Last Updated:January 06, 2026, 11:20 IST
Jammu and Kashmir Terrorist News: जम्मू-कश्मीर में अब आतंकियों की खैर नहीं है. कुछ दिनों में घाटी से उनके नामोनिशान मिट जाएंगे. जम्मू-कश्मीर में 2019 में 400 से ज्यादा विदेशी आतंकी थे, मगर अब सिर्फ 52 बचे हैं. माना जा रहा है कि साल 2026 में घाटी में मौजूद विदेशी आतंकियो का खात्मा हो जाएगा. ISI के पाले लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों पर सुरक्षा बलों की कार्रवाई जारी है.
जम्मू-कश्मीर में अब 52 विदेशी आतंकी बचे. सुरक्षा बलों का खुलासासाल 2026 में घाटी में मौजूद विदेशी आतंकियो का खात्मा होकर रहेगा. जम्मू-कश्मीर में मौजूद एफटी यानी फॉरेन टेररिस्ट टारगेट पर हैं. जम्मू और कश्मीर में अब फॉरेन टेररिस्ट मॉड्यूल के आतंकियों की संख्या में कमी आई है. साल 2019 में जहां जम्मू-कश्मीर में 400 से ज्यादा विदेशी आतंकी थे, वहीं अब विदेशी आतंकियों की संख्या केवल 52 रह गई है. जबकि जम्मू-कश्मीर में करीब 10 के करीब लोकल आतंकी बचे हैं, जो जल्द या तो पकड़े जाने की उम्मीद है या सुरक्षा बलों के ऑपरेशन में ढेर होंगे. यानी सुरक्षाबलों की करवाई का असर साफ देखने को मिल रहा है.
दरअसल, पिछले कुछ सालों से सुरक्षा बल लगातार बड़े ऑपरेशन कर रहे हैं. इसके चलते विदेशी आतंकियों के साथ साथ लोकल आतंकी भी कम हुए हैं. एजेंसियों के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में विदेशी आतंकियों का मॉड्यूल पाकिस्तानी जाजूस एजेंसी आईएसआई (ISI) की मदद से सक्रिय हैं. एफटी यानी फॉरेन टेररिस्ट मॉड्यूल के लोकल नेटवर्क को भी क्रैक डाउन करने में सुरक्षा एजेंसियां जुटी हैं.
कब कितने आतंकी मारे गए?
आधिकारिक आंकड़ों की बात करें तो साल 2024 में कुल 68 आतंकवादी मारे गए. इनमें से 42 विदेशी आतंकी थे. ज्यादातर आतंकी पाकिस्तान से घुसपैठ कर घाटी आए थे. ये आतंकवादी या तो नियंत्रण रेखा (LoC) पर घुसपैठ के दौरान मारे गए या फिर कश्मीर के अंदर सुरक्षाबलों की कार्रवाई में ढेर हुए. नार्थ कश्मीर के बारामुला जिले में सबसे ज़्यादा विदेशी आतंकी मारे गए 9 मुठभेड़ों में 14 आतंकी मारे गए. वहीं, जम्मू क्षेत्र में भी लगभग 40 आतंकियों में से 35-36 विदेशी थे. इस बदलाव की वजह से स्थानीय भर्ती में भारी गिरावट आई है.
कब कितने आतंकी बने?
2021 में 125 स्थानीय युवक आतंकवादी बने. 2022 में 100 स्थानीय युवक आतंकी बने. 2023 में यह संख्या घटकर 22 रह गई. साल 2024 में सिर्फ़ 7 युवक आतंकवादी बने.क्यों पाकिस्तान ने आतंकी भेजना शुरू किया?
अब तो हालत यह है कि कश्मीर में सक्रिय स्थानीय आतंकियों की संख्या 10 से भी कम रह गई है. ऐसे में पाकिस्तान ने इसी कमी को पूरा करने के लिए अपने ट्रेंड किए गए आतंकी भेजने शुरू किए हैं. इसमें हिजबुल मुजाहिद्दीन, लश्कर-ए-तैयबा (LeT), जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और उनके अन्य विंग जैसे TRF (द रेसिस्टेंस फ्रंट), PAFF (पीपुल्स एंटी-फासिस्ट फ्रंट), और कश्मीर टाइगर्स जैसे संगठन शामिल हैं. लेकिन अब सुरक्षा बलों ने इन विदेशी यानी पाकिस्तानी मॉड्यूल के आतंकियों की कमर तोड़ दी है. और अब विदेशी आतंकियों की संख्या भी घटकर केवल 52 रह गई है.
