Last Updated:February 08, 2026, 15:23 IST
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने स्पष्ट संदेश दिया कि यदि बांग्लादेश के सवा करोड़ हिंदू अपनी सुरक्षा और अधिकारों के लिए डटकर खड़े होने का फैसला करते हैं, तो उन्हें पूरी दुनिया के हिंदुओं का साथ मिलेगा. पड़ोसी देश में तख्तापलट के बाद बढ़ी हिंसा और कट्टरपंथ के बीच, भागवत का यह बयान न केवल वहां के अल्पसंख्यकों को सुरक्षा का भरोसा देता है, बल्कि भारत की अखंडता और अवैध घुसपैठ जैसे गंभीर मुद्दों पर सरकार के कड़े रुख का समर्थन भी करता है.

मुंबई. आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने बांग्लादेश में हो रही हिंसा और वहां के हिंदुओं की स्थिति पर बेहद कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है. भागवत ने कहा कि अगर बांग्लादेश के हिंदू अपने अधिकारों के लिए खड़े होने और लड़ने का फैसला करते हैं, तो उन्हें पूरी दुनिया के हिंदुओं का साथ मिलेगा. संघ प्रमुख ने सीधा संदेश देते हुए कहा, बांग्लादेश में लगभग 1.25 करोड़ हिंदू हैं. अगर वे वहां रुकने और अपनी रक्षा के लिए लड़ने का फैसला करते हैं, तो दुनिया भर के सभी हिंदू उनकी मदद करेंगे.
पिछले कुछ महीनों में बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से हिंदुओं के खिलाफ हिंसक भीड़ के हमलों में भारी वृद्धि देखी गई है. यह तनाव तब और बढ़ गया जब 5 अगस्त 2024 को छात्र नेतृत्व वाले ‘जुलाई विद्रोह’ के बाद प्रधानमंत्री शेख हसीना को देश छोड़ना पड़ा. हाल के महीनों में भारत विरोधी कट्टरपंथी छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद हिंसा और भड़की. हिंसक भीड़ ने देश के विभिन्न हिस्सों में हिंदू नागरिकों, व्यापारियों और छात्रों को निशाना बनाया है, जिसमें कई लोगों की जान गई है.
भारत के आंतरिक मुद्दों पर भागवत के प्रहार
अब भारत को कोई तोड़ नहीं सकताघरेलू मुद्दों पर चर्चा करते हुए संघ प्रमुख ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों ने देश के बदलते जनसंख्या पैटर्न पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया. उन्होंने इसके पीछे जन्म दर और अवैध घुसपैठ को प्रमुख कारण बताया. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, अब भारत को तोड़ा नहीं जा सकता. जो भारत को तोड़ने की कोशिश करेंगे, वे खुद टूट जाएंगे. उन्होंने लोगों से ‘अवैध घुसपैठियों’ को पहचानने और पुलिस को रिपोर्ट करने की भी अपील की. संघ के नेता होटलों नहीं घरों में रुकते हैं
RSS की फंडिंग और सादगी संघ के फंड्स को लेकर उठने वाली जिज्ञासाओं पर विराम लगाते हुए भागवत ने कहा कि RSS किसी कॉर्पोरेट या संस्थागत पैसे पर निर्भर नहीं है. हम अपने स्वयंसेवकों से धन जुटाते हैं. यात्रा के दौरान हम खाना खरीदने के बजाय अपना टिफिन साथ रखते हैं और होटलों के बजाय कार्यकर्ताओं के घरों में रुकते हैं. ‘ब्राह्मण होना कोई योग्यता नहीं’
जातिगत भेदभाव पर कड़ा प्रहार करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि RSS में कोई भी व्यक्ति, चाहे वह किसी भी जाति का हो, प्रमुख बन सकता है. SC-ST होना कोई अयोग्यता नहीं है और ब्राह्मण होना कोई योग्यता नहीं है. हम सभी जातियों के लिए काम करते हैं. उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि भेदभाव मिटाना है, तो पहले मन से जाति के विचार को निकालना होगा.
मुस्लिम इलाकों में काम और ‘शांति’ का मंत्र
मुस्लिम बहुल इलाकों में आने वाली चुनौतियों पर भागवत ने कहा कि संघ टकराव से बचता है. उन्होंने कहा कि वहां के मुद्दों को अक्सर प्रतिक्रिया न देकर सुलझाया जाता है. वे अपशब्दों का प्रयोग कर सकते हैं, लेकिन हम जवाब नहीं देते. इस तरह संघर्ष नहीं बढ़ता. संघ के 100 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित इस कार्यक्रम में मोहन भागवत ने न केवल बांग्लादेश के हिंदुओं को सुरक्षा का भरोसा दिलाया, बल्कि भारत के भविष्य के लिए सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया.
About the Author
Mr. Gyanendra Kumar Mishra is associated with hindi.news18.com. working on home page. He has 20 yrs of rich experience in journalism. He Started his career with Amar Ujala then worked for 'Hindustan Times Group...और पढ़ें
Location :
Mumbai,Maharashtra
First Published :
February 08, 2026, 15:23 IST

2 hours ago
