Last Updated:February 08, 2026, 11:19 IST
अंतरिक्ष में इसरो के झंडे गाड़ने के बाद अब भारत की एक प्राइवेट कंपनी ने स्पेस में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है. इसने 400 किलोमीटर की ऊंचाई पर एक कारनामा किया है, जिससे चीन-पाकिस्तान जैसे दुश्मनों की नींद उड़नी लाजमी है. इसने यह साबित कर दिया है कि भारतीय निजी कंपनियां अब अंतरिक्ष में मौजूद दूसरे ऑब्जेक्ट्स को कक्षा में ही ट्रैक कर उनकी तस्वीरें लेने में सक्षम हैं.

भारत के तेजी से बढ़ते निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए यह एक ऐतिहासिक और रणनीतिक उपलब्धि मानी जा रही है. अहमदाबाद स्थित अज़िस्टा इंडस्ट्रीज़ प्राइवेट लिमिटेड ने अपने एयरोस्पेस डिविजन के जरिये पहली बार यह साबित कर दिया है कि भारतीय निजी कंपनियां अब अंतरिक्ष में मौजूद दूसरे ऑब्जेक्ट्स को कक्षा में ही ट्रैक कर उनकी तस्वीरें लेने में सक्षम हैं. इसे तकनीकी भाषा में ‘इन-ऑर्बिट इमेजिंग’ या ‘इन-ऑर्बिट स्नूपिंग’ कहा जाता है.
एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, अज़िस्टा ने अपने 80 किलोग्राम वज़न वाले अर्थ ऑब्ज़र्वेशन सैटेलाइट AFR के ज़रिये धरती से करीब 400 किलोमीटर पर ऊंचाई पर स्थित अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की सफलतापूर्वक तस्वीरें लीं. यह प्रयोग 3 फरवरी को दो अलग-अलग प्रयासों में किया गया. ISS लो-अर्थ ऑर्बिट में मौजूद एक बड़ा और अपेक्षाकृत आसानी से ट्रैक किया जा सकने वाला ऑब्जेक्ट है, लेकिन इसके बावजूद किसी सैटेलाइट से दूसरे सैटेलाइट या स्पेस स्टेशन की तस्वीर लेना एक जटिल और उच्च-स्तरीय तकनीकी चुनौती होती है.
कंपनी के मुताबिक, यह प्रयोग बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में किया गया, जब लक्ष्य क्षितिज के पास था और सूर्य की रोशनी भी मौजूद थी. पहले प्रयास में सैटेलाइट और ISS के बीच की दूरी करीब 300 किलोमीटर थी, जबकि दूसरे प्रयास में यह दूरी घटकर लगभग 245 किलोमीटर रह गई. दोनों ही मौकों पर AFR सैटेलाइट के सेंसर को बेहद सटीकता से तेज़ी से आगे बढ़ रहे ISS को ट्रैक करने के लिए टास्क किया गया.
इन दोनों प्रयासों के दौरान सैटेलाइट ने कुल 15 अलग-अलग फ्रेम कैप्चर किए, जिनकी इमेजिंग सैंपलिंग लगभग 2.2 मीटर रही. अज़िस्टा का कहना है कि दोनों ही प्रयोग 100 फीसदी सफल रहे, जिससे कंपनी के ट्रैकिंग एल्गोरिद्म, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सिस्टम और इमेजिंग सटीकता की पुष्टि हुई है.
कंपनी के लिए यह सिर्फ एक तकनीकी सफलता नहीं है, बल्कि यह इस बात का ठोस प्रमाण है कि भारत में पूरी तरह स्वदेशी रूप से विकसित एल्गोरिद्म, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सिस्टम और सैटेलाइट इंजीनियरिंग अब अंतरिक्ष में मौजूद वस्तुओं को ट्रैक करने और उनका विश्लेषण करने में सक्षम हैं. यह क्षमता भविष्य में स्पेस सिचुएशनल अवेयरनेस यानी अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट्स, मलबे और अन्य ऑब्जेक्ट्स पर नजर रखने के लिए बेहद अहम मानी जाती है.
विशेषज्ञों के अनुसार, जैसे-जैसे अंतरिक्ष में सैटेलाइट्स की संख्या बढ़ रही है, वैसे-वैसे कक्षा में टकराव के जोखिम और रणनीतिक चुनौतियां भी बढ़ रही हैं. ऐसे में भारत के निजी क्षेत्र का इस दिशा में कदम बढ़ाना न केवल तकनीकी आत्मनिर्भरता की ओर संकेत करता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की स्पेस क्षमताओं को भी नई मजबूती देता है.
यह उपलब्धि भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग के लिए एक मील का पत्थर मानी जा रही है, जो आने वाले समय में देश को अंतरिक्ष सुरक्षा, निगरानी और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में और आगे ले जा सकती है.
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An accomplished digital Journalist with more than 13 years of experience in Journalism. Done Post Graduate in Journalism from Indian Institute of Mass Comunication, Delhi. After Working with PTI, NDTV and Aaj T...और पढ़ें
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Bengaluru,Bengaluru,Karnataka
First Published :
February 08, 2026, 11:19 IST

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