Last Updated:February 02, 2026, 21:04 IST
Niramala Sitaraman Exclusive Interview: वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने विश्व के जीडीपी में चीन और भारत के शेयर पर बात की. उन्होंने बताया कि भारत और चीन मिलकर पूरी दुनिया के जीडीपी का 43 प्रतिशत के आसपास शेयर करते हैं. उन्होंने चीन और भारत के बीच शेयरिंग गैप में करने को लेकर भी बात की. उन्होंने उन सभी पहलुओं पर सरकार की तैयारियों पर बात की.
भारत की इकोनॉमी चीन को कैसे पछाड़ेगी? नीर्मला सीतारमण ने क्या बताया?Niramala Sitaraman Exclusive Interview: निर्मला सीतारमण ने बजट पेश करने के बाद सोमवार को न्यूज18 इंडिया से बात की. उन्होंने दुनिया में भारत के बढ़ते प्रभुत्व पर बात की. उन्होंने नेटवर्क18 के ग्रुप एडिटर-इन-चीफ राहुल जोशी के सवालों के जवाब देते हुए बताया कि कैसे केवल चीन और भारत मिलकर पूरी दुनिया के 43 प्रतिशत जीडीपी में योगदान देते हैं. एक्सक्लूसिव बातचीत में सीतारमण ने बताया कि चीन और भारत के वैश्विक जीडीपी शेयर का गैप कैसे कम होगा.
दरअसल, न्यूज18 इंडिया के साथ निर्मला सीतारमण ने बजट पर बात की. उनसे सवाल पूछने के दौरान वैश्विक रिपोर्ट की बात की गई. बात एलन मस्क के उस टिप्पणी के बारे में पूछा गया जिसमें उन्होंने बजट पर कहा था कि शक्ति का संतुलन बदल रहा है. इसपर उन्होंने साफ-साफ शब्दों में समझाया कि कैसे भारत चीन को विकास में पीछे छोड़ सकता है.
प्रश्न- दरअसल, बातचीत के दौरान सवाल में पूछा गया कि वैश्विक जीडीपी वृद्धि में चीन 26% का योगदान देता है, जबकि भारत 17% का. दोनों देशों को मिला लें तो ये 43% का योगदान देते हैं. इसके विपरीत, अमेरिका का वैश्विक योगदान मात्र 9.9% है. क्या हम चीन के साथ इस अंतर पाट सकते हैं? और पाट सकते हैं तो कितनी जल्दी?
इस सवाल पर उन्होंने जवाब दिया कि यह सच है कि चीन और भारत मिलकर बहुत योगदान देते हैं. भारत को इस अंतर को पाटने के लिए बहुत मेहनत करनी होगी. कुछ क्षेत्रों को अधिक प्रोत्साहन देना होगा. उत्पादकता में वृद्धि तकनीक के उपयोग से होनी चाहिए. मानव संसाधनों का सही उपयोग होना चाहिए. हमें बहुत काम करना है. इसे जल्द ही करना होगा. जब सरकार स्थिर और आगे की सोच वाली नीतियां अपनाएगी, तो हम इसे हासिल कर सकते हैं. निर्मला ने आगे कहा कि स्थिरता बड़ा संदेश रहा है. डेटा सेंटर्स के लिए टैक्स हॉलिडे एक साहसिक सुधार है.
सवाल- इससे आप किस प्रकार की प्रतिक्रिया की उम्मीद करते हैं और क्या यह भारतीय कंपनियों जैसे टीसीएस पर भी लागू होगा?
हम ग्लोबल कंपनियों के बारे में बात कर रहे हैं जो ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) स्थापित कर रही हैं. अगर वे भारतीय मूल की हैं, तो उनकी प्रोफिट्स और अन्य चीजें भी समझी जाएंगी. जो भी इस परिभाषा में फिट बैठता है, उसे यह लाभ मिलेगा. इसलिए, टीसीएस जैसी भारतीय कंपनी भी इसमें फिट हो सकती है.
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दीप राज दीपक 2022 में न्यूज़18 से जुड़े. वर्तमान में होम पेज पर कार्यरत. राजनीति और समसामयिक मामलों, सामाजिक, विज्ञान, शोध और वायरल खबरों में रुचि. क्रिकेट और मनोरंजन जगत की खबरों में भी दिलचस्पी. बनारस हिंदू व...और पढ़ें
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New Delhi,Delhi
First Published :
February 02, 2026, 21:04 IST

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