'आपको अंग्रेजी नहीं आती और हमें गुजराती', खुद केस लड़ने की जिद पर अड़े शख्स को हाईकोर्ट से झटका

1 hour ago

Last Updated:January 30, 2026, 20:58 IST

'आपको अंग्रेजी नहीं आती और हमें गुजराती', खुद केस लड़ने पर अड़े शख्स को झटकागुजरात हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि यह भाषण देने का मंच नहीं है. (फाइल फोटो)

अहमदाबाद. गुजरात हाईकोर्ट ने गुरुवार को एक अहम फैसले में स्पष्ट कर दिया कि हाईकोर्ट की आधिकारिक भाषा अंग्रेजी है. कोर्ट ने उस व्यक्ति की याचिका को खारिज कर दिया जो ‘कम्पिटेंस सर्टिफिकेट’ (योग्यता प्रमाण पत्र) न मिलने के विरोध में अदालत पहुंचा था. याचिकाकर्ता अमृतलाल परमार चाहते थे कि उन्हें अपना केस खुद लड़ने (पार्टी-इन-पर्सन) की अनुमति दी जाए और वे गुजराती भाषा में अपनी दलीलें पेश करें. चीफ जस्टिस सुनीता अग्रवाल और जस्टिस डीएन रे की बेंच ने उन्हें समझाते हुए कहा कि अगर उन्हें अंग्रेजी नहीं आती है, तो वे अपना पक्ष ठीक से नहीं रख पाएंगे, जिससे उन्हीं का नुकसान होगा.

कोर्ट ने याचिकाकर्ता को व्यावहारिक दिक्कतें समझाईं. बेंच ने मौखिक रूप से कहा, “निर्णय (सर्टिफिकेट न देने का) इसलिए लिया गया ताकि कार्यवाही के दौरान आपको नुकसान न हो. आप अंग्रेजी नहीं समझते; हम (कोर्ट) गुजराती नहीं समझते… विपक्षी पार्टियों के वकील भी अंग्रेजी में ही अपनी दलीलें देंगे.” कोर्ट ने कहा कि अगर आप कार्यवाही ही नहीं समझेंगे तो अपना बचाव कैसे करेंगे.

खुद केस लड़ना कोई ‘अधिकार’ नहीं
अदालत ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होकर अपना केस लड़ना कोई “अधिकार” नहीं है, बल्कि यह कमेटी द्वारा आपकी योग्यता जांचने के बाद दी गई एक अनुमति है. याचिकाकर्ता ने कहा कि वह पहले भी दूसरे केस में पेश हो चुके हैं. इस पर कोर्ट ने कहा कि कानूनी कार्यवाही को समझना जरूरी है. कोर्ट ने कहा, “यह आम बोलचाल की भाषा नहीं है, बल्कि एक कानूनी भाषा है. अपना केस अच्छे से लड़ने के लिए कानूनी भाषा समझना जरूरी है.”

10वीं पास हैं याचिकाकर्ता, कोर्ट ने दी वकील करने की सलाह
कोर्ट ने नोट किया कि याचिकाकर्ता सिर्फ एसएससी (10वीं) तक पढ़े हैं और उन्होंने कानून की पढ़ाई नहीं की है. जजों ने कहा, “यह भाषण देने या कुछ और हासिल करने का मंच नहीं है. हम आदेश भी अंग्रेजी में लिखवाते हैं, शायद आप समझ ही न पाएं कि कोर्ट में क्या चल रहा है.” बेंच ने याचिकाकर्ता को सलाह दी कि वे अपने केस को खतरे में न डालें और हाईकोर्ट लीगल सर्विस कमेटी में आवेदन करें, ताकि उन्हें एक वकील मुहैया कराया जा सके.

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Rakesh Ranjan Kumar

राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h...और पढ़ें

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Ahmedabad,Ahmedabad,Gujarat

First Published :

January 30, 2026, 20:58 IST

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