IPS का 2020 में टूटा था सपना, बंदरों को कराते हैं भोजन, 2025 में करेंगे वापसी?

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Last Updated:August 31, 2025, 11:57 IST

Bihar chunav 2025: बिहार का वो मजबूत पुलिस अधिकारी, जिन्होंने राजनीतिक राह अपनाइ. असफल हुए तो धर्म और आध्यात्म की राह पकड़ी और अब बंदरों को हर रोज खिला रहे खाना. जानें कैसे बिहार चुनाव 2020 में एक आईपीएस अधिकार...और पढ़ें

IPS का 2020 में टूटा था सपना, बंदरों को कराते हैं भोजन, 2025 में करेंगे वापसी?क्या 2025 के बिहार चुनाव में गुप्तेश्वर पांडेय चुनाव लड़ेंगे?

पटना. बिहार चुनाव 2025 की चर्चा हर तरफ हो रही है. राहुल गांधी, तेजस्वी यादव, प्रशांत किशोर की ललकार बिहार में गूंज रही है. लेकिन साल 2020 में भी इसी तरह हर तरफ गूंज और कई तरह के सियासी कयास लगाए जा रहे थे. कई अधिकारी भी चुनाव लड़ने की इच्छा रखते थे, जैसे आज भी कुछ आईएएस और आईपीएस इसी तरह इच्छा रख रहे हैं. लेकिन 2020 के चुनाव से पहले एक नाम ऐसा था जो बिहार ही नहीं देश में चर्चा का केंद्र बन गया था. उस आईपीएस अधिकारी ने वीआरएस भी ले लिया, लेकिन टिकट कट गई और वह साधु बन गए. अब कथावाचक बनकर प्रवचन दे रहे हैं और बंदरों को हर रोज खाना खिला रहे हैं. क्या बिहार चुनाव 2025 में बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय चुनाव लड़ेंगे? अगर योगी आदित्यनाथ चुनाव लड़ सकते हैं, उमा भारती चुनाव लड़ सकती हैं तो गुप्तेश्वर पांडेय क्यों नहीं? जानें इस सवाल पर पांडेय ने क्या जवाब दिया?

पुलिस की खाकी से कथावाचक तक का सफर तय करने वाले बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय फिर से चर्चा में हैं. जो कभी अपराधियों और शराबियों के काल हुआ करते थे, आज-कल एक अलग ही भूमिका में नजर आ रहे हैं. हाल ही में सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरें वायरल हुईं, जिसमें वे बंदरों को खाना खिलाते दिख रहे हैं. यह दृश्य उनके नए जीवन का एक हिस्सा है, जो अब अध्यात्म और सामाजिक कार्यों के इर्द-गिर्द घूमता है. खाकी वर्दी और सियासत की दुनिया छोड़कर गुप्तेश्वर पांडेय अब कथावाचक के रूप में सनातन धर्म का प्रचार कर रहे हैं और सामाजिक कार्यों में सक्रिय हैं.

बंदरों को खाना खिलाने की वजह

गुप्तेश्वर पांडेय का बंदरों को खाना खिलाना उनके अध्यात्मिक जीवन का हिस्सा है. हिंदू धर्म में पशु-पक्षियों की सेवा को पुण्य कार्य माना जाता है और पांडेय अपने इस कार्य को प्रकृति और जीवों के प्रति करुणा के रूप में देखते हैं. उनके करीबी सूत्रों के अनुसार, वे अक्सर मंदिरों और धार्मिक स्थलों के आसपास बंदरों और अन्य जीवों को भोजन देते हैं, जो उनकी आध्यात्मिक यात्रा का एक हिस्सा है. यह उनके जीवन के उस दौर को दर्शाता है, जहां वे सादगी और सेवा को प्राथमिकता दे रहे हैं.

पुलिस से कथावाचक तक का सफर

गुप्तेश्वर पांडेय का जीवन प्रेरणादायक रहा है. 1961 में बिहार के बक्सर जिले के गेरुआबांध गांव में जन्मे पांडेय का बचपन अभावों में बीता. बिजली, पानी और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित गांव में पले-बढ़े पांडेय ने मेहनत और लगन से 1986 में यूपीएससी परीक्षा पास की और पहले भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) में चयनित हुए. बाद में, 1987 में वे भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) में शामिल हुए. बिहार के 26 जिलों में बतौर पुलिस अधीक्षक, डीआईजी और आईजी अपनी सेवाएं देने के बाद जनवरी 2019 में उन्हें बिहार का डीजीपी बनाया गया.

उनका कार्यकाल विवादों से भी घिरा रहा. सुशांत सिंह राजपूत मामले में उनके बयानों ने खूब सुर्खियां बटोरीं. सितंबर 2020 में, अपने कार्यकाल से पांच महीने पहले पांडेय ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) ले ली और जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) में शामिल हो गए. हालांकि, उन्हें विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं मिला, जिसके बाद उन्होंने राजनीति छोड़कर अध्यात्म की राह पकड़ ली.

आध्यात्मिक जीवन और कथावाचन

2021 से गुप्तेश्वर पांडेय ने कथावाचक के रूप में अपनी नई पारी शुरू की. वे अयोध्या, मथुरा, वृंदावन जैसे धार्मिक स्थलों पर भागवत कथा और रामचरितमानस के प्रवचन करते हैं. 2023 में उन्हें श्री त्रिदंडी स्वामी जी के शिष्य श्री लक्ष्मी प्रपन्न जीयर स्वामी ने ‘जगतगुरु रामानुजाचार्य’ की उपाधि दी. पांडेय ने सनातन धर्म के प्रचार को अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया है और देश-विदेश में कथावाचन कर रहे हैं. राजनीति में आने के सवाल पर अब गुप्तेश्वर पांडेय कहते हैं कि वह कभी भी दोबारा से राजनीति में नहीं आऊंगा. हालांकि, राजनीति में अच्छे-अच्छे ऑफर आने पर लोगों का मन बदलते भी देर नहीं लगता.

रविशंकर सिंहचीफ रिपोर्टर

भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले रविशंकर सिंह सहारा समय न्यूज चैनल, तहलका, पी-7 और लाइव इंडिया न्यूज चैनल के अलावा फर्स्टपोस्ट हिंदी डिजिटल साइट में भी काम कर चुके हैं. राजनीतिक खबरों के अलावा...और पढ़ें

भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले रविशंकर सिंह सहारा समय न्यूज चैनल, तहलका, पी-7 और लाइव इंडिया न्यूज चैनल के अलावा फर्स्टपोस्ट हिंदी डिजिटल साइट में भी काम कर चुके हैं. राजनीतिक खबरों के अलावा...

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First Published :

August 31, 2025, 11:57 IST

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