14 लाख के बराबर एक! अमेरिका का डॉलर 40 साल बाद कैसे लाया ईरान में भूचाल? अब खामेनेई की खैर नहीं

2 hours ago

Iran currency crash: ईरान की करेंसी रियाल के गिरने से वहां की सरकार के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है. खामेनेई की सुप्रीम लीडरशिप में रियाल की हालत दम तोड़ने के कगार पर पहुंच गई है. वेंटिलेटर पर चल रही रियाल की हालत इतनी खस्ता है कि एक डॉलर का नोट कहीं रखा हो तो उसकी बराबरी करने के लिए 14 लाख रियाल रखने पड़ेंगे. लगभग आधी सदी बीतने के बाद ये पहला मौका है जब ईरान की जनता खामनेई और उनके चट्टे-बट्टों को बद्दुआ देने के साथ खुलकर राजशाही का दौर लौटने की दुआ कर रहे हैं.

नहीं चाहिए इस्लामी क्रांति: प्रदर्शनकारी

खामनेई की सुप्रीमेसी और ईरान की सरकार के खिलाफ प्रदर्शन का आज 15वां दिन है. मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के मुताबिक 600 मौतों और हजारों लोगों को हिरासत में लिए जाने के बावजूद प्रदर्शनकारियों का हौसला बुलंद बना हुआ है. बिना किसी लागपेट या डर के वो खामनेई सरकार की पुलिस-प्रशासन से लोहा ले रहे हैं. वो उनकी आंखों में आंख डालकर पुरानी राजशाही का दौर मांग रहे हैं.

डॉलर ने उड़ा दी खामेनेई की नींद

ईरान के सत्ता विरोधी प्रदर्शनों में 'खामेनेई की खैर नहीं' जैसे नारे लग रहे हैं. दशकों बाद पहली बार, प्रदर्शनकारी खुलेआम राजशाही के समर्थन में नारे लगा रहे हैं. 'शाह जिंदाबाद' और 'पहलवी राजवंश की वापसी हो' की गूंज पूरे ईरान में सुनाई दे रही है. ये नारेबाजी साल 1979 की इस्लामी क्रांति की विरासत को सीधे तौर पर खारिज करती है.

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रियाल बनाम डॉलर

15 दिन पहले ईरान की अर्थव्यवस्था ऐसी वित्तीय खाई के दलदल में औंधे मुंह गिर गई, जब एक अमेरिकी डॉलर के सामने उसकी पहचान मिट्टी में मिल गई. ईरान की करेंसी रियाल की अनौपचारिक विनिमय दर यानी एक्सचेंज रेट अप्रत्याशित रूप से 1.4 मिलियन रियाल पहुंच गया. ईरानी मुद्रा की इस चौंकाने वाली गिरावट ने 2018 का वो रिकॉर्ड तोड़ दिया जब ईरान की जनता महंगाई और कर्ज से तंग आकर बगावत की चिंगारी दिल में दबाकर सड़कों पर उतरी थी.   

बचत की जमांपूजी खर्च हो गई: प्रदर्शनकारी

ईरान के आम नागरिकों का कहना है कि इस सरकार ने उनकी जमापूंजी खत्म कर दी. उनकी हालत ऐसी हो गई कि विदेश में बना सामान खरीदना उनकी पहुंच से बाहर हो गया. 2025 में ईरान की करेंसी में आ रही गिरावट सिर्फ सामान्य उतार-चढ़ाव नहीं, बल्कि इस बात का सीधा संकेत थी कि पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों और जून 2025 में इजरायल के साथ 12 दिन चले सैन्य संघर्ष ने ईरान का खजाना खाली कर दिया. विदेशी मुद्रा भंडार खत्म हो गया.

सब्सिडी के लिए पैसा नहीं

28 दिसंबर 2025 को तेहरान का ऐतिहासिक ग्रैंड बाजार यानी सबसे बड़ा इकॉनमिक हब था बंद हो गया. अपने आप में एक असंभव सा लगने वाला फैसला लेते हुए ईरानी कारोबारियों ने हड़ताल शुरू कर दी. दुकानों और प्रतिष्ठान बंद करते हुए कारोबारियों ने बता दिया कि उन्होंने मजहब के नाम पर सत्ता चला रहे लोगों से समर्थन वापस ले लिया है.

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