Iran Protests: ट्रंप वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को लगातार चेतावनी देते रहे लेकिन मादुरो डटे रहे. परिणाम ये हुआ कि ट्रंप की डेल्टा फोर्स उन्हें उनके किले से उठाकर ले गई.अब ट्रंप लगातार ईरान के सुप्रीम लीडर को भी चेतावनी दे रहे हैं.ट्रंप कह रहे हैं कि उनकी सेना LOCKED और LOADED है. यानी ईरान में एक्शन के लिए तैयार बैठी है. ऐसे में अब पता चला है कि मादुरो की गिरफ्तारी से डरे हुए ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने प्लान-B तैयार कर लिया है. बताया जा रहा है खलीफा ईरान छोड़ने की पूरी तैयारी कर चुके हैं.
खामेनेई के एग्जिट का प्लान
एक ब्रिटिश अखबार ने इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए ईरान के सुप्रीम लीडर के प्लान बी का खुलासा किया है. इस अखबार ने दावा किया है कि खामेनेई के तख्तापलट का काउंटडाउन शुरू हो गया है. ईरान में बढ़ते विरोध प्रदर्शन और अमेरिकी प्रेशर की वजह से खामेनेई ने ईरान छोड़ने की तैयारी कर ली है.
#DNAमित्रों | मादुरो से सबक..'खलीफा' का 'EXIT प्लान' लॉक! खामेनेई..ईरान छोड़कर भागेंगे या लड़ेंगे?#DNA #DNAWithRahulSinha #AliKhamenei #Iran @RahulSinhaTV pic.twitter.com/LoBQtLP8MU
— Zee News (@ZeeNews) January 5, 2026
इस रिपोर्ट में खामेनेई के प्लान बी के बारे में क्या क्या बताया गया है, चलिए आपको बताते हैं. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अगर ईरान की मिलिट्री लीडरशिप खामेनेई के ऑर्डर मानने से मना कर देती है तो ईरान छोड़कर भाग सकते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक खामेनेई तेहरान छोड़कर मॉस्को भागने की फिराक में हैं. रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि खामेनेई ने अपने परिवार और करीबियों को मिलाकर 20 लोगों की लिस्ट तैयार की है जो उनके साथ मॉस्को भागने वाले हैं.
पुतिन से मिल गई रजामंदी?
खामनेई के भागने के लिए एस्केप रूट यानी भागने का रूट तैयार कर लिया गया है. मतलब उनके लिए प्लेन तैयार है. भागने के लिए रास्ता निर्धारित कर लिया गया है. और पुतिन की रजामंदी भी ले ली गई है.
बताया जा रहा है कि खामेनेई का ये प्लान सीरिया के पूर्व राष्ट्रपति बशर-अल-असद के भागने से प्रेरित है, जो दिसंबर 2024 में तख्तापलट के बाद रूस भागे थे.आपके मन में ये सवाल भी आ रहा हो गा कि दुनिया में 195 देश हैं फिर खामेनेई ने रूस को ही क्यों चुना तो इस सवाल का जवाब भी आपको समझना चाहिए.
पिछले एक दशक में खामेनेई सिर्फ दुनिया के तीन ही राष्ट्राध्यक्षों से मिले हैं. पहला- तुर्किये के राष्ट्रपति- रेचेप तय्यप एर्दोगन. लेकिन खामेनेई के लिए तुर्किये भागना ऑप्शन नहीं है क्योंकि वो NATO का हिस्सा है.
दूसरा- सीरिया के पूर्व राष्ट्रपति बशर अल असद, खामेनेई सीरिया भी नहीं भाग सकते हैं क्योंकि असद खुद रूस में निर्वासन काट रहे हैं. तीसरा- व्लादिमीर पुतिन- यानी रूस अब खामेनेई के लिए इकलौता सहारा बचा है.
अगर आप वर्ल्ड पॉलिटिक्स को करीब से समझते हैं तो आपको पता होगा कि ईरान और रूस का गहरा गठजोड़ है लेकिन हम बाकी दर्शकों को इस गठजोड़ को आसान भाषा में समझा देते हैं.
पिछले कुछ दशकों में रूस ईरान का सबसे बड़ा सैन्य और आर्थिक सहयोगी रहा है.
यूक्रेन युद्ध में रूस की सबसे ज्यादा सैन्य मदद ईरान ने ही की है. खामेनेई पुतिन के प्रशंसक हैं.. और उन्हें अपना 'भरोसेमंद दोस्त' मानते हैं. यही वजह है कि खामेनेई के रूस भागने की थ्योरी पर भरोसा किया जा रहा है.
खामेनेई के लिए रूस भागना ज्यादा आसान
रूस भागने की थ्योरी इस लिए भी पुख्ता लगती है क्योंकि खामेनेई के लिए रूस पहुंचना काफी आसान है. खामेनेई हवाई जहाज से कैस्पियन सागर के रास्ते मॉस्को में महज साढ़े चार घंटे में लैंड कर सकते हैं.
