Last Updated:August 07, 2025, 12:05 IST
Vande Bharat Express and Steam Engine- उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शशि किरण के अनुसार चंडीगढ़ अजमेर वंदेभारत अपने रूटीन सफर पर थी. वहीं, रेवाड़ी में भाप इंजन दूसरे ट्रैक पर आ गया.

नई दिल्ली. देश में सबसे तेज दौड़ने वाली सेमी बुलेट ट्रेन यानी वंदेभारत एक्सप्रेस है. यह ट्रेन 160 किमी. प्रति घंटे की स्पीड से दौड़ती है.इस तरह राजधानी, शताब्दी और तेजस से भी दौड़ने वाली ट्रेन का सामना भाप से चलने वाली ट्रेन से हो गया. दोनों ट्रेनें काफी तेज रफ्तार से अगल-बगल ट्रैक पर दौड़ रहीं है. हर कोई इस शानदार नजारे को कैमरे में कैद करना चाह रहा था. कौन सी ट्रेन लोगों की पसंदीदा रही, जानकर आप चौंक जाएंगे.
मौजूदा समय यात्रियों की सबसे पसंदीदा ट्रेन वंदेभारत बन चुकी है. यही वजह है कि 144 वंदेभारत सर्विस शुरू हो चुकी है और 6 सर्विस 10 अगस्त को शुरू हो रही हैं. इस तरह 150 सर्विस यानी 75 वंदेभारत ट्रेन 15 अगस्त तक शुरू हो जाएंगी. लेकिन अगर इस आधुनिक ट्रेन का सामना भाप वाले इंजन से हो तो नजारा भी गजब रहा होगा. दोनों ट्रेन अगल बगल ट्रैक पर दौड़ रही थीं. ऐसा ही नजारा हरियाणा के रेवाड़ी में लोगों को देखने को मिला.
आइए जानते हैं पूरा मामला
उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शशि किरण के अनुसार चंडीगढ़ अजमेर वंदेभारत अपने रूटीन सफर पर थी. वहीं रेवाड़ी में भाप इंजन का लोको शेड है. वंदेभारत डीगढ़ से चलने के बाद तीन स्टेशन अंबाला कैंट, दिल्ली कैंट और गुरुग्राम पार करने के बाद जब रेवाड़ी जंक्शन के पास पहुंची तो दूसरी ओर से भाप वाला इंजन आ रहा था. हालांकि इसका रूटीन सफर नहीं था. इस नजारे को आसपास खड़े लोग कैमरें में कैद करने का उतावले हो गए. एक ट्रैक पर वंदेभारत और दूसरे पर भाप वाला इंजन. दोनों अगल-बगल ट्रैक पर दौड़े. यह अद्भुत नजारा यात्री और लोग देखते रहे.
कौन रहा अव्वल!
भले ही यात्रियों की पसंदीदा ट्रेन वंदेभारत हो, लेकिन भाप वाले इंजन के आगे उसकी चमक फीकी पड़ गयी. आसपास खड़े लोग भाप वाले इंजन की फोटो और वीडियो बनाते रहे. जब तक इंजन दिखना बंद नहीं हो गया. लोगों का मानना है कि वंदेभारत तो देश के तमाम बड़े शहरों से होकर गुजरती हैं, लेकिन भाप वाला इंजन कम ही देखने को मिलता है. इसी वजह से इस इंजन की फोटो और वीडियो लोग बना रहे थे.
रेवाड़ी इस्टीम इंजन लोको शेड
रेवाड़ी इस्टीम इंजन लोको शेड देश की अनोखी धरोहर है. जो 1893 में बना था. आपको यह जानकर आश्वर्य होगा कि लंबे समय तक उत्तर भारत का एकमात्र इस्टीम लोको मोटिव शेड रहा. 1990 के दशक में भाव वाले इंजनों का चलना बंद हो गया. 1994 में मीटर गेज ट्रैक पर इस्टीम ट्रैक्शन समाप्त हो गया. इस लोको शेड में 11 इंजन संरक्षित करके रखे गए हैं.
First Published :
August 07, 2025, 12:05 IST