नई दिल्ली (Education Budget 2026 vs 2025 Analysis). बजट 2025 भारतीय शिक्षा और रोजगार के लिए ‘नींव’ रखने जैसा था. वहीं बजट 2026 उस पर ‘मंजिल’ बनाने की तैयारी है. पिछले साल सरकार का पूरा फोकस मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ाने और शिक्षण संस्थानों के विस्तार पर था, लेकिन इस साल का बजट उस विस्तार को ‘रोजगार’ में बदलने की बड़ी छलांग है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बार डिग्री से ज्यादा ‘डिलीवरी’ (परिणाम) पर फोकस किया है, जहां प्राथमिकता केवल पढ़ाई नहीं, बल्कि पढ़ाई के साथ कमाई और मार्केट की जरूरतों के अनुसार स्किल डेवलपमेंट है.
देश के करोड़ों युवाओं के लिए बजट 2026 पिछले साल यानी 2025 के मुकाबले एक बड़े और महत्वपूर्ण अपग्रेड के रूप में सामने आया है. साल 2025 जहां सरकारी भर्तियों के पुराने ढर्रे और नए संस्थानों की घोषणाओं तक सीमित था, वहीं 2026 का बजट ‘डायरेक्ट बेनिफिट’ और ‘ऑन-जॉब ट्रेनिंग’ के नए युग की शुरुआत कर रहा है. पहली नौकरी पर 15,000 रुपये का बोनस हो या 1 करोड़ इंटर्नशिप का वादा- सरकार ने इस बार कागजी आंकड़ों के बजाय सीधे युवाओं की जेब और उनके भविष्य के करियर ग्राफ को अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकता बनाया है.
Budget 2026 Highlights: शिक्षा और रोजगार बजट में 10 बड़े अंतर
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 पेश कर दिया है. शिक्षा और रोजगार बजट 2026 पिछले साल के बजट से कई मायनों में अलग है. इन दोनों के बीच का अंतर नीचे 10 पॉइंट्स में समझ सकते हैं:
1. आवंटन में ऐतिहासिक वृद्धि
2025: शिक्षा मंत्रालय को ₹1.28 लाख करोड़ मिले थे, जो पिछले वर्ष से 6.65% अधिक थे.
2026: इस साल आवंटन को बढ़ाकर लगभग ₹1.35 लाख करोड़ से अधिक करने का लक्ष्य है, जिसमें विशेष रूप से ‘स्किल इंडिया 2.0’ के लिए फंड बढ़ाया गया है.
2. मेडिकल सीटों का रोडमैप
2025: अगले 5 साल में 75,000 नई सीटें जोड़ने का लक्ष्य रखा गया था, जिसमें 10,000 सीटें पहले साल में जोड़ी गईं.
2026: अब फोकस सीटों के साथ-साथ ‘स्पेशलाइज्ड ट्रेनिंग’ पर है. 10,000 नई मेडिकल सीटों के साथ ही नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ की भर्ती के लिए भी फंड तय किया गया है.
3. ‘डिग्री’ से ‘इंटर्नशिप’ की तरफ बदलाव
2025: सरकार ने 500 कंपनियों में इंटर्नशिप का आधार रखा था.
2026: इस योजना का व्यापक विस्तार करते हुए 1 करोड़ युवाओं को ₹5000 मासिक भत्ते के साथ टॉप कंपनियों में सीधे इंटर्नशिप और ऑन-जॉब ट्रेनिंग की गारंटी दी गई है.
4. AI और फ्यूचर स्किल्स
2025: शिक्षा में एआई के लिए ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ की नींव रखी गई थी.
2026: अब बजट में 10 लाख युवाओं को एआई, डेटा साइंस और मशीन लर्निंग जैसे क्षेत्रों में ‘क्षेत्रीय भाषाओं’ में ट्रेनिंग देने का लक्ष्य रखा गया है.
5. पहली नौकरी पर ‘कैश इंसेंटिव’ (DBT)
2025: रोजगार प्रोत्साहन के लिए सामान्य घोषणाएं थीं.
2026: पहली बार फॉर्मल सेक्टर में नौकरी पाने वालों को सरकार ₹15,000 तक की वित्तीय सहायता सीधे उनके बैंक खाते (EPFO लिंक) में देगी.
6. स्कूल ड्रॉप-आउट को रोकने पर जोर
2025: मुख्य फोकस प्राइमरी स्कूलों पर था.
2026: कक्षा 8 के बाद पढ़ाई छोड़ने वाले छात्रों को रोकने के लिए माध्यमिक स्तर पर डिजिटल क्लासरूम और परिवहन भत्ते (Transport Allowance) जैसे नए प्रावधान किए गए हैं.
7. अटल टिंकरिंग लैब्स (ATL) का विस्तार
2025: स्कूलों में इनोवेशन की शुरुआत हुई थी.
2026: अगले 5 सालों में 50,000 नई ATL लैब्स सरकारी स्कूलों में स्थापित की जाएंगी, जिसका बड़ा हिस्सा इस बजट से शुरू होगा.
8. महिला उद्यमियों के लिए खास प्रावधान
2025: मुद्रा लोन की सीमा ₹10 लाख थी.
2026: पहली बार महिला उद्यमियों के लिए मुद्रा लोन की सीमा बढ़ाकर ₹20 लाख की गई है, जिससे वे रोजगार देने वाली बन सकें.
9. पर्यटन से रोजगार
2025: पर्यटन को सामान्य इंफ्रास्ट्रक्चर श्रेणी में रखा गया था.
2026: पर्यटन को सीधे रोजगार सृजन से जोड़ते हुए 10,000 गाइड्स की ट्रेनिंग और वाइल्डलाइफ ट्रेल्स से स्थानीय नौकरियों के अवसर पैदा करने का फंड दिया गया है.
10. उच्च शिक्षा ऋण (Education Loan)
2025: लोन प्रक्रिया को आसान बनाने की बात थी.
2026: ₹10 लाख तक के हायर एजुकेशन लोन के लिए सरकार की तरफ से ‘ई-वाउचर’ और गारंटी की घोषणा की गई है, जिससे गरीब तबके के स्टूडेंट्स को लोन मिलना आसान होगा.
बजट 2026 में कॉन्टेंट क्रिएटर्स पर फोकस
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 में कॉन्टेंट क्रिएटर्स को आधुनिक अर्थव्यवस्था के नए स्तंभ के रूप में पहचान दी है.
बजट में उनके लिए डिजिटल बुनियादी ढांचे और बौद्धिक संपदा (IP) संरक्षण पर फोकस किया गया है. सरकार ने ‘नेशनल डेस्टिनेशन डिजिटल नॉलेज ग्रिड’ की घोषणा की है, जो ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों के डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन के जरिए कंटेंट क्रिएटर्स के लिए बड़े पैमाने पर प्रोजेक्ट्स और रोजगार के नए अवसर खोलेगा. क्रिएटिव इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए डिजिटल विज्ञापनों और डेटा उपयोग से संबंधित नियमों को सरल बनाने और क्रिएटर्स को MSME के दायरे में लाकर उन्हें आसान ऋण और वित्तीय लाभ देने का इशारा किया गया है, जिससे भारतीय कंटेंट वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सके.
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