जम्मू कश्मीर में अब FT मॉड्यूल के आतंकियों की संख्या में आई कमी
इन विदेशी आतंकियों में कौन हैं टॉप टेन आतंकी?
1. जाकिर उर्फ कासिम उर्फ वलीद: यह लश्कर-ए-तैयबा का कमांडर है. गांदरबल के आसपास ऑपरेट करता है. यह सितंबर 2020 से एक्टिव है. इसकी केटेगरी A++ है. 2. एजाज उर्फ अबु हुरैरा उर्फ पिकल उर्फ छोटा हफीज: यह लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी है. श्रीनगर के आसपास ऑपरेट करता है. मई 2021 से एक्टिव है. इसकी कैटरगेरी A++ है. 3. उमेर भाई उर्फ अबु तल्हा उर्फ उर्फ इस्माइल उर्फ तल्हा उर्फ कारी: ये लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी है. ये जुलाई 2021 से एक्टिव है. श्रीनगर के आसपास से ऑपरेट करता है. इसकी कैटेगरी A+ है. 4. छोटा फ़ैदुल्लाह उर्फ अली भाई उर्फ अयाज उर्फ अबु अली: यह लश्कर ए तैयबा का आतंकी है. यह साल 2017 से एक्टिव है. श्रीनगर के आसपास से ऑपरेट कर रहा है. इसकी कैटेगरी A++ है. 5. गाजी उर्फ पठान: यह लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी है. गाजी 2016 से एक्टिव है. बडगाम के आसपास ऑपरेट करता है. इसकी कैटेगरी A++ है. 6. अबु तालिब: अबु तालिब लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी है. यह 2024 से एक्टिव है. यह नौगाम के आसपास एक्टिव रहता है और यह A केटेगरी का आतंकी है. 7. दुजाना उर्फ रिज़वान: रिजवान लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी है. यह सितम्बर 2020 से एक्टिव है. यह गांदरबल से ऑपरेट करता है और इसकी कैटेगरी A है. 8 बाबर: आतंकी बाबर लश्कर-ए-तैयबा का आतंकवादी है. यह 2022 से एक्टिव है और गांदरबल से ऑपरेट करता है. इसकी केटेगरी A है. 9. तालिब: यह भी लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी है. 2024 से एक्टिव हैं. यह श्रीनगर के आसपास से एक्टिव है. इसकी केटेगरी A है. 10. हमस भाई: यह भी लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी है. यह जून 2023 से एक्टिव है. यह श्रीनगर के आसपास से ऑपरेट करता है. इसकी केटेगरी A है.जम्मू-कश्मीर में अब 52 विदेशी आतंकी बचे. सुरक्षा बलों का खुलासा
और कौन हैं आतंकी?
इसके अलावा जैश-ए-मोहम्मद, और बाकी पाकिस्तानी आतंकी संगठन के भी कई आतंकी हैं. समय-समय पर इन आतंकियों के छिपे होने की लोकेशन भी सुरक्षा एजेंसियों को मिलती रहती है. और उसके बाद इनको पकड़ने के लिए ऑपरेशन भी चलाये जाते हैं. कुलगाम, कुपवाड़ा, पुलवामा, उरी, अनंतनाग, शोपियांन, बड़गाम, बांदीपोरा, गुलमर्ग, बारहमुला और साउथ कश्मीर के कई ऐसे जंगली और पहाड़ी इलाके हैं, जंहा इन आतंकियो के छिपे होने की खबर सुरक्षा एजेंसियों के हाथ लगी. लेकिन जब इनको तलाशने के लिए ओपरेशन चलाया गया तो ये जंगली रास्ते का फायदा उठा कर फरार हो गए.
कौन करता है आतंकियों की मदद
हालांकि, यह भी सच है कि इन आतंकियों की मदद OGW का बड़ा नेटवर्क करता है. ओजीडब्लूय यानी ओवर ग्राउंड वर्कर्स. ये ओवर ग्राउंड वर्कर्स अपने घरों में छिपाने से लेकर इन आतंकियो को एक जगह से दूसरे जगह ले जाने, इन्हें खाने-पीने और लॉजिस्टिक मुहैया कराने का काम करतें. जम्मू-कश्मीर में इसका नेटवर्क फैला है.
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Shankar Pandit has more than 10 years of experience in journalism. Before News18 (Network18 Group), he had worked with Hindustan times (Live Hindustan), NDTV, India News Aand Scoop Whoop. Currently he handle ho...और पढ़ें
Location :
Jammu and Kashmir
First Published :
January 06, 2026, 11:20 IST

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