क्‍या वंदेभारत स्‍लीपर का स्‍टाफ अलग होगा या सामान्‍य ट्रेन वाले ही होंगे

19 hours ago

Last Updated:January 04, 2026, 11:57 IST

Vande Bharat sleeper train Guwahati to Kolkata - गुवाहाटी-कोलकाता रूट पर पहली स्‍लीपर वंदेभारत ट्रेन जल्‍द ही चलने वाली है. यह ट्रेन मौजूदा वंदेभारत सिटिंग से अलग होगी. क्‍योंकि ओवर नाइट जर्नी सफर होगा. यहां पर सवाल उठता है कि इस ट्रेन का स्‍टाफ, लोको पायलट, टीटी और कैटरिंग स्‍टाफ क्‍या अगल होगा या मेल एक्‍सप्रेस वाला ही होगा? क्‍या किसी स्‍टाफ को अलग ट्रेनिंग दी गयी है. वो कौन सा स्‍टाफ है और किस तरह की ट्रेनिंग दी गयी है? यहां जानें-

क्‍या वंदेभारत स्‍लीपर का स्‍टाफ अलग होगा या सामान्‍य ट्रेन वाले ही होंगेवंदेभारत स्‍लीपर ट्रेन के लोको पायलट समेत अन्‍य स्‍टाफ को खास ट्रेनिंग दी गयी है.

नई दिल्‍ली. देश की पहली स्‍लीपर वंदेभारत ट्रेन इसी महीने शुरू हो जाएगी. इसका रूट गुवाहाटी से कोलकाता होगा. रेलवे मंत्रालय का दावा है कि यह ट्रेन मौजूदा वंदे भारत से भी बेहतर होगी, जिससे यात्रियों को बेहतर सफर का अनुभव मिल सकेगा. अब आम लोगों के मन में यह सवाल भी उठ रहा होगा कि जिस वंदे भारत स्‍लीपर को लेकर बड़े बड़े दावे किए जा रहे है, उसका स्‍टाफ भी अलग होगा, इनको किसी खास तरह की ट्रेनिंग दी जाएगी या फिर दूसरी ट्रेनों जैसा स्‍टाफ होगा. इस संबंध में रेल मंत्रालय ने जवाब दिया है, आप भी जानिए-

रेल मंत्रालय के कार्यकारी निदेशक सूचना और प्रसार दिलीप कुमार ने बताया कि वंदेभारत ट्रेन का स्‍टाफ सामान्‍य ट्रेनों की तुलना में अलग होगा. यानी मेल, एक्‍सप्रेस का स्‍टाफ इस ट्रेन में नहीं होगा. क्‍योंकि सुविधाओं के मामले में यह ट्रेन पूरी तरह से अलग है. इतना ही नहीं लोको पायलट को भी अलग ट्रेनिंग दी गयी है.

चयन का आधार क्‍या है

इस ट्रेन को चलाने के लिए केवल अच्‍छे रिकॉर्ड वाले सीनियर लोको पायलट्स को इसके लिए चुना जाता है, जिसके पास कई सालों का अनुभव  हो और बेहतरीन परफॉर्मेंस रहा हो. उसे ही वंदे भारत सौंपी जाती है. चयन के लिए इसके लिए बाकायदा रेलवे अधिकारियों की टीम बनाई जाती है.

कौन सी ट्रेनिंग दी गयी है

इनको चलाने के लिए लोको पायलट को खास ट्रेनिंग दी जाती है. क्योंकि यह भारत की सबसे आधुनिक, सेमी-हाई स्पीड ट्रेन है, जिसकी स्‍पीड 130 से 180 प्रति घंटे किमी. होती है और यह सेल्फ-प्रोपेल्ड ट्रेनसेट है. वंदे भारत में इंटग्रेटड ड्राइविंग कैब, एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक्स ट्रेन सेट होता है, जिसमें कचव (ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन), ऑटोमैटिक डोर्स, सीसीटीवी और हाई-स्पीड हैंडलिंग की तकनीक शामिल होती है. इन सभी तकनीक के इस्‍तेमाल की ट्रेनिंग लोको पायलट को दी जाती है.

टीटी भी अलग होंंगे क्‍या

जी हां, इस ट्रेन में चलने वाली टीटी भी अलग होंगे, जो टीटी मेल या एक्‍सप्रेस में चलते हैं, उन्‍हें यह ट्रेन नहीं दी जाएगी, राजधानी, तेजस जैसी प्रीमियम ट्रेनों में चलने वाले टीटी को ही वंदेभारत स्‍लीपर में जांच के लिए तैनात किया जाएगा.

क्‍या कैटरिंग स्‍टाफ भी अलग होगा

इस वंदेभारत में कैटरिंग स्‍टाफ भी थोड़ा अलग होगा. क्‍योंकि इस ट्रेन में एक तरफ असम का खाना और दूसरी तरफ पश्चिमी बंगाल का खाना दिया जाएगा, जो बिल्‍कुल नया प्रयोग है.  इस ट्रेन में सवार होने वाले कैटरिंग स्‍टाफ को मेन्‍यू की ट्रेनिंग दी जाएगी. कोशिश होगी इसमें उन कैटरिंग स्‍टाफ को लगाया जाएगा जो बंगाल या असमी भाषा आती हो, जिससे पैसेंजर की बात आसानी से समझ लें. इस ट्रेन में चलने वाला कैटरिंग स्‍टाफ दूसरी प्रीमियम ट्रेनों के मुकाबले अधिक एक्टिव रहेगा. क्‍योंकि यह देश की पहली स्‍लीपर वंदेभारत है. यात्रियों को किसी भी तरह की शिकायत का मौका न मिले.

Location :

New Delhi,New Delhi,Delhi

First Published :

January 04, 2026, 11:57 IST

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क्‍या वंदेभारत स्‍लीपर का स्‍टाफ अलग होगा या सामान्‍य ट्रेन वाले ही होंगे

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