India Hindu Population: जब कुछ नहीं था तब सनातन था... अब कैसी है दुनिया में हिंदुओ की डेमोग्राफिक स्थिति? प्यू की रिपोर्ट पढ़कर होगा गर्व

1 hour ago

Hindu Population Religious Diversity Index: हिंदू धर्म (सनातन), इस्लाम, सिख, ईसाइयत के अलावा दुनिया में कई मत और परंपराएं हैं. मान्यता है स्वयंभुव मनु (प्रथम पुरुष) और शतरूपा (प्रथम स्त्री) मानव जाति के आदि पूर्वज यानी माता-पिता हैं. ईसाई धर्म दो हजार सालों से मानव समाज का हिस्सा है. वहीं हिजरी (इस्लामिक) कैलेंडर से देखें तो दुनिया जब नए साल 2026 का स्वागत कर रही थी तब इस्लामिक कैलेंडर में 1447 हिजरी का सातवां महीना चल रहा था. प्यू की एक हालिया रिपोर्ट में हिंदू धर्म की आबादी और डेमोग्राफी को लेकर शानदार बात पता चली है.

प्यू रिसर्च की रिपोर्ट 

प्यू ने सभी धर्मों से जुड़ी रिपोर्ट में 201 देशों की आबादी का सैंपल साइज लिया. दुनिया की करीब 99.98% आबादी को शामिल किया गया. 2010-2020 के बीच दुनिया के धार्मिक हालातों में आए बदलाव को नजदीक से देखकर आरडीआई (Religious Diversity Index) बनाया. आरडीआई में सात समूहों-  ईसाई, मुसलमान, हिंदू, बौद्ध, यहूदी, अन्य धर्मों के लोगों और कोई भी धर्म न मानने वालों (नास्तिक) को शामिल किया गया. आइए जानते हैं इससे क्या पता चला? 

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हिंदुओं की स्थिति

हिंदुओं की बात करें भारत में एक दौर ऐसा भी था जब विदेशी अर्थशास्त्री, 1947 में मिली आजादी के बाद के शुरुआती दशकों में भारत के धीमे आर्थिक विस्तार पर तंज कसते हुए एक विवादास्पद शब्द इस्तेमाल करते थे. वो देश की सुस्त इकॉनमिक ग्रोथ को 'हिंदू ग्रोथ रेट' कहते थे. 1990 के बाद दुनिया की मानसिकता बदली जब भारत ने उदारीकरण की व्यवस्था अपनाते हुए बंद अर्थव्यवस्था के दरवाजे दुनिया के लिए खोल दिए.

हिंदू डेमोग्राफी

प्यू की ग्लोबल डेमोग्राफिक स्टडी ने बताया कि 2010 से 2020 के बीच हिंदू ग्रोथ रेट एकदम संतुलित और आकर्षक रही है. हिंदू पॉपुलेशन की ग्रोथ रेट एकदम परफेक्ट रही. यानी हिंदुओं की आबादी न तो अप्रत्याशित तेजी से बढ़ी और ना ही चिंताजनक रूप से घटी. हिंदू धर्म की डेमोग्राफिक की ये ऐसी कहानी है, जिससे दुनिया हैरान भी है और उसकी तारीफ भी कर रही है.

हिंदू धर्म की डेमोग्राफिक कहानी उथल-पुथल के बजाय निरंतरता की है. हिंदुओं की ग्रोथ रेट ने कभी भी इस्लाम या क्रिश्चियानटी को मानने वालों को चिंता में नहीं डाला.

2010 और 2020 के बीच, दुनियाभर में हिंदू आबादी लगभग 107 करोड़ से बढ़कर 120 करोड़ हो गई. एक दशक में 13 करोड़ आबादी बढ़ी. इसके बावजूद दूसरे धर्मों की आबादी के अनुपात में हिंदुओं का हिस्सा करीब 15% पर टिका रहा. हिंदू आबादी का ग्रोथ चार्ट डेमोग्राफिक अलाइनमेंट पर एकदम खरा और कसा उतरा. जबकि इसी दौरान अन्य धर्मों की आबादी में घनघोर इजाफा हुआ. गौरतलब है कि एक समय नेपाल दुनिया के एकलौता हिंदू राष्ट्र था. वहीं भारत में दुनिया की सबसे अधिक हिंदू आबादी रहती थी, यह स्थिति आज भी कायम है. 

99% हिंदू एशिया-प्रशांत क्षेत्र में रहते हैं. इससे भी सबसे ज्यादा खास बात ये कि 95% हिंदू सिर्फ एक देश - 'भारत' में रहते हैं.

ईसाई धर्म या इस्लाम अलग-अलग महाद्वीपों और संस्कृतियों में फैले हैं. हिंदू धर्म एक ही सभ्यता के भौगोलिक क्षेत्र से जुड़ा रहा.

बाकी का क्या?

इस रिपोर्ट के मुताबिक ईसाई दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक समूह है. मुसलमान सबसे तेजी से बढ़ रहे हैं. हिंदुओं की संख्या करीब 15 प्रतिशत पर स्थिर है. वहीं बौद्धों की संख्या में गिरावट आई. साल 2010-2020 के बीच इस्लाम सबसे तेज रफ्तार से बढ़ने वाला धर्म रहा.

100 करोड़ से ज्यादा अनुयायियों वाला सनातनी हिंदू धर्म निरंतर दुनिया के साथ कदम मिलाकर बढ़ रहा है. धार्मिक परिवर्तनों के इस युग में, इस प्रकार की संख्यात्मक स्थिरता अपने आप में एक अनूठी कहानी है.

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भारत पर आक्रमण की कहानी

भारत पर पहला आक्रमण 636 ई. में हुआ, जो नाकाम रहा. 711 में दूसरा आक्रमण भी नाकाम रहा. 712 ई. में अरब से आए मुहम्मद बिन कासिम का हमला हुआ. यह आक्रमण अरब जगत के वित्तीय हितों और इस्लाम के प्रचार से जुड़ा था. सिंध में तब राजा दाहिर का राज था, दाहिर की हार हुई. जिससे इस उपमहाद्वीप में इस्लामी शासन की शुरुआत की. इसके बाद तुर्क, अफगान और मंगोल जैसे कई आक्रमणकारी भारत आए. मुगलों की बात करें तो 1526 से 1857 तक उन्होंने राज किया. बाबर से औरंगजेब तक 6 धुरंधर रहे, बाकी बहादुर शाह जफर तक ने विरासत में दिल्ली की गद्दी का सुख विरासत में मिली संपत्ति की तरह भोगा. 

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