सैय्यद नसीरुद्दीन चिश्ती कौन हैं, जो NSA अजीत डोभाल से मिले?

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Last Updated:January 11, 2026, 19:54 IST

Who is Syed Nasiruddin Chishti: अजमेर शरीफ दरगाह के गद्दी-नशीं हजरत सैय्यद नसीरुद्दीन चिश्ती ने NSA अजीत डोभाल से मुलाकात की. यह मुलाकात जो चर्चा में है. सूफी सज्जादानशीन काउंसिल के नेतृत्व में हुई इस बैठक में राष्ट्रीय एकता, शांति और कट्टरता के खिलाफ 'मेरा मुल्क, मेरी पहचान' अभियान की घोषणा की गई. अब लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि आखिर ये सैय्यद नसीरुद्दीन चिश्ती हैं कौन. तो आइए हम इस खबर में बताते हैं सैय्यद नसीरुद्दीन चिश्ती के बारे में.

सैय्यद नसीरुद्दीन चिश्ती कौन हैं, जो NSA अजीत डोभाल से मिले?NSA अजीत डोभाल से मिले अजमेर शरीफ दरगाह के गद्दी-नशीं सैय्यद नसीरुद्दीन चिश्ती. (फोटो News18)

Who is Syed Nasiruddin Chishti: 11 जनवरी 2026 को देश की राजधानी दिल्ली में एक मुलाकात हुई. यह मुलाकात अजमेर शरीफ दरगाह के गद्दी-नशीं हजरत सैय्यद नसीरुद्दीन चिश्ती और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल की थी. अब यह मुलाकात सुर्खियों में हैं. दिल्ली के इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर में हुई इस मुलाकात ने देश के सियासी और सामाजिक हलकों में खास चर्चा बटोरी. अखिल भारतीय सूफी सज्जादानशीन काउंसिल का एक प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से मिला. इस प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई कर रहे थे हजरत सैय्यद नसीरुद्दीन चिश्ती. यह ऐसा नाम है जिसकी जड़ें भारत की सदियों पुरानी सूफी परंपरा से जुड़ी हैं.

यह मुलाकात सिर्फ एक औपचारिक बैठक नहीं थी, बल्कि उस सोच का प्रतीक थी जिसमें आध्यात्मिक नेतृत्व और राष्ट्रीय एकता का संवाद एक मंच पर दिखाई दिया. NSA अजीत डोभाल जैसे शीर्ष सुरक्षा अधिकारी से सूफी नेतृत्व की सीधी बातचीत और उसमें कट्टरता के खिलाफ साझा चिंता ने इस बैठक को खास बना दिया.

हजरत सैय्यद नसीरुद्दीन चिश्ती कौन हैं?

हजरत सैय्यद नसीरुद्दीन चिश्ती अजमेर शरीफ दरगाह के गद्दी-नशीं और ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती (गरीब नवाज) की 38वीं पीढ़ी के उत्तराधिकारी हैं. अजमेर शरीफ न सिर्फ भारत, बल्कि पूरी दुनिया में सूफी परंपरा का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है. यहां हर मजहब और वर्ग के लोग आस्था लेकर पहुंचते हैं. नसीरुद्दीन चिश्ती ने अपने सार्वजनिक बयानों और गतिविधियों के जरिए बार-बार यह संदेश दिया है कि सूफीमत का मूल विचार प्रेम, सहिष्णुता और इंसानियत है. वे आधुनिक भारत में सूफी परंपरा को सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक एकता की ताकत के रूप में पेश करते रहे हैं.

चिश्ती सिलसिला और उसका प्रभाव

चिश्ती सिलसिला भारत का सबसे पुराना और प्रभावशाली सूफी संप्रदाय है, जिसकी शुरुआत 12वीं शताब्दी में हुई थी. इस परंपरा ने सदियों से मजहबी कट्टरता के खिलाफ आवाज उठाई. इन्होंने प्रेम और सेवा को इबादत का रूप दिया और गंगा-जमुनी तहजीब को मजबूत किया. हजरत नसीरुद्दीन चिश्ती इसी परंपरा के वर्तमान प्रतिनिधि हैं, जिनकी बातों का असर लाखों अनुयायियों पर पड़ता है.

अखिल भारतीय सूफी सज्जादानशीन काउंसिल क्या है?

यह काउंसिल देश भर की प्रमुख सूफी दरगाहों के सज्जादानशीनों का साझा मंच है. इसमें अजमेर शरीफ, निजामुद्दीन औलिया, फतेहपुर सीकरी, अलीगढ़ और अन्य बड़े सूफी केंद्रों के प्रतिनिधि शामिल हैं. काउंसिल का उद्देश्य है धार्मिक सौहार्द को बढ़ावा देना, समाज में शांति और भाईचारे का संदेश फैलाना साथ ही सूफी परंपरा को समकालीन संदर्भ में मजबूत करना.

NSA अजीत डोभाल से मुलाकात में क्या हुआ?

मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने NSA को सूफीमत की ऐतिहासिक भूमिका से अवगत कराया. उन्होंने बताया कि कैसे सूफी परंपरा ने भारत में सदियों तक सामाजिक संतुलन बनाए रखा और विभाजनकारी विचारों का शांतिपूर्ण तरीके से मुकाबला किया. डोभाल ने इस संवाद की सराहना की और माना कि सूफीमत जैसे विचार भारत की राष्ट्रीय चेतना को मजबूती देते हैं.

‘मेरा मुल्क, मेरी पहचान’ अभियान क्या है?

इसी मुलाकात के दौरान हजरत सैय्यद नसीरुद्दीन चिश्ती ने एक बड़े राष्ट्रव्यापी अभियान की घोषणा की ‘मेरा मुल्क, मेरी पहचान’. इस अभियान के तहत, देशभर में जनसंवाद और सभाएं होंगी. कट्टरता और नफरत के खिलाफ सूफी संदेश फैलाया जाएगा. संविधान, एकता और भाईचारे की बात आम लोगों तक पहुंचेगी. यह अभियान सूफी मूल्यों को आज के सामाजिक और राजनीतिक संदर्भ से जोड़ने की कोशिश है.

इस मुलाकात का व्यापक महत्व

सूफी नेतृत्व और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के बीच यह संवाद बताता है कि भारत में राष्ट्रीय एकता केवल राजनीतिक या प्रशासनिक मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जिम्मेदारी भी है. ऐसे समय में जब कट्टरता और ध्रुवीकरण की चुनौतियां बढ़ रही हैं, सूफी परंपरा का शांत और समावेशी दृष्टिकोण एक मजबूत विकल्प के रूप में सामने आता है. हजरत सैय्यद नसीरुद्दीन चिश्ती का NSA अजीत डोभाल से मिलना सिर्फ एक बैठक नहीं, बल्कि उस सोच का संकेत है जहां आध्यात्मिक विरासत और राष्ट्रीय जिम्मेदारी साथ चलती हैं. ‘मेरा मुल्क, मेरी पहचान’ जैसे अभियान से सूफीमत की भूमिका आने वाले समय में और अधिक अहम हो सकती है.

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Sumit Kumar

सुमित कुमार News18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 3 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. News18 हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह...और पढ़ें

First Published :

January 11, 2026, 19:51 IST

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