Last Updated:January 02, 2026, 10:36 IST
DRDO Defence Deal: देश की रक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने में DRDO का बड़ा योगदान रहा है. अपने 68 साल के इतिहास में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं. साल 2025 DRDO के लिए ऐतिहासिक रहा है. DRDO को 1.30 लाख करोड़ की डील करने में सफलता हासिल की है. यह एक साल में अभी तक का सर्वाधिक आंकड़ा है. डिफेंस सेक्टर में भारत ग्लोबल पावर बनता जा रहा है. DRDO के वैज्ञानिकों का ही कमाल है कि भारत आज के दिन डिफेंस इक्विपमेंट एक्सपोर्टर बन गया है.
DRDO Defence Deal: रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के लिए साल 2025 ऐतिहासिक रहा है. (फोटो: PTI)DRDO Defence Deal: नेशनल सिक्योरिटी सिस्टम में व्यापक बदलाव लाकर भारत को ग्लोबल लेवल पर पहली पंक्ति में लाने का काफी श्रेय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) को जाता है. फाइटर जेट, बैलिस्टिक-क्रूज मिसाइल, एयर डिफेंस सिस्टम आदि को डेवलप करने में DRDO का अहम रोल रहा है. साल 2025 DRDO के लिए महत्वपूर्ण रहा है. प्रीमियम डिफेंस ऑर्गेनाइजेशन ने सवा लाख करोड़ रुपये से ज्यादा मूल्य की स्वदेशी प्रणालियों (indigenous defence system) के लिए रिकॉर्ड मंजूरियां हासिल की हैं. डीआरडीओ के चेयरमैन और रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव समीर वी. कामत ने कहा कि DRDO के प्रयासों ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को ‘क्वांटम जंप’ यानी अभूतपूर्व गति दी है. भारत अब एयर डिफेंस सिस्टम से लेकर आर्टिलरी और मिसाइल तक एक्सपोर्ट कर रहा है.
DRDO की 68वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कामत ने बताया कि सरकार ने वर्ष 2025 में लगभग 1.30 लाख करोड़ रुपये मूल्य की 22 स्वदेशी रक्षा प्रणालियों के लिए ‘एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी’ (AoN) प्रदान की है. यह किसी एक वर्ष में दी गई सबसे अधिक मंजूरी है. ये सभी प्रणालियां भारतीय उद्योगों द्वारा निर्मित की जाएंगी, जिससे देश की रक्षा उत्पादन क्षमता को बड़ा बढ़ावा मिलेगा. DRDO द्वारा विकसित जिन प्रमुख सिस्टम्स को AoN मिली है, उनमें इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस वेपन सिस्टम (IADWS), कन्वेंशनल बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम, क्विक रिएक्शन सरफेस टू एयर मिसाइल सिस्टम ‘अनंत शास्त्र’, लंबी दूरी की हवा से सतह पर मार करने वाली सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल (LRASSCM), इंटीग्रेटेड ड्रोन डिटेक्शन एंड इंटरडिक्शन सिस्टम (IDDIS) MK-II और हवा से हवा में मार करने वाली ‘अस्त्र’ MK-II मिसाइल शामिल हैं. इसके अलावा एंटी-टैंक नाग मिसाइल सिस्टम (ट्रैक्ड) MK-2, एडवांस्ड लाइटवेट टॉरपीडो, प्रोसेसर बेस्ड मूरड माइन (नेक्स्ट जेनरेशन), एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (AEW&C) MK-1A, माउंटेन रडार और LCA तेजस MK-1A के लिए फुल मिशन सिम्युलेटर को भी मंजूरी दी गई है. AoN रक्षा खरीद प्रक्रिया का पहला और अहम चरण होता है.
DRDO के लिए कैसे सफल रहा साल 2025?
DRDO चीफ कामत ने आगे बताया कि वर्ष 2025 DRDO के लिए उपलब्धियों से भरा रहा. इस दौरान कई सिस्टम्स सशस्त्र बलों को सौंपी गईं, कुछ का सफल परीक्षण हुआ और कई को औपचारिक रूप से सेवा में शामिल किया गया. उन्होंने कहा कि DRDO को रक्षा क्षेत्र के सभी स्टेकहोल्डर्स (हितधारकों) के साथ मिलकर भविष्य की चुनौतियों जैसे साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर विशेष ध्यान देना होगा. उन्होंने बताया कि रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) और सर्विसेज प्रोक्योरमेंट बोर्ड (SPB) ने जिन 22 प्रणालियों को मंजूरी दी है, उनकी कुल लागत 1.30 लाख करोड़ रुपये है, जो अपने आप में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है.
