैध कोयला खनन कर उसे पश्चिम बंगाल के बांकुरा, बर्दवान, पुरुलिया सहित अन्य जिलों की फैक्ट्रियों और संयंत्रों को बेचा. ईडी का दावा है कि इस अवैध कारोबार से जुटाई गई बड़ी रकम को हवाला नेटवर्क के जरिए इधर-उधर किया गया. ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के अनुसार, एजेंसी का कहना है कि जांच के दौरान कुछ हवाला कारोबारियों से पूछताछ की गई और उनके बयान दर्ज किए गए हैं, जिनमें कथित तौर पर I-PAC तक धन पहुंचाने की बात सामने आई है. ईडी ने कहा कि उसकी टीम उन लोगों पर कार्रवाई कर रही है, जो कोयला तस्करी से अर्जित अपराध की आय के सृजन, लेयरिंग और संचालन में शामिल रहे हैं. एजेंसी के अनुसार, I-PAC भी हवाला धन से जुड़े संस्थानों में से एक है.
सीएम ममता बनर्जी पर कानूनी शिकंजा
ईडी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपनी आपराधिक रिट याचिका में प्रतिवादी संख्या दो बनाया है. यह याचिका 8 जनवरी की तलाशी कार्रवाई में कथित बाधा और साक्ष्य नष्ट किए जाने के आरोपों को लेकर दायर की गई है. इस मामले में राज्य के पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार, कोलकाता पुलिस आयुक्त मनोज वर्मा, दक्षिण कोलकाता के डीसीपी प्रियब्रत रॉय और सीबीआई को भी प्रतिवादी बनाया गया है. इसके अलावा, केंद्र सरकार के गृह सचिव और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के सचिव को भी पक्षकार बनाया गया है. सुप्रीम कोर्ट ने सभी को नोटिस जारी कर दिए हैं और मामले की अगली सुनवाई फरवरी के पहले सप्ताह में तय की गई है.
ED का क्या है आरोप?
ईडी का आरोप है कि 8 जनवरी को जब उसकी टीम प्रतीक जैन के आवास और I-PAC कार्यालय में तलाशी के लिए पहुंची, तब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी वहां पहुंचीं और कथित तौर पर भौतिक दस्तावेजों व इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को हटवा लिया गया. एजेंसी का दावा है कि मुख्यमंत्री के काफिले के साथ राज्य पुलिस के कुछ वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर मौजूद थे और उन्होंने जांच में बाधा डाली. ईडी के मुताबिक, इन घटनाओं के वीडियो सबूत उसके पास मौजूद हैं, जिन्हें अदालत में पेश किया जा सकता है. इस पूरे घटनाक्रम के बाद से राजनीतिक माहौल भी गरमा गया है. तृणमूल कांग्रेस ने ईडी की कार्रवाई को ‘राजनीतिक बदले की भावना’ से प्रेरित बताते हुए आरोप लगाया है कि केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर विपक्षी दलों को निशाना बनाया जा रहा है. वहीं, भाजपा और अन्य विपक्षी दलों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और यदि साक्ष्य नष्ट किए गए हैं तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई होनी चाहिए.
क्या जानना चाहती है जांच एजेंसी?
सूत्रों के अनुसार, ईडी अब I-PAC प्रमुख प्रतीक जैन से पूछताछ के जरिए यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि संस्था को कथित तौर पर हवाला के जरिए जो धन मिला, उसका स्रोत क्या था और उसका उपयोग किन उद्देश्यों के लिए किया गया. एजेंसी यह भी जांच कर रही है कि क्या इस धन का इस्तेमाल राजनीतिक अभियानों या अन्य गतिविधियों में किया गया. जांच एजेंसी के अधिकारियों का कहना है कि मामला संवेदनशील है और इसमें बड़े पैमाने पर वित्तीय लेन-देन के संकेत मिले हैं. ईडी की अगली कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई और प्रतीक जैन की संभावित पूछताछ के बाद तय होगी. इस बीच, बंगाल की राजनीति में यह मुद्दा आने वाले दिनों में और अधिक गर्माने के आसार हैं, क्योंकि मामला न सिर्फ वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा है बल्कि इसमें राज्य और केंद्र सरकारों के बीच टकराव के संकेत भी साफ दिखाई दे रहे हैं.
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बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु...और पढ़ें
Location :
Kolkata,West Bengal
First Published :
January 22, 2026, 11:57 IST

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