Scientists predict: दुनिया के बहुत से शहर समय के साथ-साथ धीरे-धीरे पानी में डूबते जा रहे हैं, जिसकी वजह से सड़कें नदियों में तब्दील होती जा रही हैं. इस वजह से अब वो दूर नहीं जब यहां पर लोग बाढ़ के पानी में चलेंगे. क्योंकि दुनिया भर में कई शहर निचले इलाकों में बसे हैं और वो बढ़ते समुद्र स्तर और धंसती जमीन की दोहरी मार झेल रहे हैं. इस हालात को भूजल का दोहन और गर्म होते महासागर के अलावा अस्थिर जमीन और भी बदतर बना रही है. विश्व आर्थिक मंच की रिपोर्ट के अनुसार विशेषज्ञों का मानना है कि सन 2100 तक इनमें से कुछ शहर पानी में डूब सकते हैं.
इस चेतावनी की लिस्ट में सबसे जकार्ता शहर शामिल है जो हर साल लगभग छह इंच धंस रहा है. कथित तौर पर इसे दुनिया का सबसे तेज गति से धंसने वाला शहर माना जाता है. यहां पर जमीनी पानी के अत्यधिक दोहन के कारण मिट्टी अस्थिर हो गई है. ज्वार के दौरान यहां की सड़कों पर पानी खड़ा हो जाता है. इन हालातों के बीच इंडोनेशिया सरकार अगले कुछ वर्षों में राजधानी को बोर्नियो में स्थानांतरित करने की योजना बना रही है.
लागोस शहर
इस लिस्ट में अगला नंबर नाइजीरिया के लागोस शहर का है, जहां निचले तटीय इलाकों में क्षरण के कारण गंभीर खतरे पैदा हो रहे हैं. क्योंकि जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्र का स्तर लगातार बढ़ने से बाढ़ की घटनाएं और भी ज्यादा बढ़ गई हैं. एक्सपर्ट का मानना है कि अगर समुद्र के स्तर में थोड़ी सी भी बढ़ोतरी होती है तो वो अफ्रीका के इस सबसे बड़े शहर के जनजीवन, व्यापार और परिवहन व्यवस्था को बाधित कर सकती है.
ह्यूस्टन शहर
वहीं भूमिगत जल की निकासी के कारण ह्यूस्टन शहर हर साल लगभग दो इंच धंस रहा है. यहां पर तूफानों के दौरान बाढ़ की स्थिति और भी खराब हो जाती है. 2017 के दौरान हरिकेन हार्वे ने हजारों घरों को बुरी तरह से क्षतिग्रस्त कर दिया, जिसके चलते लगभग 30000 लोगों को यहां से विस्थापित करना पड़ा था. जमीन के लगातार धंसने के कारण ह्यूस्टन को बार-बार आपदाओं का सामना करना पड़ रहा है.
ढ़ाका शहर
वहीं बांग्लादेश की राजधानी ढाका में बेसक प्रदूषण का स्तर न के बराबर है, लेकि फिर भी समुद्र का बढ़ता स्तर शहर के लिए खतरा बना हुआ है. एक्सपर्ट का मानना है कि 2050 तक बांग्लादेश का लगभग 17 प्रतिशत हिस्सा बाढ़ की चपेट में आ सकता है, जिसके चलते यहां रह रहे लाखों लोगों को अपना घर छोड़कर पलायन करना पड़ सकता है. यहां पर भारी बारिश के दौरान अक्सर सड़कों और बाजारों में पानी भरा नजर आता है. बारिश के कारण स्थानीय लोगों के घरों में भी पानी घुस जाता है.
वेनिस शहर
वेनिस शहर धीरे-धीरे डूबने की ओर बढ़ रहा है, जिसक गति लगभग 0.08 इंच प्रति वर्ष है. 2018 के दौरान यहां पर आई बाढ़ पिछले दस वर्षों में सबसे भीषण थी. जिसकी वजह से पानी सेंट मार्क स्क्वायर से लेकर दुकानों और सड़कों तक फैल गया था. अब अगर यहां पर समुद्र का जल स्तर बढ़ता रहा तो वेनिस का इतिहास और आकर्षण खतरे में पड़ सकते हैं.
वर्जीनिया बीच
वहीं वर्जीनिया बीच के पूर्वी तट पर सबसे तेजी से समुद्री जलस्तर बढ़ रहा है. खबरों के अनुसार, बढ़ते जल स्तर के कारण अब सड़कों पर पानी अक्सर चढ़ जाता है. समुद्र तट के पास बने मकान इस वजह से खतरे में हैं. एक्सपर्ट के अनुसार सन 2100 तक समुद्र का जलस्तर 12 फीट तक की बढ़ सकता है. इससे पहले भी लोग तूफानों के दौरान इसका प्रभाव देख चुके हैं.
बैंकाक शहर
इन शहरों के अलाव बैंकॉक हर साल लगभग 1 सेंटीमीटर तक धंसता जा रहा है. यहां पर बरसात के मौसम में बाढ़ आना बिल्कुल आम बात है. हालांकि, शहर में दस लाख गैलन पानी को जमा करने के लिए चुललोंगकोर्न विश्वविद्यालय शताब्दी पार्क का निर्माण किया गया है. जिसके चलते इससे अस्थायी तौर पर तो मदद मिलती है, लेकिन ये एक अस्थायी समाधान जैसा नजर आता है. क्योंकि, बैंकाक की सड़कें और निचले इलाके अब भी पानी से प्रभावित हैं. यहां पर लगातार बढ़ रहे समुद्र के जल स्तर जमीन के धंसने की वजह से बैंकॉक दुनिया में सबसे ज्यादा संवेदनशील शहर है.
चार और शहर
अगले चार शहरों में न्यू ऑरलियन्स, रॉटरडैम का नाम शामिल है, जिसका लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा समुद्र तल से नीचे है. वहीं अलेक्जेंड्रिया शहर के समुद्र तट धीरे-धीरे गायब होते जा रहे हैं. इसके अलावा मियामी में समुद्र का जलस्तर दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ रहा है. क्योंकि सड़कें अक्सर जलमग्न हो जाती हैं और खारा पानी कुओं को दूषित कर रहा है. जिसके कारण बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा रहा है.

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