ईरान में खामिनेई के दौर का अंत निकट है. ये सिर्फ ब्रिटिश अखबार ही नहीं कह रहा है बल्कि इसे लेकर दुनियाभर में भविष्यवाणियां भी हो रही हैं. शेयर मार्केट की तरह ही एक प्रेडिक्शन मार्केट है,जहां 50% लोग ये मान रहे हैं कि ईरान में जल्द ही खलीफा के शासन का अंत होने वाला है.
ये बिडंबना है कि जिस व्यक्ति ने 36 सालों तक ईरान की सत्ता का सुख लिया.. वो अब भागने के लिए मजबूर है. आज दुश्मन देश के साथ साथ अवाम भी अपने खलीफा को ललकार रही है. बसीर बद्र साहब की एक मशहूर शेर है कुछ तो मजबूरियां रही होंगी.. यूं कोई बेवफ़ा नहीं होता.
ईरान में अब होगा खलीफा युग का अंत
यूं तो ईरान में खलीफा के खिलाफ कई प्रदर्शन हुए, लेकिन मौजूदा प्रदर्शन खलीफा युग के अंत की ओर इशारा कर रहा है. ईरान की अवाम में गुस्सा और असंतोष इस कदर भर गया है कि अब खलीफा की फोर्स इन्हें रोकने में नाकाम नजर आ रही है. ईरान में प्रदर्शन का नौवां दिन चल रहा है और प्रदर्शनकारी खामेनेई के घर के करीब पहुंचते जा रहे हैं. खबर है कि तेहरान से 150 किमी की दूरी पर बसा कौम शहर अब प्रदर्शनकारियों के कब्जे में आ गया है.
ईरान के लगभग हर शहर से ऐसी ही तस्वीरें सामने आ रही हैं. लोगों का आक्रोश अब आग बन गया है और इस आग में खामेनेई जल्द ही जलने वाले हैं.प्रदर्शनकारियों ने देश में हर जगह खामेनेई की तस्वीरों को आग के हवाले कर दिया है.
ईरान में अब तक 23 लोगों की मौत
ईरान की अवाम का क्रोध इसलिए भी उग्र होता जा रहा है क्योंकि प्रदर्शन को दबाने के लिए सड़कों पर उतरी ईरान की सेना और IRGC कमांडोज ने फायरिंग शुरू कर दी है. ईरान में जारी प्रदर्शन में 23 लोगों की जान जा चुकी है. प्रदर्शनकारी पीछे हटने को राजी नहीं हैं और खलीफा इस प्रदर्शन को दबाने के लिए हर हद को पार करने पर उतर आए हैं.
ईरान में जो आपदा आई है, उसे ट्रंप अवसर के तौर पर देख रहे हैं क्योंकि प्रदर्शन की आड़ में अमेरिका ईरान में डायरेक्ट एक्शन करने की फिराक में है. इसके संकेत ट्रंप ने पहले भी दिए थे और एक बार फिर उन्होंने खामेनेई को संदेश भेजा है. इस संदेश को ईरान में युद्ध के पहले की रणभेरी क्यों माना जा रहा है, आप ट्रंप के इस मैसेज को पढ़कर खुद समझ जाएंगे. ट्रंप ने कहा, 'अगर वो प्रदर्शनकारियों की हत्या करेंगे, जो कि उन्होंने पहले किया है तो मैं समझता हूं कि उन्हें अमेरिका से तगड़ा झटका मिलने वाला है.'
क्या ईरान में उतरने वाली है अमेरिकी फौज
ट्रंप ने साफ कहा है कि अगर खामेनेई प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग करेंगे तो अमेरिका हस्तक्षेप करेगा. ईरान में 23 लाशें गिर चुकी हैं. ऐसे में क्या ये मान लिया जाए कि अमेरिकी फौज ईरान में उतरने वाली है. ये सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि एक तरफ जहां अमेरिका मादुरो को गिरफ्तार कर रहा था.दूसरी तरफ ईरान की घेराबंदी भी जारी थी. जैसा कि हमने आपको बताया है कि अमेरिका ने C-17 ग्लोबमास्टर और SOAR यूनिट को रवाना कर दिया है. इनके निशाने पर ईरान भी हो सकता है.
अमेरिका ने फारस की खाड़ी में अपनी नेवी को तैनाती को बढ़ा दिया है.बताया जा रहा है कि अमेरिका ने अपने दो एयरक्राफ्ट कैरियर यहां तैनात कर दिए हैं. अमेरिका ने अपने सबसे बेहतरीन टोही विमान P-8A पोसाइडन को भी फारस की खाड़ी के ऊपर तैनात कर दिया है.
यानी एक तरफ खलीफ अपनी ही अवाम से घिर गए हैं तो वहीं दूसरी तरफ अमेरिका ने भी उनका घेराव शुरू कर दिया है.यही वजह है कि खामेनेई ने एग्जिट प्लान तैयार कर लिया है.

1 day ago
