Last Updated:May 21, 2025, 19:38 IST
Positive Story: सुपौल जिले के एक गांव की एक सास ने बहू को शिक्षा का तोहफा देकर समाज को नई दिशा दिखाई है. यह कहानी बताती है कि जब ससुराल ‘गेंदा फूल’ बन जाए, तो बहू के सपने उड़ान भरते हैं और समाज में सकारात्मक बद...और पढ़ें

सुपौल की नीतू कुमारी का सास की पहल पर 9वीं कक्षा में नामांकन हुआ.
हाइलाइट्स
बहू को शिक्षित करने से समाज में बदलाव को नई दिशा देने वाली सास की कहानी.सुपौल जिले की नीतू कुमारी का सपना शिक्षक बनना, ससुराल में सास ने दिया मौका.ससुराल का सहयोग बहू के सपनों को साकार कर रहा है, समाज के लिए प्रेरणा बनीं.सुपौल. बिहार के सुपौल जिले के छातापुर प्रखंड के कटहरा गांव से आई यह प्रेरक कहानी सास-बहू के रिश्ते और महिलाओं की शिक्षा के महत्व को नए आयाम देती है. जहां ससुराल को अक्सर घरेलू जिम्मेदारियों का केंद्र माना जाता है. वहीं, इस ससुराल ने बहू के लिए ‘गेंदा फूल’ जैसा माहौल बनाकर उसे सपनों की उड़ान भरने का मौका दिया है. यह कहानी समाज के उस स्वरूप को उजागर करती है कि जब ससुराल ‘गेंदा फूल’ बन जाए, तो बहू के सपने उड़ान भरते हैं और समाज में सकारात्मक बदलाव की नई लहर शुरू होती है.
बहू, जिसका सपना है शिक्षक बनना-इस कहानी की नायिका नीतू कुमारी हैं. इनके पिता अरविंद सरदार और मां गुड्डी देवी छातापुर प्रखंड के गिरधरपट्टी वार्ड नंबर 10 के निवासी हैं. इनकी शादी कटहरा वार्ड नंबर 13 के निवासी महानंद सरदार के बेटे सन्नी कुमार से हुई. सन्नी कुमार वर्तमान में पूर्णिया में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं.
सास बनी प्रेरणा: बहू के लिए उठाया बड़ा कदम
नीतू कुमारी की सास, कविता देवी, जो गांव के सरकारी स्कूल में रसोइया का काम करती हैं, ने बहू को शिक्षा का तोहफा देकर पूरे समाज को एक नई दिशा दी है. शादी के बाद बहू को किचन तक सीमित रखने के बजाय इन्होंने उसे उत्क्रमित मध्य विद्यालय कटहरा में पढ़ाई के लिए भेजा. कविता देवी का कहना है, “हम गरीब हैं, लेकिन बहू को शिक्षित करना हमारा सबसे बड़ा कर्तव्य है. शिक्षा ही हमें आगे बढ़ने का रास्ता दिखाएगी.
गांव से शिक्षक बनने का सपना, ससुराल से सहयोग
नीतू कुमारी का एडमिशन नवीं क्लास में हुआ है और अब नियमित रूप से स्कूल जाती हैं. वह अपने शिक्षक बनने के सपने को पूरा करने की दिशा में काम कर रही हैं. उनकी सास का मानना है कि बहू की शिक्षा पूरे परिवार और समाज को सशक्त बनाएगी. यह ससुराल वाकई नीतू कुमारी के लिए ‘गेंदा फूल’ जैसा बन गया है. यहां उन्हें प्यार, सहयोग, और अपने सपनों को पूरा करने का मौका मिल रहा है. नीतू की सास ने यह साबित कर दिया कि ससुराल केवल जिम्मेदारियों का नहीं, बल्कि सपनों को साकार करने का भी स्थान हो सकता है.
साहस भरे फैसले से समाज को मिली प्रेरणा
नीतू और उनकी सास की यह कहानी उन तमाम परिवारों के लिए मिसाल है, जो बहुओं को केवल घरेलू कामों तक सीमित रखते हैं. यह घटना दिखाती है कि अगर परिवार बहू के सपनों का समर्थन करे, तो वह न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे समाज का भविष्य बदल सकती है.
शिक्षा और सहयोग से बदलाव की शुरुआत
कविता देवी और नीतू की इस प्रेरणादायक कहानी ने यह साबित कर दिया है कि शिक्षा और परिवार का सहयोग किसी भी बाधा को पार कर सकता है. बहू का शिक्षक बनने का सपना न केवल उनका निजी उद्देश्य है, बल्कि समाज के विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है. यह कहानी बताती है कि जब ससुराल ‘गेंदा फूल’ बन जाए, तो बहू के सपने उड़ान भरते हैं और समाज में सकारात्मक बदलाव की नई लहर शुरू होती है.
पत्रकारिता क्षेत्र में 22 वर्षों से कार्यरत. प्रिंट, इलेट्रॉनिक एवं डिजिटल मीडिया में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन. नेटवर्क 18, ईटीवी, मौर्य टीवी, फोकस टीवी, न्यूज वर्ल्ड इंडिया, हमार टीवी, ब्लूक्राफ्ट डिजिट...और पढ़ें
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