Last Updated:February 16, 2026, 11:22 IST
India-China Comparison: आज की तारीख में आर्थिक विकास को लेकर हर कोई भारत और चीन की तुलना करता है. यह सही है कि चीन आज एक विकसित देश बनने के कागार पर है. विकास और आर्थिक प्रगति के तमाम मानकों पर वह भारत से काफी आगे है. लेकिन, भारत भी इस रेस में शामिल हो चुका है. उसने कई सेक्टर्स में अपनी शानदार पहचान बनाई है. कई में वह चीन से काफी आगे हैं. ऐसे में अब आपको भारत को कोसने से पहले ये स्टोरी जरूर पढ़नी चाहिए.

India China Comparison: बीते दो-तीन दशकों में चीन ने अपने आर्थिक विकास से अपनी तरफ पूरी दुनिया की नजर खींची है. आज चीन सुपर पावर है. इसमें कोई शक नहीं है. वह अमेरिका के बाद दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. उसकी आर्थिक ताकत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उसके पास विदेशी मुद्रा भंडार 3000 अरब डॉलर से अधिक है. उसका सालाना निर्यात 3800 अरब डॉलर का है. उसका ट्रेड सरप्लस ही 1000 अरब डॉलर से अधिक का है. ट्रेड सरप्लस का मतलब आयात से निर्यात का अधिक होना होता है. किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए ऐसी स्थिति बहुत अच्छी मानी जाती है. दूसरी तरफ भारत है. जो इन सभी मानकों पर चीन से काफी पीछे हैं. आज हम चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर तो हैं. लेकिन, भारत का कुल निर्यात करीब 825 अरब डॉलर है. आयात करीब 915 अरब डॉलर का है. भारत का व्यापार घाटा 90 अरब डॉलर का है.
कुल मिलाकर भारत भी आज वैश्विक स्तर पर रेस में शामिल है. लेकिन चीन बहुत आगे हैं. वहां साइंस एंड टेक्नोलॉजी से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक हर एक क्षेत्र में काफी प्रगति हुई है. लेकिन, इस दौरान भारत ने भी कई सेक्टर में शानदार प्रगति की है. कई में वह चीन से आगे है. वह कई मायनों में ग्लोबल लीडर है. ऐसे में हमारा कहना है कि आप चीन की आर्थिक तरक्की की तारीफ कीजिए लेकिन ऐसा नहीं है कि भारत में कुछ नहीं हो रहा है. इसको लेकर विलाम मत कीजिए. भारत भी पूरे दम से कोशिश कर रहा है और कुछ सेक्टर्स में उसने दुनिया में अपनी बेहद खास पहचान भी बनाई है.
आईटी सर्विसेज एंड सॉफ्टवेयर
भारत आज सॉफ्टवेयर सर्विसेज सेक्टर में ग्लोबल लीडर है. ग्लोबल सॉफ्टरवेयर इंजीनियरिंग में भारत की हिस्सेदारी करीब 15 फीसदी है. भारत का आईटी एक्सपोर्ट चीन की तुलना में काफी अधिक है. चीन का फोकस अपने डोमेस्टिक मार्केट के लिए सॉफ्टवेयर डेवलप करने पर रहा है. वहीं भारतीय कंपनियां जैसे टीसीएस, इंफोसिस और एचसीएल ग्लोबल मैनेज सर्विस और आरएंडडी में काफी आगे हैं. भारत जीसीसी का हब है. जीसीसी का मतलब ग्लोबल कैपसिटी सेंटर है. यहां मल्टीनेशनल कॉरपोरेशन या कंपनियां हाईटेक प्रोडक्ट इंजीनियरिंग करती हैं.
फार्मास्यूटिकल
भारत को फॉर्मेसी ऑफ वर्ल्ड कहा जाता है. भारत की दुनिया में सस्ती दवाइयों की सप्लाई के लिए जाना जाता है. भारत दुनिया की करीब 20 फीसदी जेनरिक दवाइयों की सप्लाई करता है. भारत की करीब 70 फीसदी दवाइयों उत्तरी अमेरिका और यूरोप के विकसित देशों में जाती हैं जहां रेग्युलेशन के नियम बेहद कड़े हैं. भारत करीब 30 अरब डॉलर की दवा निर्यात करता है. इस सेक्टर में चीन का निर्यात 120 अरब डॉलर का है लेकिन इसमें सबसे अधिक रॉ मैटेरियल हैं.
स्पेस टेक्नोलॉजी
इस सेक्टर में चीन और भारत के बीच कांटे की टक्कर है. वैसे चीन का स्पेस बजट भारत की तुलना बहुत अधिक है. लेकिन भारत की पहचान कम लागत में स्पेस को एक्सप्लोर करने वाले देश की है. भारत की स्पेस एजेंसी इसरो ने बड़ी कामयाबी हासिल की है. भारत के चंद्रयान और मंगलयान मिशन ने दुनिया को नजारा दिखाया है. इसके साथ ही स्पेस टेक्नोलॉजी को प्राइवेट सेक्टर के लिए भी खोल दिया गया है. चीन की तुलना में भारत में प्राइवेट सैटेलाइट लॉन्च और रिमोट सेंसिग कंपनियां तेजी से अपनी पहचान बना रही हैं.
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्टर
इस मामले में भारत दुनिया का किंग है. यूपीआई जैसे सिस्टम ने भारत को एक खास पहचान दिलाई है. भारत में यूपीआई सिस्टम बेहद एडवांस है. वहीं चीन में ऐसा सिस्टम है लेकिन, अभी तक वह इतना एडवांस नहीं है. वहां अलीपे और वीचैट जैसे प्लेटफॉर्म हैं लेकिन क्लोज्ड-लूप सिस्टम हैं. वहीं भारत में आप किसी भी प्लेटफॉर्म से किसी दूसरे प्लेटफॉर्म पर बड़े आसानी से पेमेंट कर सकते हैं. भारत का आधार इलेबल्ड वित्तीय समावेशन भी शानदार है.
डेमोग्राफी और अंग्रेजी ज्ञान
भारत की एक सबसे बड़ी ताकत अंग्रेजी ज्ञान और उसकी डेमोग्राफी है. अंग्रेजी दुनिया की भाषा है. इसके साथ ही भारत की एक तिहाई आबादी 15 साल से नीचे की है. वहीं चीन तेजी से बूढ़ा होते जा रहा है. इस कारण वहां कामकाजी लोगों की संख्या घट रही है. भारत में आने वाले वक्त में बड़ी संख्या कामकाजी लोग मौजूद रहेंगे. इसके साथ ही भारत की एक बड़ी आबादी अंग्रेजी बोलने वाली है. इस कारण भारत दुनिया के सर्विस सेक्टर में बड़ा प्लेयर बनकर उभरा है. वह लीगल, अकाउंटिंग और कंसल्टिंग सर्विसेज में काफी आगे है.
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न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स...और पढ़ें
First Published :
February 16, 2026, 11:22 IST

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