Last Updated:February 12, 2026, 09:24 IST
CBSE Board Exam Rules for Sick Students 2026: सीबीएसई बोर्ड परीक्षा से पहले चोट लगने या बीमार होने पर घबराने की जरूरत नहीं है. इस स्थिति में सीबीएसई राइटर (Scribe) और एक्स्ट्रा टाइम जैसी सुविधाएं देता है. जानिए, मेडिकल सर्टिफिकेट की मदद से आप अपना साल कैसे बचा सकते हैं और बोर्ड के नए नियम क्या हैं.

नई दिल्ली (CBSE Board Exam Rules for Sick Students 2026). बोर्ड परीक्षा के दौरान स्टूडेंट्स पर पढ़ाई का काफी दबाव होता है. लेकिन सोचिए अगर परीक्षा से ठीक पहले कोई बीमार पड़ जाए या चोट लग जाए तो क्या होगा? ऐसी स्थिति में स्टूडेंट और उनके माता-पिता बुरी तरह घबरा जाते हैं. उन्हें लगता है कि शायद अब परीक्षा नहीं दे पाएंगे और पूरा साल खराब हो जाएगा. लेकिन अब परेशान होने की जरूरत नहीं है. सीबीएसई ने ऐसी आपात स्थितियों के लिए खास नियम बनाए हैं.
अगर किसी स्टूडेंट के हाथ में चोट लग गई है और वह लिख नहीं पा रहा है या फिर कोई किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहा है तो बोर्ड उसे कई तरह की सुविधाएं देता है. इसमें छात्र की जगह किसी दूसरे से लिखवाने (राइटर) की सुविधा और परीक्षा के लिए एक्स्ट्रा टाइम मिलना शामिल है. हालांकि, ये सुविधाएं पाने के लिए कुछ कागजी कार्रवाई और डॉक्टर के सर्टिफिकेट की जरूरत होती है. जानिए, अगर सीबीएसई बोर्ड परीक्षा 2026 के वक्त ऐसी कोई मुसीबत आ जाए तो आपको तुरंत क्या कदम उठाने चाहिए.
CBSE Board Exam: सीबीएसई बोर्ड परीक्षा से पहले बीमार या चोटिल होने पर क्या करें?
सीबीएसई के नियमों के अनुसार, अगर कोई छात्र बीमारी के कारण मुख्य परीक्षा नहीं दे पाता है तो उसके लिए अलग से परीक्षा नहीं करवाई जाती है. बोर्ड उस विषय में छात्र को ‘अनुपस्थित’ (Absent) मानता है. हालांकि, घबराने की बात नहीं है.. क्योंकि ऐसे छात्रों को साल बर्बाद होने से बचाने के लिए ‘कंपार्टमेंट परीक्षा’ में बैठने का मौका दिया जाता है. इसलिए कोशिश यही होनी चाहिए कि अगर स्वास्थ्य थोड़ा भी ठीक हो तो परीक्षा जरूर दें.
चोट लगने पर ‘राइटर’ (Scribe) की सुविधा
अगर किसी स्टूडेंट का दाहिना हाथ या जिस भी हाथ से वो लिखता है फ्रैक्चर हो जाए तो वह सीबीएसई से ‘राइटर’ की मांग कर सकता है. इसके लिए स्कूल के जरिए बोर्ड को एक आवेदन और सरकारी डॉक्टर का मेडिकल सर्टिफिकेट भेजना होता है. अनुमति मिलने पर छात्र के साथ एक सहायक बैठता है, जो छात्र की तरफ से बोले जा रहे उत्तरों को कॉपी पर लिखता है. अधिक डिटेल्स केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की ऑफिशियल वेबसाइट cbse.gov.in पर चेक कर सकते हैं.
एक्सट्रा टाइम और खास व्यवस्था
जो स्टूडेंट्स शारीरिक रूप से अस्वस्थ हैं या जिन्हें कोई मेडिकल समस्या है, उन्हें परीक्षा पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय भी मिलता है. सामान्य तौर पर 3 घंटे के पेपर में 1 घंटा एक्स्ट्रा दिया जाता है. इसके अलावा, अगर छात्र को बैठने के लिए खास तरह की कुर्सी या व्हीलचेयर की जरूरत है तो केंद्र अध्यक्ष (Center Superintendent) इसकी अनुमति दे सकते हैं. ऐसी किसी भी स्थिति में माता-पिता को सबसे पहले स्कूल के प्रिंसिपल से संपर्क करना चाहिए.
याद रखें, बोर्ड सीधे किसी छात्र की बात नहीं सुनता, सारी प्रक्रिया स्कूल के जरिए ही होती है. मेडिकल रिपोर्ट और जरूरी दस्तावेज तैयार रखें, जिससे आखिरी मौके पर भाग-दौड़ न करनी पड़े.
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With more than 10 years of experience in journalism, I currently specialize in covering education and civil services. From interviewing IAS, IPS, IRS officers to exploring the evolving landscape of academic sys...और पढ़ें
First Published :
February 12, 2026, 09:24 IST

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