वेनेजुएला में तेजी से बदले हालात के बीच भारत ने सतर्क रुख अपनाते हुए अपने नागरिकों के लिए अहम एडवाइजरी जारी की है. यह एडवाइजरी ऐसे समय आई है जब अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को गिरफ्तार कर न्यूयॉर्क ले आए.
अमेरिकी डेल्टा फोर्स ने शनिवार को रातोंरात वेनेजुएला की राजधानी काराकस में राष्ट्रपति पैलेस पर छापा मारा, जहां मादुरो अपनी पत्नी के साथ सो रहे थे. अमेरिकी सैनिकों ने मादुरो के बेडरूम का दरवाजा तोड़ा और उन्हें उनकी पत्नी के साथ पकड़कर हेलीकॉप्टर से अमेरिकी युद्धपोत USS Iwo Jima पर ले आए. यह पूरी कार्रवाई ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिज़ॉल्व’ के तहत की गई, जिसमें 150 से ज्यादा विमान शामिल थे.
मदुरो का अब क्या होगा?
मदुरो को फिर रविवार सुबह (भारतीय समय) अमेरिका के न्यूयॉर्क लाया गया, जहां उन पर नार्को-टेररिज्म के आरोपों में फेडरल कोर्ट में मुकदमा चलेगा. मादुरो पर अमेरिका ने 5 करोड़ डॉलर का इनाम घोषित कर रखा था. सोमवार को शुरुआती सुनवाई के लिए कोर्ट में पेश होने की उम्मीद है.
अमेरिकी अटॉर्नी जनरल के अनुसार मादुरो और उनकी पत्नी पर नार्को-टेररिज्म, कोकीन आयात करने की साजिश और हथियारों के कब्जे का आरोप है. साल 2020 में दायर आरोपों में उन पर ड्रग गिरोह ‘कार्टेल दे लॉस सोलेस’ का नेतृत्व करने का भी आरोप है.
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि मुकदमा न्यूयॉर्क से मियामी भी भेजा जा सकता है, जहां अमेरिका में रहने वाले वेनेजुएला वासियों की बड़ी संख्या है. मादुरो की गिरफ्तारी की खबर पर वहां खुशी का माहौल देखा गया.
भारतीय विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
इस पूरे घटनाक्रम पर भारत की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर फिलहाल सबकी नजरें टिकी हैं. अब तक नई दिल्ली ने इस मामले पर कोई सीधी टिप्पणी नहीं की है, लेकिन भारत का रुख अक्सर अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभुता और संवाद के सिद्धांतों पर आधारित रहा है.
इस बीच विदेश मंत्रालय (MEA) ने शनिवार को एडवाइजरी जारी करते हुए कहा कि भारतीय नागरिक वेनेजुएला की सभी गैर-जरूरी यात्राओं से फिलहाल बचें. इसके साथ ही वहां पहले से मौजूद भारतीयों को विशेष सतर्कता बरतने, अपनी गतिविधियों को सीमित रखने और कराकस स्थित भारतीय दूतावास के साथ लगातार संपर्क में रहने की सलाह दी गई है. मंत्रालय ने हालांकि एडवाइजरी जारी करने के पीछे किसी एक विशेष कारण का जिक्र नहीं किया, लेकिन मौजूदा हालात और तेजी से बदलती राजनीतिक स्थिति को देखते हुए इसे एहतियाती कदम माना जा रहा है.
उधर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इस मुद्दे पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का लगातार उल्लंघन हो रहा है और आज के दौर में ‘माइट इज राइट’ यानी ताकत ही सही का सिद्धांत हावी हो गया है. उनका यह बयान वैश्विक स्तर पर बढ़ते सैन्य हस्तक्षेप और एकतरफा कार्रवाइयों की ओर इशारा करता है.
ईरान पर क्या थी प्रतिक्रिया?
अगर भारत के पिछले रुख को देखा जाए, तो ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी हमले के समय भी नई दिल्ली ने बेहद संतुलित और सतर्क प्रतिक्रिया दी थी. साल 2025 में जब ट्रंप प्रशासन ने ईरान के तीन प्रमुख परमाणु ठिकानों फोर्डो, नतांज और इस्फहान पर हवाई हमले किए, तो भारत ने तत्काल डी-एस्केलेशन यानी तनाव कम करने की अपील की थी.
उस वक्त भारत ने किसी भी सैन्य कार्रवाई से क्षेत्रीय स्थिरता को खतरा बताए बिना, सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव कम करने और कूटनीति के रास्ते पर लौटने की अपील की थी. भारत ने स्पष्ट किया था कि पश्चिम एशिया जैसे संवेदनशील क्षेत्र में सैन्य टकराव वैश्विक शांति और ऊर्जा सुरक्षा के लिए नुकसानदेह हो सकता है.
ऐसे में माना जा रहा है कि वेनेजुएला मामले में भी भारत सीधे तौर पर किसी पक्ष में खड़े होने के बजाय अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभुता के सम्मान और बातचीत के जरिए समाधान की वकालत कर सकता है. फिलहाल भारत की प्राथमिकता वेनेजुएला में फंसे अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, जिसके लिए विदेश मंत्रालय लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है.

18 hours ago
