सुप्रीम कोर्ट में आई ऐसी याचिका, देखते ही भड़क गए CJI सूर्यकांत, विष्णु शंकर जैन को लगाई फटकार

1 hour ago

Last Updated:January 27, 2026, 14:15 IST

Supreme Court on Mahakal Ujjain Mandir News: महाकाल मंदिर में प्रवेश को लेकर सुप्रीम कोर्ट में वकील विष्णु शंकर जैन ने सीजेआई के समक्ष मुद्दा उठाया. वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि गर्भ गृह में प्रवेश की एक एकीकृत नीति होनी चाहिए. इस याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने सुनने से इनकार कर दिया और याचिका खारिज कर दी.

सुप्रीम कोर्ट में आई ऐसी याचिका, देखते ही भड़क गए CJI, विष्णु जैन को फटकारमहाकाल मंदिर में प्रवेश को लेकर सुप्रीम कोर्ट में वकील विष्णु शंकर जैन ने सीजेआई के समक्ष मुद्दा उठाया. (फाइल फोटो)

उज्जैन के फेमस महाकाल मंदिर में वीवीआईपी व्यवस्था के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट आज यानी मंगलवार को सुनवाई हुई. सीनियर वकील विष्णु शंकर जैन ने चीफ जस्टिस सीजेआई सूर्यकांत की बेंच के समक्ष दलील दी कि मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश के लिए एक समान और एकीकृत नीति होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि VVIP या विशेष दर्जे के आधार पर किसी को प्रवेश मिलना और आम भक्तों को रोकना स्पष्ट भेदभाव है. विष्णु शंकर जैन ने जोर दिया कि धार्मिक स्थलों में भेदभाव नहीं होना चाहिए, सभी भक्तों को समान अवसर मिलना चाहिए. इस पर सीजेआई ने कहा कि यह तय करना कोर्ट का काम नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में वीआईपी दर्शन कल्चर को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया.

याचिकाकर्ता के वकील विष्णु शंकर जैन को फटकार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘ऐसी याचिकाएं दाखिल नहीं की जानी चाहिए. श्रद्धालु इस तरह की याचिकाएं दायर नहीं करते. हम इस पर और कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते.’ अदालत ने स्पष्ट किया कि मंदिरों के संचालन और व्यवस्थाओं को विनियमित करना न्यायालय का काम नहीं है, बल्कि मंदिर का संचालन करने वालों को ही यह तय करने दिया जाना चाहिए.’

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में कर्नाटक के अंजनेय मंदिर से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान सामने आई. विष्णु शंकर जैन इस मामले में विद्यादास बाबा का पक्ष रख रहे थे. उन्होंने अदालत को बताया कि महाकाल मंदिर में वीवीआईपी सिस्टम के कारण आम श्रद्धालुओं को लंबी कतारों में इंतजार करना पड़ता है, जबकि प्रभावशाली लोग बिना इंतजार के दर्शन कर लेते हैं. जैन ने कहा, ‘यह व्यवस्था संविधान की समानता की भावना के खिलाफ है.  गर्भगृह में प्रवेश की नीति पारदर्शी और एक समान होनी चाहिए, न कि किसी विशेष वर्ग के लिए अलग.’

सीजेआई सूर्यकांत ने इस पर साफ जवाब दिया कि यह मुद्दा तय करना अदालत का काम नहीं है. सीजेआई ने कहा, ‘हम धार्मिक स्थलों की आंतरिक व्यवस्था में हस्तक्षेप नहीं कर सकते. यह सक्षम प्राधिकार (जैसे मंदिर ट्रस्ट या राज्य सरकार) का विषय है. आप उचित प्राधिकारी के समक्ष अपनी शिकायत दर्ज कराएं.’ सीजेआई ने आगे कहा कि मंदिर प्रबंधन की नीतियां स्थानीय कानूनों और परंपराओं पर आधारित होती हैं, जिनमें न्यायालय सीधे दखल नहीं दे सकता.

सुनवाई के दौरान विष्णु शंकर जैन ने अपने मुवक्किल विद्यादास बाबा के अधिकारों पर भी जोर दिया. उन्होंने दलील दी कि उनके मुवक्किल का अर्चक (पुजारी) के तौर पर अधिकार नहीं छीना जाना चाहिए. हालांकि, सीजेआई ने मामले को हाईकोर्ट में लंबित बताते हुए कहा कि हाईकोर्ट पहले से इस पर गौर कर रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट जाने की सलाह दी और कहा कि उच्च न्यायालय ही इस मामले में उचित फैसला सुना सकता है.

दरअसल, उज्जैन के महाकाल मंदिर जैसे प्रमुख तीर्थस्थलों में लाखों श्रद्धालु रोज दर्शन के लिए आते हैं, लेकिन VVIP व्यवस्था से आम लोगों में असंतोष बढ़ रहा है. कई संगठन और भक्त पहले भी इस व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठा चुके हैं. अब देखना है कि क्या राज्य सरकार या मंदिर ट्रस्ट इस मुद्दे पर कोई कदम उठाते हैं.

About the Author

Shankar Pandit

Shankar Pandit has more than 10 years of experience in journalism. Before News18 (Network18 Group), he had worked with Hindustan times (Live Hindustan), NDTV, India News Aand Scoop Whoop. Currently he handle ho...और पढ़ें

First Published :

January 27, 2026, 12:34 IST

homenation

सुप्रीम कोर्ट में आई ऐसी याचिका, देखते ही भड़क गए CJI, विष्णु जैन को फटकार

Read Full Article at Source