'सम्मान नहीं, सौदेबाजी' : उदित राज ने पद्म पुरस्कारों को क्यों बताया खोखला? सरकार पर बरसे

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Last Updated:January 27, 2026, 02:54 IST

 उदित राज ने पद्म पुरस्कारों को क्यों बताया खोखला?उदित राज ने कहा कि पद्म पुरस्कारों की अब कोई हैसियत नहीं है. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली. गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर केंद्र सरकार की ओर से पद्म पुरस्कारों की घोषणा की गई. भगत सिंह कोश्यारी को पद्म भूषण मिला है. इस पर कांग्रेस नेता उदित राज ने कहा कि पद्म पुरस्कारों की अहमियत बहुत कम हो गई है. आईएएनएस से बातचीत में उन्होंने कहा कि क्या अब ये पुरस्कार उन लोगों को दिए जा रहे हैं जो संविधान विरोधी हैं और जिन्होंने एक सरकार को गिराने का काम किया है. जब बिहार में चुनाव हो रहे थे, तभी अचानक यह ख्याल आया कि किसे ‘भारत रत्न’ दिया जाना चाहिए और किसे कौन-सा अवॉर्ड दिया जाना चाहिए. इन अवॉर्ड्स की अहमियत बहुत कम हो गई है. 25 जनवरी की शाम को जब पद्म पुरस्कारों की घोषणा हो रही थी, तब भी चर्चा हो रही थी. अब इन पुरस्कारों का वह महत्व नहीं रह गया है.

उन्होंने कहा कि अब यह पुरस्कार भगत सिंह कोश्यारी को दिया गया है, जिन्होंने संविधान का उल्लंघन किया है और एक सरकार को खत्म करने का काम किया है. जो संविधान विरोधी हैं, क्या उन्हें पुरस्कार दिए जाएंगे. इसीलिए इन पुरस्कारों का महत्व बहुत कम हो गया है. मकसद सिर्फ राजनीतिक लाभ लेना है. कांग्रेस नेता उदित राज ने कहा कि पद्म पुरस्कार को लेकर कार्ति चिदंबरम ने जो कहा है, वह बिल्कुल सही है.

पूर्व कांग्रेसी नेता शकील अहमद के बयान पर कांग्रेस नेता उदित राज ने कहा कि अभी संविधान और लोकतंत्र को बचाने की चुनौती है. मैंने भाजपा छोड़ दी है. शायद हर कोई अपनी मर्जी से नहीं छोड़ता. संघ नाराज था और नहीं चाहता था कि मैं चुनाव लड़ूं. उन्होंने मुझे प्रस्ताव दिया कि मैं लोकसभा चुनाव न लड़ूं. मैंने भाजपा छोड़ दी.

पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का जिक्र करते हुए उदित राज ने कहा कि जब वे राष्ट्रपति नहीं बने थे, तो उन्हें 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान उम्मीदवार के तौर पर भी तरजीह नहीं दी गई थी. 20 मई 2014 को जब मैं सांसद बना, तो वे खुद अपना बायोडाटा लेकर मेरे पास आए और भाजपा में सिफारिश करने का अनुरोध किया. जब वे राष्ट्रपति बन सकते थे, मैं भी बहुत कुछ बन सकता था. मुझे मंत्रालय का ऑफर भी मिला था.

उन्होंने आगे कहा कि ऐसे समय में शकील अहमद को पार्टी नहीं छोड़नी चाहिए थी. भले ही मतभेद थे, लेकिन क्या सत्ता ही सब कुछ होती है? एक समय वे महासचिव थे, वरिष्ठ प्रवक्ता थे और दो मंत्रालयों के मंत्री रह चुके थे. और क्या चाहिए? मुझे लगता है कि उन्होंने ठीक नहीं किया.

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Rakesh Ranjan Kumar

राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h...और पढ़ें

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New Delhi,Delhi

First Published :

January 27, 2026, 02:54 IST

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