Last Updated:January 21, 2026, 11:50 IST
नए साल से लोकसभा में सांसदों के लिए अटेंडेंस नियम सख्त हो रहे हैं. अगर कोई सांसद देरी से सदन पहुंचा, तो उसकी हाजिरी नहीं लगेगी और उसका दैनिक भत्ता भी कटेगा. बजट सत्र से सांसदों को केवल अपनी तय सीट से ही इलेक्ट्रॉनिक अटेंडेंस दर्ज करनी होगी. लॉबी रजिस्टर की पुरानी व्यवस्था खत्म की जा रही है.
बजट सत्र से लोकसभा में सांसदों की अटेंडेंस का सालों पुराना नियम बदलेगा. (फाइल फोटो)नई दिल्ली: नए साल की शुरुआत के साथ ही संसद में सांसदों के लिए सख्ती बढ़ने जा रही है. अब अगर कोई सांसद देरी से लोकसभा पहुंचेगा, तो उसकी अटेंडेंस नहीं लगेगी. सिर्फ सदन में आना काफी नहीं होगा. तय समय पर पहुंचकर अपनी सीट से इलेक्ट्रॉनिक हाजिरी दर्ज करना अनिवार्य होगा. नए नियम के तहत लेट लतीफी पर सीधा असर जेब पर पड़ेगा, क्योंकि अटेंडेंस न होने पर दैनिक भत्ता और सैलरी कटना तय है. यह बदलाव संसद की कार्यसंस्कृति को अनुशासित और जिम्मेदार बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.
अब तक सांसद लॉबी में रखे रजिस्टर पर साइन करके अटेंडेंस दर्ज करा लेते थे, चाहे वे सदन की कार्यवाही में शामिल हों या नहीं. लेकिन नए साल से यह सुविधा खत्म होने जा रही है. बजट सत्र से लागू होने वाले नियम के मुताबिक सांसदों को अपनी तय सीट पर बैठकर ही हाजिरी लगानी होगी. सदन स्थगित होने के बाद अटेंडेंस का कोई मौका नहीं मिलेगा. इससे साफ संदेश है कि संसद में समय की पाबंदी और सक्रिय भागीदारी अब विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता होगी.
क्या है नया नियम?
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के मुताबिक बजट सत्र से सांसद केवल अपनी निर्धारित सीट से ही इलेक्ट्रॉनिक रूप से अटेंडेंस दर्ज कर सकेंगे. लॉबी में रखे रजिस्टर में साइन करने की व्यवस्था खत्म की जा रही है. हर सीट पर पहले से लगे इलेक्ट्रॉनिक कंसोल में अटेंडेंस मार्क करने की सुविधा मौजूद है, जिसे अब अनिवार्य किया जा रहा है. सदन स्थगित होने के बाद अटेंडेंस दर्ज करने की अनुमति भी नहीं मिलेगी. इससे ‘फॉर्मल मौजूदगी’ का खेल खत्म होगा.
संसद में अटेंडेंस और व्यवधान लंबे समय से बड़ा मुद्दा रहे हैं. (फाइल फोटो)
क्यों जरूरी था बदलाव?
संसद में अटेंडेंस और व्यवधान लंबे समय से बड़ा मुद्दा रहे हैं. पुराने सिस्टम में सांसद बिना सदन में बैठे भी भत्ता पाने के हकदार हो जाते थे. इससे जनता के बीच यह संदेश जाता था कि संसद में जिम्मेदारी की कमी है. नया सिस्टम यह सुनिश्चित करेगा कि जो सांसद अटेंडेंस दर्ज कर रहा है, वह वास्तव में सदन की कार्यवाही का हिस्सा भी है. इससे सांसदों की जवाबदेही बढ़ेगी और जनता का भरोसा मजबूत होगा.
कैसे काम करेगा स्मार्ट सिस्टम?
नया सिस्टम पूरी तरह टेक्नोलॉजी पर आधारित है. हर सांसद की सीट पर इलेक्ट्रॉनिक कंसोल पहले से मौजूद है. सांसद को अपनी सीट पर बैठकर ही अटेंडेंस दर्ज करनी होगी. लॉबी रजिस्टर की व्यवस्था पूरी तरह खत्म होगी. सदन स्थगित होने के बाद अटेंडेंस नहीं लगेगी. डेटा सीधे डिजिटल रिकॉर्ड में सेव होगा.भत्ते और जवाबदेही का कनेक्शन
हर सांसद को सत्र में मौजूद रहने पर दैनिक भत्ता मिलता है, लेकिन शर्त यह है कि अटेंडेंस दर्ज हो. पुराने सिस्टम में इस पर सवाल उठते रहे हैं. नए नियम के बाद यह साफ हो जाएगा कि भत्ता उसी सांसद को मिलेगा जो वाकई सदन में बैठकर काम कर रहा है. इससे वित्तीय पारदर्शिता भी बढ़ेगी और संसद के प्रति जनता का विश्वास भी.
क्या राज्यसभा में भी होगा लागू?
अभी यह नियम केवल लोकसभा के लिए घोषित किया गया है. राज्यसभा में इसे लागू करने पर अंतिम फैसला बाकी है. दोनों सदनों की कार्यप्रणाली अलग होने के कारण अलग समीक्षा होगी. भविष्य में राज्यसभा में भी इसी तरह का सिस्टम लागू हो सकता है.सदन चलाने पर भी सख्त संदेश
बजट सत्र से पहले ओम बिरला ने सांसदों को यह भी याद दिलाया कि विरोध का मतलब सिर्फ नारेबाजी और पोस्टर दिखाना नहीं होता. राष्ट्रपति के अभिभाषण पर होने वाली चर्चा और विधेयकों पर बहस के दौरान मुद्दे उठाने के पर्याप्त मौके होते हैं. आंकड़ों के मुताबिक 2025 के शीतकालीन सत्र में लोकसभा और राज्यसभा की प्रोडक्टिविटी 100 फीसदी से ज्यादा रही, जो यह दिखाता है कि व्यवस्थित तरीके से सदन चल सकता है.
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सुमित कुमार News18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 3 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. News18 हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह...और पढ़ें
First Published :
January 21, 2026, 11:17 IST

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