Last Updated:November 29, 2025, 19:27 IST
S Jaishankar News: एस. जयशंकर ने आईआईएम-कलकत्ता में कहा कि आज राजनीति अर्थव्यवस्था पर हावी है. उन्होंने कहा कि चीन अपने नियमों पर चलता है और भारत आत्मनिर्भरता व विज्ञान में तेज़ी से प्रगति कर रहा है. आज आर्थिक नीतियों पर राजनीतिक प्रभाव अत्यधिक बढ़ चुका है. सरकारें विकास का एजेंडा तय करते समय राजनीतिक प्राथमिकताओं को प्राथमिकता दे रही हैं.
आईआईएम-कलकत्ता में विदेश मंत्री जयशंकर को 'डॉक्टरेट' की मानद उपाधि दी गई.कोलकाता. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को कहा कि मौजूदा समय में राजनीति अर्थव्यवस्था पर तेजी से हावी होती जा रही है. जयशंकर यहां आईआईएम-कलकत्ता के परिसर में ‘डॉक्टरेट’ की मानद उपाधि मिलने के बाद सभा को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा, ‘यह एक ऐसा दौर है जिसमें राजनीति, अर्थव्यवस्था पर हावी होती जा रही है… और यह कोई मजाक की बात नहीं है.’ जयशंकर ने यह भी कहा कि चीन ने ‘लंबे समय तक अपने ही नियमों के अनुसार चीजें की है’ और वह अब भी ऐसा ही कर रहा है. विदेश मंत्री ने कहा कि इस परिस्थिति में, अन्य देश इस बात को लेकर अस्पष्ट हैं कि दिख रही प्रतिस्पर्धा या सौदेबाजी पर ध्यान देना चाहिये या नहीं.
जयशंकर ने कहा, ‘वैश्विकरण, विखंडन और आपूर्ति की कमी के ऐसे दबावों और तनावों का सामना करते हुए शेष विश्व अचानक पेश आने वाली सभी मुश्किलों से बचने के लिए खुद को तैयार कर रहा है.’ उन्होंने कहा कि भारत सक्रिय रूप से आत्मनिर्भर बनने की कोशिश कर रहा है और खुद को उद्योगों के लिए एक विनिर्माण केंद्र बना रहा है. उन्होंने कहा कि भारत आधारभूत ढांचा के साथ-साथ विज्ञान के क्षेत्र में भी तेजी से तरक्की कर रहा है.
भारत की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में अर्थव्यवस्था और राजनीति का टकराव स्पष्ट दिखाई देता है. वैश्विक अनिश्चितता, भू-रणनीतिक तनाव और बदलते आर्थिक समीकरणों के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर द्वारा आत्मनिर्भर भारत पर दिया गया जोर एक महत्वपूर्ण संदेश देता है – भारत अब केवल वैश्विक सप्लाई चेन का हिस्सा नहीं बनना चाहता, बल्कि उसके केंद्र में अपनी निर्णायक भूमिका स्थापित करना चाहता है.
आज आर्थिक नीतियों पर राजनीतिक प्रभाव अत्यधिक बढ़ चुका है. सरकारें विकास का एजेंडा तय करते समय राजनीतिक प्राथमिकताओं को प्राथमिकता दे रही हैं. परिणामस्वरूप, अर्थव्यवस्था की वास्तविक चुनौतियाँ—रोजगार, महंगाई, विदेशी निवेश, MSME की स्थिति – इन सबकी चर्चा कई बार राजनीतिक विमर्श के शोर में दब जाती है. ऐसे समय में जयशंकर का बयान बताता है कि भारत वैश्विक राजनीति में उभरते जोखिमों को पहचान चुका है और अब आर्थिक मजबूती के लिए बाहरी निर्भरता कम करने की दिशा में निर्णायक कदम उठा रहा है.
आत्मनिर्भर भारत, दरअसल, केवल ‘देश में उत्पादन’ का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह एक रणनीतिक आर्थिक ढांचा है, जिसमें रक्षा, तकनीक, ऊर्जा, दवाइयाँ, इलेक्ट्रॉनिक्स और सप्लाई चेन की स्वतंत्रता शामिल है. जयशंकर कई बार कह चुके हैं कि आने वाले वर्षों में दुनिया de-risking की दिशा में आगे बढ़ेगी. इसका अर्थ है कि बड़ी अर्थव्यवस्थाएँ चीन-केंद्रित निर्भरता से हटकर विविध देशों में निवेश बांटेंगी. यह स्थिति भारत के लिए अवसर भी है और चुनौती भी.
राजनीति और अर्थव्यवस्था का यह टकराव तब और गहरा हो जाता है जब वैश्विक नीतियाँ घरेलू चुनावी गणित से प्रभावित होने लगती हैं. यही कारण है कि जयशंकर जोर देते हैं कि भारत को अपनी नीतियों को “वैश्विक राजनीति से प्रभावित” होने के बजाय “रणनीतिक रूप से स्वतंत्र” बनाना होगा. कुल मिलाकर, जयशंकर का संदेश साफ है – यदि भारत को वैश्विक आर्थिक शक्ति बनना है, तो राजनीतिक विमर्श से ऊपर उठकर, दीर्घकालिक आर्थिक रणनीति अपनानी होगी और आत्मनिर्भरता को राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ जोड़कर देखना होगा.
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राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h...और पढ़ें
Location :
Kolkata,West Bengal
First Published :
November 29, 2025, 19:21 IST

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