Last Updated:February 06, 2026, 07:44 IST
Manipur Churachandpur Protests: मणिपुर के चुराचांदपुर जिले में नई सरकार के गठन को लेकर विरोध प्रदर्शन भड़क गया है. कुकी समुदाय के नेताओं को सरकार में शामिल किए जाने से विवाद बढ़ गया है. प्रदर्शनकारियों ने सड़कें जाम कीं और सुरक्षा बलों से झड़प हुई. प्रशासन ने हालात को नियंत्रण में रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए हैं.

Manipur Churachandpur Protests: मणिपुर एक बार फिर अशांति की आग में झुलसता नजर आ रहा है. राज्य के चुराचांदपुर जिले में नई सरकार के गठन को लेकर तनाव अचानक भड़क गया. गुरुवार शाम तुइबोंग बाजार इलाके में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए. प्रदर्शनकारियों ने नई सरकार के खिलाफ नारेबाजी की. टायर और लकड़ियां जलाकर सड़कें जाम करने की कोशिश की गई. हालात तेजी से बिगड़ते चले गए. सुरक्षा बलों को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सख्ती करनी पड़ी. इस दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़प भी हुई. पूरे इलाके में डर और अनिश्चितता का माहौल बन गया है.
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार दरअसल राज्य में नई सरकार के गठन और कुकी समुदाय के नेताओं को सरकार में शामिल किए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. खास तौर पर बीजेपी विधायक नेमचा किपगेन को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने से कुकी संगठनों और स्थानीय लोगों के बीच मतभेद बढ़ गए हैं. समुदाय का कहना है कि उनकी लंबे समय से अलग प्रशासन की मांग को नजरअंदाज किया गया है. इसी वजह से लोगों का गुस्सा सड़कों पर दिखाई दे रहा है. प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है.
नई सरकार के गठन से क्यों बढ़ा विवाद
मणिपुर में बीजेपी नेता युमनाम खेमचंद सिंह ने हाल ही में राज्य के 13वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है. पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के लगभग एक साल बाद नई सरकार बनी है. इस सरकार में कुकी समुदाय से आने वाली बीजेपी विधायक नेमचा किपगेन और नगा पीपुल्स फ्रंट के विधायक एल. दिखो को उपमुख्यमंत्री बनाया गया है. इसी फैसले के बाद चुराचांदपुर और कांगपोकपी जैसे कुकी बहुल इलाकों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है. चुराचांदपुर जिले में आदिवासी संगठन जॉइंट फोरम ऑफ सेवन (JF-7) ने पूर्ण बंद का ऐलान किया है. संगठन ने समुदाय से लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने की अपील की है. साथ ही अलग कुकी प्रशासन की मांग को फिर से दोहराया गया है. संगठन का कहना है कि यदि कोई विधायक सामूहिक फैसले के खिलाफ जाकर सरकार में शामिल होता है तो उसकी जिम्मेदारी व्यक्तिगत होगी. कांगपोकपी जिले में भी प्रदर्शनकारियों ने टायर जलाकर और सड़क पर अवरोध लगाकर विरोध दर्ज कराया. नेमचा किपगेन के उपमुख्यमंत्री बनने के खिलाफ कई जगह प्रदर्शन हुए. स्थानीय संगठनों और कुछ उग्रवादी समूहों ने भी कुकी विधायकों को सरकार में शामिल न होने की चेतावनी दी है. इससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है.(फोटो PTI)
सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासन की चुनौती
प्रदर्शन के दौरान कई जगह सुरक्षा बलों पर पथराव किया गया. स्थिति नियंत्रण से बाहर जाती देख पुलिस ने लाठीचार्ज किया. इस झड़प में दो लोगों के घायल होने की खबर सामने आई है. प्रशासन का कहना है कि फिलहाल किसी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन हालात संवेदनशील बने हुए हैं. अतिरिक्त सुरक्षाबलों को तैनात किया गया है और पूरे क्षेत्र की निगरानी की जा रही है.
मणिपुर में पहले से जारी है जातीय तनाव
मणिपुर में 3 मई 2023 से जातीय हिंसा का दौर जारी है. हिंसा की शुरुआत आदिवासी एकजुटता रैली के बाद हुई थी. यह रैली मैइती समुदाय को एसटी दर्जा देने की मांग के विरोध में निकाली गई थी. तब से राज्य के कई जिलों में समुदायों के बीच अविश्वास बना हुआ है. नई सरकार के गठन ने पुराने विवादों को फिर हवा दे दी है.चुराचांदपुर में विरोध प्रदर्शन क्यों भड़का?
चुराचांदपुर में विरोध प्रदर्शन नई सरकार के गठन और कुकी नेताओं को प्रशासन में शामिल किए जाने के कारण भड़का. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उनकी अलग प्रशासन की मांग को नजरअंदाज किया गया है. खास तौर पर नेमचा किपगेन को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने के फैसले से समुदाय के भीतर मतभेद बढ़ गए हैं.
प्रदर्शन के दौरान क्या स्थिति बनी?
प्रदर्शनकारियों ने सड़कें जाम करने के लिए टायर और लकड़ियां जलाईं. सुरक्षा बलों पर पथराव भी किया गया. भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा. इस झड़प में दो लोगों को मामूली चोटें आईं. प्रशासन ने अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर हालात पर नियंत्रण करने की कोशिश की है.
मणिपुर में जातीय तनाव की पृष्ठभूमि क्या है?
मणिपुर में 2023 से मैइती और कुकी समुदायों के बीच तनाव बना हुआ है. मैइती समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग के विरोध में आदिवासी समूहों ने आंदोलन शुरू किया था. इसके बाद कई इलाकों में हिंसा और टकराव की घटनाएं सामने आईं. अब नई सरकार के गठन ने इस तनाव को फिर बढ़ा दिया है.
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सुमित कुमार News18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 3 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. News18 हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह...और पढ़ें
First Published :
February 06, 2026, 07:44 IST

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