'जनरल' कैटगरी पर SC/ST/OBC का भी हक! SC ने खारिज की 'डबल बेनिफिट' की दलील

4 weeks ago

Last Updated:January 05, 2026, 07:42 IST

Supreme Court News: सरकारी नौकरी में आरक्षण हमेशा बहस का मुद्दा रहा है. बहस का मुद्दा ये भी होता है कि जब कोई रिजर्व कैटेगरी का बच्चा जनरल कैटेगरी के बराबर नंबर लाता है तो क्या उसे जनरल या फिर रिजर्व कैटेगरी में रखा जाएगा. सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे पर याचिका दाखिल की गई थी. साथ ही इसे 'डबल बेनिफिट' बता कर शीर्ष कोर्ट में बहस भी हुई. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने 1992 के इंद्रा साहनी केस का हवाला देते हुए रिजेक्ट कर दिया और अपने फैसले में कहा कि रिजर्व कैटेगरी के उम्मीदवार जनरल कोटा में सीट हासिल कर सकता है.

'जनरल' कैटगरी पर SC/ST/OBC का भी हक! SC ने खारिज की 'डबल बेनिफिट' की दलीलसुप्रीम कोर्ट का सरकारी नौकरी में रिजर्वेशन वाले सीट में सेलेक्शन को लेकर फैसला आया है. (फाइल फोटो)

Supreme Court On Reservation Category and General Category: सरकारी नौकरियों में आरक्षण और मेरिट को लेकर चल रही लंबी बहस पर सुप्रीम कोर्ट ने पूर्णविराम लगा दिया है. शीर्ष अदालत ने एक ऐतिहासिक और दूरगामी फैसला सुनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि आरक्षित वर्ग (SC, ST, OBC और EWS) के उम्मीदवार भी सामान्य श्रेणी (General Category) की सीटों पर नौकरी पाने के हकदार हैं, बशर्ते वे मेरिट में जनरल कैटेगरी के ‘कटऑफ’ (Cutoff) अंक हासिल करें. यह फैसला न केवल आरक्षित वर्ग के मेधावी छात्रों के लिए बड़ी जीत है, बल्कि यह सामान्य श्रेणी की सीटों की परिभाषा को भी नए सिरे से तय करता है.

यह मामला राजस्थान हाईकोर्ट की एक भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा था. राजस्थान हाईकोर्ट ने कुछ पदों के लिए भर्ती निकाली थी, जिसमें उन्होंने एक नियम बनाया था कि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सामान्य श्रेणी की सीटों पर नियुक्ति नहीं दी जाएगी, भले ही उनके नंबर जनरल कटऑफ से ज्यादा क्यों न हों. हाईकोर्ट का तर्क था कि अगर आरक्षित वर्ग को जनरल सीट दी गई, तो यह उन्हें डबल बेनिफिट (Double Benefit) देने जैसा होगा- पहला आरक्षण का और दूसरा सामान्य सीट का.

सुप्रीम कोर्ट ने खारिज किया दलील

सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया. जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जी मसीह की पीठ ने राजस्थान हाईकोर्ट की याचिका को रद्द करते हुए कहा कि मेरिट का सम्मान होना चाहिए.

‘ओपन’ का मतलब सबके लिए

सुप्रीम कोर्ट ने 1992 के ऐतिहासिक इंदिरा साहनी फैसले का हवाला दिया. जस्टिस दत्ता ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, ‘हम यह मानते हैं कि ‘ओपन’ (Open) शब्द का मतलब सिर्फ खुला होता है. यानी जो सीटें ओपन कैटेगरी के तहत भरी जानी हैं, वे किसी विशेष जाति या वर्ग की जागीर नहीं हैं. वे सभी के लिए हैं.’ कोर्ट ने साफ किया कि आरक्षण की उपलब्धता किसी मेधावी आरक्षित उम्मीदवार को अनारक्षित (Unreserved) सीट पर मेरिट के आधार पर चुने जाने से नहीं रोक सकती.

कैसे लागू होगा यह नियम?

सुप्रीम कोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया को लेकर स्थिति एकदम साफ कर दी है:-

लिखित परीक्षा: यदि कोई आरक्षित वर्ग (SC/ST/OBC) का उम्मीदवार लिखित परीक्षा में जनरल कैटेगरी के कटऑफ से अधिक अंक लाता है, तो इंटरव्यू के समय उसे ‘जनरल कैटेगरी’ का उम्मीदवार माना जाएगा. फाइनल मेरिट: अगर फाइनल रिजल्ट में उसके कुल अंक जनरल कैटेगरी के कटऑफ से कम रह जाते हैं, तब उसे वापस उसकी मूल आरक्षित श्रेणी (Reserved Category) में गिना जाएगा ताकि उसे आरक्षण का लाभ मिल सके.

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Deep Raj Deepak

दीप राज दीपक 2022 में न्यूज़18 से जुड़े. वर्तमान में होम पेज पर कार्यरत. राजनीति और समसामयिक मामलों, सामाजिक, विज्ञान, शोध और वायरल खबरों में रुचि. क्रिकेट और मनोरंजन जगत की खबरों में भी दिलचस्पी. बनारस हिंदू व...और पढ़ें

Location :

New Delhi,Delhi

First Published :

January 05, 2026, 07:42 IST

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