ऊंचा पद, लाखों की सैलरी...पर्यावरण बचाने के लिए इस शख्स ने Bank की नौकरी छोड़ी

2 days ago

Last Updated:March 25, 2025, 15:47 IST

Inspiring Story: तेलंगाना के नलगोंडा जिले के मत्तिपेल्ली सुरेश गुप्ता ने पर्यावरण संरक्षण के लिए बैंक की नौकरी छोड़ दी. वह लोगों को प्लास्टिक छोड़ने और पर्यावरण के अनुकूल उत्पाद अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं...और पढ़ें

ऊंचा पद, लाखों की सैलरी...पर्यावरण बचाने के लिए इस शख्स ने Bank की नौकरी छोड़ी

सुरेश गुप्ता पर्यावरण संरक्षण

तेलंगाना के नलगोंडा जिले के मत्तिपेल्ली सुरेश गुप्ता ने पर्यावरण संरक्षण के लिए जो कदम उठाया, वह किसी प्रेरणा से कम नहीं. 13 साल पहले उन्होंने अपनी बैंक की नौकरी छोड़ दी और पूरी तरह से पर्यावरण संरक्षण के कार्यों में जुट गए. जहां लोग ऊंचे पद और अच्छे वेतन की चाह रखते हैं, वहीं सुरेश गुप्ता ने समाज और प्रकृति के हित को प्राथमिकता दी.

बढ़ते प्रदूषण पर गहरी चिंता
सुरेश गुप्ता का मानना है कि आधुनिक युग में पर्यावरण प्रदूषण लगातार बढ़ता जा रहा है. उन्होंने विज्ञान एवं पर्यावरण केंद्र (सीएसई) द्वारा जारी रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि दुनिया के 50 सबसे प्रदूषित शहरों में से 42 भारत में हैं. यह स्थिति चिंताजनक है और इसे सुधारने के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा.

बैंक की नौकरी छोड़ने का फैसला
सुरेश गुप्ता सुधा सहकारी बैंक में प्रबंधक के रूप में कार्यरत थे. अच्छी तनख्वाह, सम्मानजनक जीवन और सुरक्षित भविष्य के बावजूद उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिए नौकरी छोड़ने का बड़ा फैसला लिया. उनकी पत्नी महात्मा गांधी विश्वविद्यालय में अतिथि शिक्षिका हैं और उनका छोटा बेटा इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा है. हालांकि, परिवार में एक बड़ा दुख भी आया जब उनके बड़े बेटे की दुर्घटना में मृत्यु हो गई. लेकिन इस दर्द ने उन्हें और मजबूत बना दिया और वह पर्यावरण संरक्षण के प्रति और अधिक समर्पित हो गए.

पर्यावरण संरक्षण का उनका तरीका
सुरेश गुप्ता का मानना है कि पर्यावरण की रक्षा केवल प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाने या पानी को साफ रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि हमारे जीवन के हर क्षेत्र में इसका ध्यान रखना जरूरी है. उन्होंने लोगों को सूती कपड़े पहनने, स्टील की बोतलें इस्तेमाल करने और जूट के बैग अपनाने के लिए प्रेरित किया.

लोगों को प्रोत्साहित करने का अनोखा तरीका
सुरेश गुप्ता उन लोगों को सम्मानित करते हैं जो पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली अपनाते हैं. अगर कोई स्टील की बोतल इस्तेमाल करता है या जूट का बैग लेकर बाजार जाता है, तो वह उसे सूती शॉल देकर प्रोत्साहित करते हैं. जब उनसे पूछा गया कि इस कार्य के लिए धन कहां से आता है, तो उन्होंने बताया कि कुछ लोग अपनी इच्छा से दान कर देते हैं, जिससे यह पहल लगातार आगे बढ़ रही है.

सरकार ने किया सम्मानित
सुरेश गुप्ता के इन प्रयासों को सरकार ने भी सराहा है. तेलंगाना सरकार ने उन्हें ‘सर्वश्रेष्ठ हथकरघा पुरस्कार’, ‘तेलंगाना जैव विविधता संरक्षक पुरस्कार 2023’, ‘तेलंगाना ग्रीन चैंपियन पुरस्कार’ और ‘सर्वश्रेष्ठ तेलंगाना पर्यावरणविद् पुरस्कार’ से सम्मानित किया है. यह पुरस्कार न केवल उनके काम की पहचान हैं, बल्कि अन्य लोगों के लिए भी प्रेरणा बन गए हैं.

First Published :

March 25, 2025, 15:47 IST

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