Last Updated:January 06, 2026, 10:47 IST
SC on Umar Khalid Sharjeel Imam: दिल्ली दंगों से जुड़े 'बड़ी साजिश' मामले में आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने दोनों की जमानत याचिका खारिज करते हुए साफ किया है कि वे कम से कम एक साल तक नई जमानत अर्जी दाखिल नहीं कर पाएंगे. जानें कोर्ट ने इस सख्ती की वजह क्या है...
दिल्ली दंगों से जुड़े 'बड़ी साजिश' मामले में आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है. (फाइल फोटो)दिल्ली में वर्ष 2020 में हुए सांप्रदायिक दंगों से जुड़े ‘बड़ी साजिश’ मामले में आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है. अदालत ने दोनों की जमानत याचिका खारिज करते हुए साफ किया है कि वे कम से कम एक साल तक नई जमानत अर्जी दाखिल नहीं कर पाएंगे. हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि अगर संरक्षित (प्रोटेक्टेड) गवाहों की गवाही इससे पहले पूरी हो जाती है, तो उसके बाद वे दोबारा जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं.
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने सोमवार को कहा कि उमर खालिद और शरजील इमाम के खिलाफ लगाए गए आरोपों की गंभीरता और इस कथित साजिश में उनकी केंद्रीय भूमिका को देखते हुए इस स्तर पर जमानत नहीं दी जा सकती.
पांच आरोपियों को दी जमानत
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इसी मामले में पांच अन्य आरोपियों गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा-उर-रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को जमानत दे दी. कोर्ट ने साफ किया कि अभियोजन पक्ष ने सभी आरोपियों की भूमिका समान नहीं बताई है और इसी आधार पर अलग-अलग निर्णय लिया गया है.
कोर्ट ने कहा कि गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत जमानत पर विचार करते समय प्रत्येक आरोपी की व्यक्तिगत भूमिका का आकलन जरूरी है. दिल्ली पुलिस के मामले में भागीदारी की एक स्पष्ट ‘श्रेणीबद्ध संरचना’ दिखाई देती है. कुछ आरोपियों पर सहायक भूमिका निभाने का आरोप है, जबकि उमर खालिद और शरजील इमाम पर साजिश की रूपरेखा तैयार करने और उसे अंजाम देने में अहम भूमिका निभाने का आरोप लगाया गया है.
उमर खालिद-शरजील इमाम को क्यों नहीं दी बेल?
सुनवाई के दौरान जस्टिस अरविंद कुमार ने कहा, ‘सभी आरोपी एक जैसे नहीं हैं. अभियोजन पक्ष ने सभी को अलग-अलग भूमिकाएं सौंपी हैं.’ इसी आधार पर अदालत ने कहा कि जमानत के स्तर पर उमर खालिद और शरजील इमाम अन्य आरोपियों के बराबरी का दावा नहीं कर सकते. अदालत ने दोनों को यह छूट जरूर दी है कि वे संरक्षित गवाहों की गवाही पूरी होने के बाद या फिर इस फैसले की तारीख से एक साल पूरा होने पर दोबारा जमानत के लिए अर्जी दे सकते हैं.
गुलफिशा फातिमा के वकील ने फैसले के बाद कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने यह माना है कि जिन पांच आरोपियों को जमानत दी गई है, उनकी कथित भूमिका कम स्तर की है. वहीं, उमर खालिद और शरजील इमाम के मामले में अदालत ने दोष या निर्दोष पर टिप्पणी किए बिना, UAPA और संविधान के प्रावधानों को देखते हुए एक साल का समय दिया है, ताकि सभी संरक्षित गवाहों की गवाही दर्ज हो सके. उन्होंने इसे आरोपियों और उनके परिवारों के लिए आंशिक राहत बताया.
गौरतलब है कि उमर खालिद 13 सितंबर 2020 से हिरासत में हैं, जबकि शरजील इमाम 28 जनवरी 2020 से जेल में बंद हैं. सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि UAPA जैसे मामलों में सिर्फ लंबी अवधि तक जेल में रहना अपने आप में जमानत का आधार नहीं बन सकता, अगर अदालत को प्रथम दृष्टया आरोपी के खिलाफ मामला बनता हुआ नजर आता है. वहीं, जिन पांच अन्य आरोपियों को जमानत दी गई है, उन्हें कड़ी शर्तों के साथ रिहा करने का आदेश दिया गया है. कोर्ट ने कहा कि उनकी भूमिका सहायक प्रकृति की बताई गई है, इसलिए वे जमानत के हकदार हैं.
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New Delhi,Delhi
First Published :
January 06, 2026, 10:47 IST

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