DRDO की विकास यात्रा
DRDO की स्थापना वर्ष 1958 में की गई थी. DRDO भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत काम करता है. DRDO का मुख्य उद्देश्य देश को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है. DRDO का मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है वर्तमान में DRDO के अंतर्गत 50 से अधिक लैब और प्रतिष्ठान कार्यरत हैं. DRDO में लगभग 5000 से अधिक वैज्ञानिक और कुल मिलाकर 25000 से ज्यादा कर्मचारी कार्यरत हैं. DRDO मिसाइल, रडार, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर, साइबर सुरक्षा, एयरोनॉटिक्स और नौसैनिक प्रणालियों पर काम करता है. एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम (IGMDP) डीआरडीओ की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है. DRDO ने अग्नि, पृथ्वी, आकाश, त्रिशूल और नाग जैसी मिसाइलें विकसित की हैं. हाल के वर्षों में DRDO ने प्रलय, ब्रह्मोस, अस्त्र और शौर्य जैसी उन्नत मिसाइलों पर काम किया है. तेजस हल्का लड़ाकू विमान (LCA) के विकास में DRDO की अहम भूमिका रही है. DRDO ने अर्जुन मुख्य युद्धक टैंक विकसित किया है. DRDO ने एयरबोर्न अर्ली वार्निंग सिस्टम (AEW&C) भी विकसित किया है. DRDO UAV/ड्रोन तकनीक पर लगातार काम कर रहा है. DRDO द्वारा विकसित कई सिस्टम्स को सेना में शामिल करने के लिए सरकार ने स्वीकृति (AoN) दी है. DRDO का निजी उद्योगों और स्टार्टअप्स के साथ सहयोग बढ़ रहा है मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियानों में DRDO की अहम भूमिका है DRDO आपदा प्रबंधन, मेडिकल उपकरण और कोविड जैसे संकटों में भी तकनीकी सहयोग दे चुका है.DRDO से आर्मी, एयरफोर्स और नेवी के साथ ही अन्य संगठनों ने एक लाख करोड़ से ज्यादा की डील की. इसी ने रूस के साथ मिलकर ब्रह्मोस मिसाइल डेवलप की है, जिसका डंका दुनिया में बज रही है. (फोटो: PTI)
26 हजार करोड़ के 11 कॉन्ट्रैक्ट
DRDO चेयरमैन ने यह भी जानकारी दी कि वर्ष 2025 में संगठन ने अपने उत्पादन साझेदारों के साथ 26 हजार करोड़ रुपये मूल्य के 11 डिफेंस कॉन्ट्रैक्ट्स पर हस्ताक्षर किए. इनमें नाग मिसाइल सिस्टम, अश्विनी लो-लेवल ट्रांसपोर्टेबल रडार, एयर डिफेंस फायर कंट्रोल रडार, MI-17 V5 हेलीकॉप्टर के लिए इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट, एरिया डिनायल म्यूनिशन और पिनाका रॉकेट सिस्टम के लिए उच्च विस्फोटक प्री-फ्रैगमेंटेड गोला-बारूद शामिल हैं. इसके अलावा इंफैंट्री फ्लोटिंग फुट ब्रिज, वॉरगेमिंग सिस्टम और ऑटोमैटिक केमिकल एजेंट डिटेक्टर जैसे सिस्टम भी इस कॉन्ट्रैक्ट का हिस्सा हैं.
ट्रायल एंड डेवलपमेंट
कामत ने कहा कि ‘प्रलय’ सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल, आकाश नेक्स्ट जेनरेशन, पिनाका गाइडेड रॉकेट, एडवांस्ड लाइटवेट टॉरपीडो, मैन-पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल और बॉर्डर सर्विलांस सिस्टम जैसी कई सिस्टम्स के यूजर ट्रायल पूरे हो चुके हैं या अंतिम चरण में हैं. इसके साथ ही भारतीय लाइट टैंक, बहुत कम दूरी की वायु रक्षा प्रणाली (VSHORADS), नौसेना के लिए शॉर्ट रेंज एंटी-शिप मिसाइल, रुद्रम-2 एयर-टू-सर्फेस मिसाइल और लंबी दूरी का ग्लाइड बम ‘गौरव’ जैसे कई प्रोजेक्ट विकास और परीक्षण के अलग-अलग चरणों में हैं.
प्राइवेट सेक्टर को कैसे लाभ?
DRDO प्रमुख ने बताया कि अब तक 2201 टेक्नोलॉजिकल ट्रांसफर (LAToT) समझौते भारतीय उद्योगों के साथ किए जा चुके हैं, जिनमें से 245 समझौते अकेले 2025 में हुए. इसके अलावा डीआरडीओ ने अपने परीक्षण केंद्र उद्योगों के लिए खोल दिए हैं और 2025 में 4000 से अधिक परीक्षण निजी कंपनियों और रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों के लिए किए गए. कामत ने कहा कि डीआरडीओ के अनुसंधान एवं विकास से उत्पन्न क्षमता ने रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में उद्योगों के विकास को नई दिशा दी है और भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाई है.
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बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु...और पढ़ें
Location :
New Delhi,Delhi
First Published :
January 02, 2026, 10:36 IST

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