Last Updated:February 07, 2026, 12:13 IST
SC on NEET PG Low Cut-Off: सुप्रीम कोर्ट ने नीट पीजी कट-ऑफ पर्सेंटाइल को 50 से घटाकर 7 करने पर हैरानी जताई है. कोर्ट ने सवाल किया कि क्या 0 या नेगेटिव मार्क्स वाले स्टूडेंट्स को एडमिशन देने से चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित नहीं होगी.

नई दिल्ली (NEET PG Low Cut-Off). सुप्रीम कोर्ट ने साल 2025-26 के लिए नीट पीजी कट-ऑफ पर्सेंटाइल में की गई भारी कटौती पर चिंता व्यक्त की है. न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन (NBE) से उस निर्णय का आधार मांगा है, जिसके तहत कट-ऑफ को 50 पर्सेंटाइल से घटाकर 7 पर्सेंटाइल किया गया. कोर्ट ने कहा कि इतने कम स्कोर वाले उम्मीदवारों को भी एडमिशन के लिए पात्र बनाना शिक्षा की क्वॉलिटी के साथ खिलवाड़ हो सकता है.
NBE के इस निर्णय के चलते नीट पीजी में 0 या नेगेटिव मार्क्स पाने वाले भी एडमिशन के लिए योग्य हो गए हैं. सुप्रीम कोर्ट इस बात की गहराई से जांच करेगा कि क्या इतने निचले स्तर का कट-ऑफ चिकित्सा शिक्षा के मानकों को प्रभावित करेगा. केंद्र सरकार की तरफ से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अर्चना पाठक दवे ने तर्क दिया कि यह कटौती मेडिकल पीजी की सीटें भरने के लिए की गई है. हालांकि, कोर्ट ने इस तर्क पर असंतोष जताते हुए कहा कि सीटों को भरने की होड़ में क्वॉलिटी से समझौता नहीं किया जा सकता.
NEET-PG कट-ऑफ विवाद: हैरान करने वाली गिरावट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह यह देखकर हैरान है कि कट-ऑफ को 50 पर्सेंटाइल से घटाकर सीधे 7 पर्सेंटाइल तक लाया गया. कोर्ट ने इसे ‘सबस्टेंशियल रिडक्शन’ (Substantial Reduction) करार दिया है और बोर्ड से इस कदम के पीछे के तर्क को न्यायोचित ठहराने को कहा है.
सुप्रीम कोर्ट: मेडिकल एजुकेशन की क्वॉलिटी पर बड़ा खतरा
पीठ ने आशंका जताई कि बहुत कम योग्यता अंक रखने से स्पेशलाइज्ड मेडिकल कोर्सेज की गुणवत्ता गिर जाएगी. कोर्ट का मुख्य फोकस इस बात पर है कि क्या एक छात्र, जिसका प्रदर्शन स्टैंडर्ड से बहुत नीचे है, वह विशेषज्ञ डॉक्टर (Specialist Doctor) बनने के योग्य है?
जानिए एनबीई (NBE) और सरकार का तर्क
सरकार की दलील है कि सभी योग्य उम्मीदवार पहले से ही एमबीबीएस डॉक्टर हैं. इसलिए पीजी सीटों को खाली रखने के बजाय उन्हें भरना बेहतर है. उनका दावा है कि इससे शिक्षा के स्तर पर फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन कोर्ट ने इस पर फिलहाल सहमति नहीं दी है.
निजी कॉलेजों को सबसे अधिक फायदा
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 2023 में जब नीट पीजी कट-ऑफ घटाई गई थी, तब 64% सीटें उन उम्मीदवारों से भरी गई थीं, जो प्रारंभिक कट-ऑफ से नीचे थे. इनमें से ज्यादातर एडमिशन प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में हुए थे, जिससे इस फैसले के पीछे के व्यावसायिक हितों पर भी सवाल उठ रहे हैं.
शून्य स्कोर वाले भी बनेंगे डॉक्टर?
सबसे विवादित पहलू यह है कि इस कटौती के बाद शून्य (Zero) या नेगेटिव स्कोर वाले उम्मीदवार भी पात्रता के दायरे में आ गए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि मेडिकल कॉलेज में एडमिशन के लिए न्यूनतम स्टैंडर्ड निर्धारित होना जरूरी है.
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First Published :
February 07, 2026, 12:13 IST

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