यूक्रेन की बलि और भारत से यारी? EU-India फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर अमेरिका ने यूरोप को घेरा

1 hour ago

US Treasury Secretary: अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने यूरोप के रवैये पर नाराजगी जताई है. उन्होंने कहा कि यूरोप ने यूक्रेन युद्ध के बीच भारत के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी FTA को प्राथमिकता दी है, जोकि बेहद निराश करने वाला है. 

स्कॉट बेसेंट का यह बयान ऐसे समय आया है जब यूरोपीय यूनियन ने भारत के साथ लंबे समय से अटके व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया है. इस समझौते का मकसद यूरोप और भारत के बीच व्यापार को बढ़ाना और अमेरिका पर यूरोप की निर्भरता को कम करना बताया गया है. खासकर तब जब दुनिया में व्यापार को लेकर तनाव बढ़ रहा है.

इस समझौते के तहत यूरोप और भारत के बीच होने वाले व्यापार में करीब 96.6 फीसदी सामान पर टैक्स या तो खत्म किया जाएगा या कम किया जाएगा. उम्मीद है कि इससे साल 2032 तक यूरोप का भारत को एक्सपोर्ट लगभग दोगुना हो सकता है. साथ ही यूरोपीय कंपनियों को हर साल करीब 4 अरब यूरो की बचत हो पाएगी.

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आगे बेसेंट ने कहा कि यही वजह है कि यूरोपीय यूनियन ने अमेरिका के उस फैसले का समर्थन नहीं किया है, जिसमें भारत पर ज्यादा टैरिफ लगाने की बात थी. उन्होंने कहा कि यूरोप अमेरिका के साथ इसलिए नहीं आया क्योंकि वह भारत के साथ यह व्यापार समझौता करना चाहता था. उन्होंने साफ कहा कि जब भी कोई यूरोपीय नेता यूक्रेन के लोगों की बात करे तो यह याद रखना चाहिए कि उन्होंने व्यापार को पहले रखा है.

अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी ने यूरोप पर एक और गंभीर आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि यूरोपीय देश अप्रत्यक्ष रूप से रूस की जंग को पैसा दे रहे हैं. बेसेंट का कहना है कि रूस का कच्चा तेल भारत जाता है. वहां उसका रिफाइंड प्रोडक्ट बनता है. फिर वही यूरोपीय देश उसे खरीदते हैं. उन्होंने कहा कि इस तरह यूरोप खुद के खिलाफ चल रही जंग को फंड कर रहा है.

उन्होंने यह भी बताया कि इस समझौते से पहले भी यह मुद्दा उठाया गया था. एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर 25 फीसदी टैरिफ लगाए हैं. इसके बावजूद यूरोप ने भारत के साथ व्यापार समझौता कर लिया.

स्कॉट बेसेंट ने यह भी कहा कि यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए अमेरिका ने यूरोप के मुकाबले ज्यादा सख्त कदम उठाए हैं. उनके मुताबिक ट्रंप प्रशासन ने रूस-यूक्रेन युद्ध में समझौते की कोशिश की और अमेरिका ने इस मामले में यूरोप से कहीं ज्यादा कुर्बानी दी है.

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