ICE Agents Harassment: अमेरिका के टेक्सास से एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है. जानकारी के मुताबिक, टेक्सास के एक मॉल में खरीदारी के दौरान भारतीय मूल की एक बुजुर्ग महिला को अमेरिकी इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) एजेंटों द्वारा रोका गया और उनकी उम्र का लिहाज किए बगैर उनकी जांच की गई. इस घटना को उनकी बेटी, भारतीय-अमेरिकी डॉक्टर निशा पटेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किया है.
ट्रंप के एजेंटों ने महिला से की बदसलूकी
डॉ. पटेल के अनुसार, उनकी मां के पास नकाबपोश ICE एजेंट पहुंचे और उनके लहजे के आधार पर यह मान लिया कि वह स्पेनिश भाषी हैं. एजेंटों ने उनसे स्पेनिश में बात करना शुरू किया. जब महिला ने स्पष्ट किया कि वह स्पेनिश नहीं बोलती हैं, तो एजेंटों ने उनसे कहा कि आप कहां से हैं जैसे सवाल पूछने शुरू कर दिए और बिना जवाब का इंतजार किए विभिन्न देशों के नाम गिनाने लगे.
महिला डॉक्टर ने साझा किया अपना दर्द
डॉ. पटेल ने बताया कि उनकी मां ने एजेंटों को बताया कि वह पिछले 47 वर्षों से अमेरिका में रह रही हैं और अमेरिकी नागरिक हैं. इसके बावजूद, एजेंटों ने तब तक उन्हें जाने नहीं दिया, जब तक उन्होंने अपने मोबाइल फोन पर अपने अमेरिकी पासपोर्ट की तस्वीर नहीं दिखाई. इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. पटेल ने लिखा कि वह एक अमेरिकी नागरिक हैं और इस देश में उन लोगों से भी ज्यादा समय से रह रही हैं, जो आज उनसे सवाल पूछ रहे हैं. अगर कोई सोचता है कि यह सिर्फ ‘अपराधियों को निर्वासित करने’ तक सीमित है, तो वह गलत है.
My mom was stopped and harassed by masked ICE agents while shopping at an outlet mall in Texas. Because she has an accent, they assumed she spoke Spanish and started talking to her in Spanish. When she said she doesn’t speak Spanish, they began demanding where she was “from,”…
— Nisha Patel, MD MS, Dipl of ABOM, CCMS (@DrPlantel) January 25, 2026
यह मामला अमेरिका में ICE और संघीय आव्रजन प्रवर्तन एजेंसियों की कार्यप्रणाली को लेकर बढ़ती आलोचना के बीच सामने आया है. बता दें कि हाल के दिनों में संघीय इमिग्रेशन एजेंटों से जुड़ी गोलीबारी की घटनाओं के बाद मिनियापोलिस, न्यूयॉर्क, सैन फ्रांसिस्को, बोस्टन सहित कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए हैं.
आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024 में अमेरिका में इमिग्रेशन उल्लंघनों के चलते 2647 भारतीय नागरिकों को ICE हिरासत में लिया गया, जिनमें वीजा अवधि से अधिक रुकना और अवैध प्रवेश जैसे मामले शामिल हैं. इस आधार पर भारतीय नागरिक ICE हिरासत में ली गई राष्ट्रीयताओं में चौथे स्थान पर रहे. 2025 के अंत तक यह संख्या बढ़कर 3258 से अधिक बताई गई है.
ये भी पढ़ें: कानून के नाम पर खून? ट्रंप की इमिग्रेशन कार्रवाई ने फिर ली जान; कौन है कत्ल किया गया शख्स?
वहीं, डेमोक्रेटिक नेताओं ने हिरासत की प्रक्रिया को अत्यधिक आक्रामक करार दिया है. दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का कहना है कि संघीय एजेंटों की तैनाती बढ़ते अपराध और कथित धोखाधड़ी पर लगाम लगाने के लिए की गई है.

1 hour ago
