Britain News: दुनियाभर के देश अपनी सैन्य क्षमता बढ़ाने में लगे हुए हैं. इसी ब्रिटेन ने नॉर्वे को युद्धपोत देने के लिए एक बड़ा सौदा हासिल किया है. यह सौदा 10 अरब पाउंड (लगभग 13.5 अरब डॉलर) में हासिल किया है. इसके तहत ब्रिटेन नॉर्वे को पांच टाइप 26 फ्रिगेट युद्धपोत देगा, यह ब्रिटेन के लिए अबतक का सबसे बड़ा सौदा है जबकि नॉर्वे के लिए सबसे बड़ा रक्षा निवेश है. इसे लेकर ब्रिटेन के पीएम ने क्या कुछ कहा है आइए जानते हैं.
क्या बोले ब्रिटिश पीएम
11,71,26,60,00,000 रुपए के इस सौदे को लेकर बोलते हुए ब्रिटेन के पीएम कीर स्टार्मर ने कहा कि यह समझौता विकास को काफी ज्यादा बढ़ावा देगा, इसके अलावा ब्रिटेन, नॉर्वे और नाटो की सुरक्षा को मजबूत करेगा. साथ ही साथ बड़ी संख्या में लोगों को नौकरियां देगा. बता दें कि इस सौदे के तक साल 20230 तक ब्रिटेन में करीब 4000 लोगों को रोजगार मिलेगा, जिसमें ग्लासगो के बीएई सिस्टम्स शिपयार्ड में 2,000 से ज़्यादा नौकरियां शामिल हैं, यहां पर जहाज बनाए जाएंगे, इसके अलावा ये 400 से ज्यादा ब्रिटिश कंपनियों को भी काफी ज्यादा फायदा पहुंचाएगा. कुल मिलाकर ये सौदा मील का पत्थर साबित हो सकता है.
नॉर्वे के पीएम ने कही ये बात
जबकि नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोरे ने कहा कि यह साझेदारी दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को काफी ज्यादा मजबूत करेगी. उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने दो सवालों पर विचार किया था, पहला- हमारा सबसे रणनीतिक साझेदार कौन है? और सबसे बेहतरीन फ्रिगेट किसने बनाए हैं? दोनों का जवाब यूनाइटेड किंगडम मिला.
क्यों खास हैं ये युद्धपोत
बता दें कि टाइप 26 फ्रिगेट युद्धपोत को पनडुब्बियों का पता लगाने और जरूरत पड़ने पर उनसे युद्ध करने के लिए डिजाइन किया गया है. ये जहाज रॉयल नेवी के फ्रिगेट जैसे ही होंगे, इसे ग्लासगो के गोवन शिपयार्ड के द्वारा बनाया गया है, जहां पर पहले से ही टाइप 26 फ्रिगेट पहले से बन रहे हैं. बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक इनकी डिलीवरी साल 2030 से शुरू होगी. एक तरफ जहां पर इस सौदे को लेकर दोनों देशों में उत्साह का माहौल है वहीं दूसरी तरफ कुछ लोगों ने इसकी आलोचना भी की है.
किसने की आलोचना
इस सौदे की नौसेना कप्तान टोर इवर स्ट्रोमेन ने आलोचना की है. उन्होंने कहा कि फ्रांसीसी और जर्मन फ्रिगेट की वायु रक्षा प्रणाली बेहतर है, इसके बावजूद भी ये सौदा जर्मनी, अमेरिका, फ्रांस को न देकर ब्रिटेन का देना अपने आप में आश्चर्य की बात है. जिसे नॉर्वे ने भी विकल्प के रूप में देखा था.