1000 साल पहले गजनवी ने सोमनाथ मंदिर पर किया था हमला, PM मोदी ने लिखा खास लेख

4 weeks ago

Last Updated:January 05, 2026, 07:38 IST

1000 Years of Somnath Temple Attack: महमूद गजनवी ने जनवरी 1026 में सोमवार मंदिर पर पहली बार हमला किया था. पीएम मोदी ने इस घटना के 1000 साल पूरे होने पर खास लेख लिखा है. इसमें उन्होंने इसे केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारत की सभ्यता, संस्कृति और अटूट आस्था का प्रतीक बताया.

1000 साल पहले गजनवी ने सोमनाथ मंदिर पर किया था हमला, PM मोदी ने लिखा खास लेखप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ मंदिर को भारत की आत्मा का उद्घोष बताया.

सोमनाथ मंदिर पर पहला हमला हुए एक हजार साल पूरे होने के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक भावनात्मक लेख लिखा है. प्रधानमंत्री मोदी ने अपने लेख में सोमनाथ को भारत की आत्मा का उद्घोष बताया और कहा कि ‘सोमनाथ’ शब्द सुनते ही दिल और दिमाग गर्व से भर जाता है. उन्होंने इसे केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारत की सभ्यता, संस्कृति और अटूट आस्था का प्रतीक बताया.

श्री सोमनाथ ट्रस्ट के चेयरमैन प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा कि गुजरात के प्रभास पाटन में स्थित सोमनाथ मंदिर भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में पहला है और द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र की पहली पंक्ति ही इसकी महानता को दर्शाती है- ‘सौराष्ट्रे सोमनाथं च’. उन्होंने धार्मिक श्लोकों का उल्लेख करते हुए कहा कि सोमनाथ शिवलिंग के दर्शन मात्र से व्यक्ति पापों से मुक्त होता है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. वर्ष 1026 में विदेशी आक्रांता महमूद गजनवी ने इस पवित्र स्थल पर हमला कर इसे नष्ट करने का प्रयास किया. प्रधानमंत्री ने उस हमले को बर्बरता और विनाश का प्रतीक बताया, जिसने केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि पूरे समाज के मनोबल को चोट पहुंचाई.

पुनर्निर्माण और साहस की कहानी है सोमनाथ

प्रधानमंत्री ने लिखा कि एक हजार साल पहले हुए उस हमले के बाद भी सोमनाथ की कहानी विनाश की नहीं, बल्कि पुनर्निर्माण और साहस की है. बार-बार हमलों के बावजूद हर पीढ़ी ने इस मंदिर को फिर से खड़ा किया. उन्होंने कहा कि यह भारत माता के करोड़ों संतानों की अटूट इच्छाशक्ति और आस्था का प्रमाण है. उन्होंने अहिल्याबाई होल्कर, स्वामी विवेकानंद और अन्य महापुरुषों के योगदान का स्मरण किया, जिन्होंने अलग-अलग कालखंडों में सोमनाथ को पुनर्जीवित करने में भूमिका निभाई.

प्रधानमंत्री मोदी ने आजादी के बाद सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की ऐतिहासिक भूमिका को भी रेखांकित किया. उन्होंने लिखा कि 1947 में सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ जाकर इसके पुनर्निर्माण का संकल्प लिया था और 11 मई 1951 को यह मंदिर फिर से भक्तों के लिए खोला गया. उस समारोह में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की मौजूदगी का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि उस समय भी जवाहरलाल नेहरू को इस पर आपत्ति थी, लेकिन इतिहास ने सिद्ध कर दिया कि यह निर्णय सही था. उन्होंने केएम मुंशी के योगदान को भी याद किया, जिन्होंने सरदार पटेल के साथ मिलकर इस कार्य को आगे बढ़ाया.

भारतीय सभ्यता का प्रतीक सोमनाथ मंदिर

लेख में प्रधानमंत्री ने सोमनाथ को भारत की उस सभ्यता का प्रतीक बताया जो बार-बार टूटकर भी और अधिक मजबूती से खड़ी हुई. उन्होंने भगवद्गीता के श्लोक ‘नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि’ का जिक्र करते हुए कहा कि जो शाश्वत है, उसे नष्ट नहीं किया जा सकता. उन्होंने लिखा कि जैसे सोमनाथ सदियों की आक्रांताओं की हिंसा के बाद भी आज गर्व से खड़ा है, वैसे ही भारत ने भी आक्रमणों और औपनिवेशिक शोषण के बाद खुद को फिर से विश्व पटल पर स्थापित किया है.

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने लेख में समकालीन भारत की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि आज दुनिया भारत को आशा और विश्वास की नजर से देख रही है. भारतीय युवाओं में निवेश हो रहा है, योग और आयुर्वेद वैश्विक पहचान बना चुके हैं और भारत वैश्विक समस्याओं के समाधान में अहम भूमिका निभा रहा है. उन्होंने कहा कि सोमनाथ सदियों से विभिन्न पंथों और विचारों के लोगों को जोड़ता रहा है और आज भी आत्मिक जागरण का केंद्र बना हुआ है.

लेख के अंत में प्रधानमंत्री ने कहा कि एक हजार साल पहले हुए हमले के बावजूद सोमनाथ की लहरें आज भी उसी ताकत से उठती हैं और यह संदेश देती हैं कि नफरत और कट्टरता भले ही क्षणिक विनाश कर सकती है, लेकिन आस्था और सद्भावना सदा के लिए सृजन करती हैं. उन्होंने विश्वास जताया कि सोमनाथ की तरह ही भारत भी अपनी प्राचीन गौरवशाली स्थिति को फिर से प्राप्त करेगा और ‘विकसित भारत’ के संकल्प के साथ आगे बढ़ेगा. लेख का समापन उन्होंने ‘जय सोमनाथ’ के उद्घोष के साथ किया.

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Saad Omar

An accomplished digital Journalist with more than 13 years of experience in Journalism. Done Post Graduate in Journalism from Indian Institute of Mass Comunication, Delhi. After Working with PTI, NDTV and Aaj T...और पढ़ें

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New Delhi,Delhi

First Published :

January 05, 2026, 07:38 IST

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