Gisat-1A: 2200 किलो वजनी इसरो का यह 'ब्रह्मास्त्र', बादलों को चीर कर देखेगा, सेना को मिलेगी रियल टाइम इमेज

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Last Updated:February 06, 2026, 17:29 IST

ISRO Gisat-1A Launch: इसरो 20 फरवरी से 5 मार्च के बीच Gisat-1A (EOS-05) सैटेलाइट लॉन्च करने की तैयारी में है. यह सैटेलाइट 2021 में फेल हुए Gisat-1 का स्थान लेगा. 2.2 टन का यह सैटेलाइट रियल टाइम मॉनिटरिंग के जरिए सेना की मदद करने के साथ-साथ खेती और आपदा प्रबंधन में महत्वपूर्ण डेटा प्रदान करेगा.

 2200 किलो का जासूस सैटेलाइट स्पेस में कैसे बनेगा भारत की 'तीसरी आंख'Zoom

20 फरवरी को श्रीहरिकोटा से लॉन्च होने को तैयार 100% स्वदेशी 'आसमानी आंख'. (सांकेतिक तस्वीर : AI)

बेंगलुरु: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) एक बार फिर इतिहास रचने की दहलीज पर है. करीब साढ़े चार साल पहले अगस्त 2021 में मिली एक नाकामी को पीछे छोड़ते हुए इसरो अब ‘जियो इमेजिंग सैटेलाइट’ (Gisat-1A) को लॉन्च करने की तैयारी पूरी कर चुका है. इसे EOS-05 भी कहा जा रहा है. यह वही सैटेलाइट है जिसका पिछला वर्जन Gisat-1 (EOS-03) रॉकेट के क्रायोजेनिक स्टेज में आई तकनीकी खराबी के कारण अंतरिक्ष में नहीं पहुंच सका था. अब इसरो इस ‘रिप्लेसमेंट’ सैटेलाइट के जरिए अंतरिक्ष से भारत की निगरानी क्षमताओं को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाला है.

सरहदों पर रहेगी पैनी नजर, रियल टाइम में मिलेगी हर हलचल

Gisat-1A को भारत की ‘आसमानी आंख’ कहा जा रहा है. करीब 2.2 टन वजनी यह सैटेलाइट मुख्य रूप से नागरिक उद्देश्यों के लिए है, लेकिन इसकी क्षमताएं सशस्त्र बलों के लिए गेम-चेंजर साबित होंगी. यह सैटेलाइट भारतीय उपमहाद्वीप की ‘रियल टाइम’ (तुरंत) इमेजिंग करने में सक्षम है. इसका मतलब है कि सरहदों पर होने वाली किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी सेना को तुरंत मिल सकेगी. यह सैटेलाइट घने बादलों के बीच से भी साफ तस्वीरें लेने और डेटा भेजने की काबिलियत रखता है, जिससे रणनीतिक ऑपरेशन्स की प्लानिंग करना आसान हो जाएगा.

आपदा प्रबंधन से लेकर खेती तक, हर क्षेत्र में होगा बड़ा बदलाव

यह सैटेलाइट सिर्फ सुरक्षा तक सीमित नहीं है. इसरो के अनुसार, Gisat-1A खेती, वन विज्ञान, खनिज विज्ञान और आपदा प्रबंधन में क्रांतिकारी डेटा प्रदान करेगा. यह हिमखंडों (Glaciers) के पिघलने, समुद्र के तापमान में बदलाव और जंगलों की सेहत पर लगातार नजर रखेगा. अगर देश के किसी हिस्से में बाढ़ या चक्रवात जैसी आपदा आती है, तो यह सैटेलाइट उसकी चेतावनी देने और बचाव कार्यों में सटीक मदद करने के लिए सबसे भरोसेमंद जरिया बनेगा.

श्रीहरिकोटा के लिए रवाना होने को तैयार ‘स्वदेशी योद्धा’

सूत्रों के मुताबिक, बेंगलुरु स्थित यूआर राव सैटेलाइट सेंटर (URSC) में इस सैटेलाइट के सभी जरूरी टेस्ट और माइलस्टोन पूरे हो चुके हैं. इसरो चेयरमैन एस. सोमनाथ की फाइनल समीक्षा के बाद इसे इसी हफ्ते श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC) भेजा जा सकता है. इसरो इस बार सुरक्षा को लेकर बेहद सख्त है. पिछले कुछ समय में PSLV-C61 और C62 की असफलताओं से सबक लेते हुए वैज्ञानिक हर बारीकी की जांच कर रहे हैं. GSLV-F17 मिशन के जरिए इस सैटेलाइट को लॉन्च किया जाना है. इसके लिए 20 फरवरी से 5 मार्च तक की ‘लॉन्चिंग विंडो’ (Notam) भी जारी कर दी गई है.

GSLV की पुरानी नाकामियों से लिया बड़ा सबक

GSLV रॉकेट का इतिहास उतार-चढ़ाव भरा रहा है. 12 अगस्त 2021 को GSLV-F10 मिशन के दौरान क्रायोजेनिक अपर स्टेज (CUS) में खराबी के कारण Gisat-1 मिशन फेल हो गया था. हालांकि, उसके बाद इसरो ने अपनी तकनीक में कई सुधार किए हैं. जुलाई 2025 में ‘निसार’ (NISAR) सैटेलाइट की सफल लॉन्चिंग (GSLV-F16) के बाद वैज्ञानिकों का भरोसा बढ़ा है. अब GSLV-F17 के जरिए Gisat-1A को अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित करना इसरो के लिए न सिर्फ एक वैज्ञानिक उपलब्धि होगी, बल्कि यह 2021 की उस असफलता का हिसाब भी चुकता करेगा.

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Deepak Verma

दीपक वर्मा (Deepak Verma) एक पत्रकार हैं जो मुख्‍य रूप से विज्ञान, राजनीति, भारत के आंतरिक घटनाक्रमों और समसामयिक विषयों से जुडी विस्तृत रिपोर्ट्स लिखते हैं. वह News18 हिंदी के डिजिटल न्यूजरूम में डिप्टी न्यूज़...और पढ़ें

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Bengaluru,Bengaluru,Karnataka

First Published :

February 06, 2026, 17:29 IST

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Gisat-1A: 2200 किलो का जासूस सैटेलाइट स्पेस में कैसे बनेगा भारत की 'तीसरी आंख'

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