इस बार के बजट में सरकार के घाटे से ज्‍यादा कर्ज पर जोर, जीडीपी का 56 फीसदी पहुंच गया है सरकारी लोन

1 hour ago

Last Updated:January 30, 2026, 17:25 IST

Budget 2026 : रविवार को बजट जारी होगा, लेकिन इस बार के बजट में सरकार की रणनीति पूरी तरह बदली नजर आएगी. सरकार का पूरा जोर इस बार राजकोषीय घाटे के बजाय जीडीपी और कर्ज के अनुपात को घटाने पर होगा.

इस बार के बजट में सरकार के घाटे से ज्‍यादा कर्ज पर जोर, जीडीपी का 56% पहुंचासरकार ने देश का कर्ज घटाने की रणनीति बनाई है.

नई दिल्‍ली. बस एक दिन और फिर दुनिया के सामने होगा सबसे तेज बढ़ती अर्थव्‍यवस्‍था का बजट. इस बार के बजट पर सिर्फ भारत के लोगों की निगाहें हैं, बल्कि अमेरिका से पाकिस्‍तान तक हर देश बदलते हिंदुस्‍तान की सोच पर नजर रखेगा. सरकार के सामने विनिर्माण बढ़ाने और टैरिफ जैसी मुश्किलों से निपटने के साथ ही राजकोषीय घाटे और बढ़ते सरकारी कर्ज में तालमेल बैठाने की भी चुनौती होगी. विशेषज्ञों का कयास है कि इस बार के बजट में राजकोषीय घाटे को ज्‍यादा तरजीह देने के बजाय सरकार बढ़ते कर्ज पर ज्‍यादा फोकस कर सकती है.

माना जा रहा है कि आगामी आम बजट में किसी खास राजकोषीय घाटे के आंकड़े को लक्षित करने के बजाय कर्ज और जीडीपी अनुपात को कम करने पर जोर दिया जाएगा, जो इस समय करीब 56 फीसदी पहुंच गया है. ऐसा इसलिए है, क्योंकि देश एफआरबीएम कानून में दिए गए राजकोषीय सुदृढ़ीकरण के मार्ग के लगभग अंत तक पहुंच गया है. भारत जैसी बढ़ती और विकासशील अर्थव्यवस्था के लिए 3-4 फीसदी का राजकोषीय घाटा सहज और उचित माना जाता है, जिसका उद्देश्य वित्तीय स्थिरता के साथ आर्थिक विस्तार को संतुलित करना है.

कितना था राजकोषीय घाटे का लक्ष्‍य
संशोधित राजकोषीय दायित्व और बजट प्रबंधन (एफआरबीएम) अधिनियम के तहत, वित्‍तवर्ष 2025-26 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य जीडीपी के 4.5 फीसदी से नीचे रखा गया था. लिहाजा केंद्र सरकार ने कर्ज-जीडीपी अनुपात को एक नया मानक घोषित किया है .अगले छह साल का मसौदा एक फरवरी, 2025 को जारी एफआरबीएम वक्तव्य में घोषित किया गया था. वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने जुलाई, 2024 के अपने बजट भाषण में कहा था कि मेरे द्वारा साल 2021 में घोषित राजकोषीय सुदृढ़ीकरण के मार्ग ने हमारी अर्थव्यवस्था की बहुत अच्छी सेवा की है और हमारा लक्ष्य अगले वर्ष घाटे को 4.5 फीसदी से नीचे लाना है.

कर्ज और जीडीपी का अनुमान
वित्‍तमंत्री ने कहा था कि 2026-27 के बाद से हमारा प्रयास प्रत्येक वर्ष राजकोषीय घाटे को इस तरह रखने का होगा कि केंद्र सरकार का कर्ज, जीडीपी के प्रतिशत के रूप में घटते क्रम पर रहे. यह कठोर वार्षिक राजकोषीय लक्ष्यों के बजाय अधिक पारदर्शी और परिचालन रूप से लचीले राजकोषीय मानकों की ओर बदलाव को प्रोत्साहित करता है. इसे राजकोषीय प्रदर्शन के अधिक विश्वसनीय माप के रूप में भी मान्यता दी गई है, क्योंकि यह पिछले और वर्तमान वित्तीय निर्णयों के मिलेजुले प्रभावों को दर्शाता है.

कितना है देश पर कुल कर्ज
भारत पर कुल कर्ज के आंकड़े देखें तो पता चलता है कि वित्‍तवर्ष 2024-25 तक कुल कर्ज 205 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है. इसमें विदेशी कर्ज की हिस्‍सेदारी करीब 64 लाख करोड़ रुपये की है, जबकि बाकी हिस्‍सा घरेलू कर्ज का है. घरेलू कर्ज में बॉन्‍ड, ट्रेजरी बिल और सिक्‍योरिटीज से जुटाए पैसे आते हैं और दोनों ही तरह के कर्ज को मिलाकर जीडीपी का करीब 57 फीसदी पहुंच गया है.

About the Author

Pramod Kumar Tiwari

प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि...और पढ़ें

Location :

New Delhi,Delhi

First Published :

January 30, 2026, 17:25 IST

homebusiness

इस बार के बजट में सरकार के घाटे से ज्‍यादा कर्ज पर जोर, जीडीपी का 56% पहुंचा

Read Full Article at Source