10,000–100,000 डॉलर लो, अमेरिका के साथ रहो! ट्रंप ग्रीनलैंड के हर आदमी को 'खरीद' कर द्वीप हथियाने पर तुले, डेनमार्क-नाटो में हाहाकार

16 hours ago

ट्रंप सरकार ने एक बार फिर ग्रीनलैंड पर अपनी नजरें टिका ली हैं. इस बार का तरीका ऐसा है जो दुनिया में बहुत सुनने को मिलता है. यानी एक देश के हर आदमी को बिना मारे-पीटे, दबाव बनाए पैसों से ही खरीद लो. जब पूरे देश की आबादी बिक जाएगी फिर आपका उसपर कब्जा एक तरह का हो ही जाएगा. कुछ इसी तरह का प्लान अब ट्रंप ने बनाया है. अमेरिका ग्रीनलैंड के लोगों को सीधे नकद देकर उन्हें डेनमार्क से अलग होने और अमेरिका के करीब आने के लिए राजी करना चाहता है. जबसे यह खबर सामने आई है हाहाकार मचा है. 

ट्रंप का कैश प्लान क्या है?
रॉयटर्स के सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी अधिकारी ग्रीनलैंड के निवासियों को एकमुश्त 10 हजार से 1 लाख डॉलर (करीब 8 लाख से 80 लाख रुपये) तक देने की सोच रहे हैं.ग्रीनलैंड की आबादी करीब 57 हजार है, तो कुल रकम 6 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है. ट्रंप का कहना है कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है.उन्होंने कहा, "हमें ग्रीनलैंड चाहिए, क्योंकि डेनमार्क इसे संभाल नहीं पा रहा."  द्वीप पर दुर्लभ मिनरल्स और प्राकृतिक संसाधन हैं, जो रूस-चीन से मुकाबले में काम आएंगे. यह आईडिया नया नहीं है, लेकिन हाल में ज्यादा सीरियस हो गया है.  विकल्पों में 'कॉम्पैक्ट ऑफ फ्री एसोसिएशन' जैसा समझौता भी है, जहां अमेरिका पैसा और सुरक्षा देता है, बदले में सैन्य पहुंच मिलती है.लेकिन पहले ग्रीनलैंड को डेनमार्क से आजाद होना होगा. पैसों से लोगों का समर्थन जीतना इसी रणनीति का हिस्सा है.

ग्रीनलैंड और डेनमार्क का क्या रिएक्शन?
ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नीलसन ने सख्त लहजे में कहा, "कब्जे की कल्पनाएं बंद करो."  डेनमार्क और ग्रीनलैंड दोनों ने बार-बार दोहराया है कि द्वीप बिकाऊ नहीं है.  सर्वे बताते हैं कि ग्रीनलैंडर्स आजादी तो चाहते हैं, लेकिन अमेरिका का हिस्सा बनना नहीं चाहते हैं. यूरोपीय लीडर्स में हड़कंप मच गया है.फ्रांस, जर्मनी, इटली, पोलैंड, स्पेन, ब्रिटेन और डेनमार्क ने संयुक्त बयान में कहा, "ग्रीनलैंड का फैसला सिर्फ हमारा है, अमेरिका हस्तक्षेप न करे."  फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने चेतावनी दी कि वे चुप नहीं बैठेंगे.  अमेरिका और डेनमार्क नाटो के सदस्य हैं, तो कोई जबरदस्ती से गठबंधन टूट सकता है.

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अमेरिका की जिद क्यों?
ट्रंप लंबे समय से ग्रीनलैंड को राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बता रहे हैं. हाल में वेनेजुएला के नेता निकोलस मादुरो को पकड़ने का सफल ऑपरेशन उन्हें हौसला दे रहा है.  व्हाइट हाउस प्रेस सेक्रेटरी कैरोलाइन लेविट ने पुष्टि की कि टीम 'खरीद' की संभावनाएं तलाश रही है. विदेश मंत्री मार्को रुबियो डेनमार्क के अधिकारी से मिलेंगे.डेमोक्रेट्स इसे युद्ध की साजिश बता रहे हैं.कांग्रेस की मंजूरी बिना प्लान कितना आगे जाएगा, यह सवाल है.लेकिन ट्रंप की यह चाल दुनिया की राजनीति में बड़ा उलटफेर ला सकती है.अगर सफल हुई, तो पैसों से देश 'खरीदने' की नई मिसाल बनेगी.फिलहाल, नाटो और यूरोप में तनाव बढ़ रहा है.

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