Sameer kumar das killed bangladesh: बांग्लादेश में हिंदुओं के नरसंहार के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. कट्टरंपथियों ने एक हिंदू ऑटो ड्राइवर को बड़ी बेरहमी से मार डाला. आपको बताते चलें कि बीते करीब 30 दिनों में किसी हिंदू की हत्या का आंकड़ा 10 के पार हो गया है. कत्ल के इस खौफनाक केस में 11 जनवरी की रात को डागनभुइयां इलाके में समीर कुमार दास को पीट-पीटकर मार दिया. रिपोर्ट्स के मुताबिक समीर दास की खून से लथपथ बॉडी एक अस्पताल के पास मिली. हत्या के बाद आरोपी उसका ऑटो-रिक्शा लेकर फरार हो गए.
'कोल्ड ब्लडेड मर्डर'
हैरानी की बात यह है कि समीर के शव से कोई भी कीमती सामान गायब नहीं था. रिपोर्ट्स से पता चलता है कि हत्यारे उसका मोबाइल, कैश और सोने की चेन नहीं ले गए, जिससे लूटपाट का मकसद खारिज होता है. इस तरह ये एक कोल्ड ब्लडेड मर्डर यानी एक सोची-समझी हत्या की ओर इशारा करता है. वहीं घटना के कई दिन बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है. इससे हिंदुओं की बस्ती में भय का माहौल है.
हैवानियत थम नहीं रही
जैसे-जैसे बांग्लादेश में 13वें राष्ट्रीय संसदीय चुनाव की तारीख नज़दीक आ रही है, सांप्रदायिक हिंसा खतरनाक तरीकों से बढ़ती जा रही है. अकेले दिसंबर में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा और हत्याओं की कुल 51 हिंसक घटनाएं रिपोर्ट की गईं हैं. राजधानी ढाका, चटगांव समेत कई शहरों से हिंदुओं पर हमले और हत्याओं के मामले सामने आ रहे हैं. हिंदू संगठनों की बात करें तो दीपू चंद्र दास, अमृत मंडल, बजेंद्र बिस्वास और खोकन चंद्र दास की हत्याओं ने लोगों को डरा दिया है. वो अपनी हिंदू पहचान छिपाकर रह रहे हैं.
बांग्लादेश में अकेले दिसंबर में हिंदुओं के मर्डर के 10, लूट, आगजनी, पथराव और जमीन पर कब्जों के अनगिनत मामले सामने आ चुके हैं. हिंदुओं पर हुए अत्याचारों की कहानी सुनकर किसी भी संवेदनशील इंसान का दिल दहल जाएगा.
डबल डिजिट में पहुंचा हिंदुओं की हत्या का आंकड़ा
बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद ने एक बयान में कहा है कि अकेले दिसंबर में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा के 51 मामले सामने आए हैं. इनमें 10 केस हत्या के हैं. वहीं चोरी और डकैती के 10 मामले, घरों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, मंदिरों और जमीन पर कब्जे, लूटपाट और आगजनी की 23 घटनाएं सामने आई हैं. हिंदुओं के धार्मिक उत्पीड़न की बात करें तो ईश निंदा और भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ के एजेंट होने जैसे झूठे आरोपों में गिरफ्तारी और यातना के चार मामले सामने आए हैं, हिंदू महिलाओं को भी उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है. बलात्कार करने की कोशिश और शारीरिक हमले के कई केस सामने आए हैं.
हिंसा का ये दौर नए साल यानी जनवरी के दूसरे हफ्ते में भी जारी है. ऐसे ही एक हाईप्रोफाइल मर्डर की बात करें को पिछले हफ्ते एक अखबार के एक्जिक्यूटिव एडिटर राणा प्रताप बैरागी की हत्या कर दी गई थी.
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के आका मोहम्मद यूनुस की सरकार हिंदुओं के नरसंहार पर चुप्पी साधे बैठी है. यूनुस प्रशासन के कान में जूं तक नहीं रेंग रही है. शेख हसीना के निर्वासन और तख्तापलट के बाद अबतक अंतरिम सरकार के कार्यकाल में सूत्रों के हवाले से आई जानकारी के मुताबिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की 2900 से ज्यादा मामले सामने आए हैं. जिनमें हत्या, आगजनी, जमीन पर कब्जे तक के मामलों का जिक्र है. इनमें से एक भी अपराधिक मामले को सिर्फ मीडिया की बढ़ा-चढ़ाकर बताई गई बातें या राजनीतिक हिंसा कहकर मोहम्मद यूनुस खारिज नहीं कर सकते हैं. बता दें कि ये सिर्फ कैमरे पर रिकॉर्ड हुए मामले हैं. हिंदुओं के उत्पीड़न का आंकड़ा इससे ज्यादा हो सकता है, संभव है कि कुछ पीड़ितों ने कट्टरपंथियों के डर के मारे शिकायत न की हो.

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