China political crisis: अमेरिकी राष्ट्रपति को लेकर कहा जा रहा है कि वेनेजुएला के बाद उनका अगला निशाना क्यूबा, कोलंबिया, कनाडा या ईरान नहीं बल्कि चीन है. ऐसी खबरों के बीच कम्युनिस्ट पार्टी आफ चाइना और चीन की सेना दोनों में खलबली है. इसके बाद दावा किया जा रहा है कि जिनपिंग ने पीपुल्स लिबरेशन आर्मी में अपने वफादारों को जुटाना शुरू कर दिया है. दावा ये भी है कि एक जनरल की गिरफ्तारी के बाद सेना दो फाड़ हो गई, जिससे जिनपिंग के खिलाफ सबसे बड़े सैन्य विद्रोह की आशंका को बल मिल रहा है.
जिनपिंग के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर?
बीजिंग की सैन्य हलचल इसलिए शी जिनपिंग की सरकार की टेंशन बढ़ा रही है. क्योंकि कुछ दिनों पहले हुई चीन की सेना में जिनपिंग के बाद सबसे पावरफुल जनरल झांग की गिरफ्तारी के बाद एक बड़ा फैसला लेते हुए चीनी जनरल हेडक्वार्टर यानी GHQ ने देशभर में सैन्य आवाजाही पर रोक लगा दी थी. लेकिन बीजिंग की सड़कों पर घूम रहा सैन्य काफिला बता रहा है कि चीनी सेना की कई यूनिट्स हेडक्वार्टर का आदेश नहीं मान रही है .
चीन की सोशल मीडिया में एक और वीडियो वायरल हो रहा है, दूसरे वीडियो में पीपल्स लिबरेशन आर्मी के बड़े ट्रक मध्यम दूरी की मिसाइलें लेकर बीजिंग की तरफ बढ़ रहे हैं. इन मिसाइलों के साथ कई दूसरे ट्रक भी मौजूद हैं. दावा किया जा रहा है कि सैनिक और हथियारों को बीजिंग लाया जा रहा है. इस सैन्य काफिले के साथ चीन की सेना के पेट्रोल टैंकर और एंबुलेंस मौजूद है. अबतक चीन एक बार भी अंदरखाने किसी संघर्ष में नहीं उलझा, ऐसे में सैन्य काफिले का बीजिंग की तरफ जाना सवाल खड़े कर रहा है. दूसरा वीडियो चीन के जिआंगसू प्रांत के यिक्सिंग जिले का है. जो बीजिंग से करीब 1000 किलोमीटर दूर है. जहां से बीजिंग पहुंचने में 10 घंटे लगते हैं. चीन में लोग सेना के इस कूच को चीन के ताकतवर जनरल झांग की गिरफ्तारी से जोड़ रहे हैं.
बीजिंग की तरफ चीन की सेना के कथित कूच के तीसरे वीडियो में पीपल्स लिबरेशन आर्मी की करीब 5000 सैनिकों वाली ब्रिगेड का मूवमेंट दिखाई दे रहा है. ये सैनिक पैदल ही बीजिंग की तरफ बढ़ रहे हैं. ये वीडियो तियानजिन के वुकिंग जिले का है. ये जगह बीजिंग से महज 40 40 किलोमीटर दूर है. ऐसी मूवमेंट पूरे चीन में एक साथ दिखा रही है. ये मॉक ड्रिल है या कुछ और? चीनी सोशल मीडिया भी इस सवाल का जवाब ढूंञ रही है. इतनी फोर्स आखिरकार क्या करने के लिए चीन की उस राजधानी में पहुंच रही है. जहां कम्युनिस्ट पार्टी आफ चाइना का आफिस है. जहां पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग रहते हैं. जहां से पूरे चीन को चलाया जाता है.
एक तरफ बीजिंग की ओर सैन्य टुकड़ियां पीएलए हेडक्वार्टर के आदेश की अव्हेलना करते हुए कूच कर रही हैं. दूसरी तरफ जिनपिंग ने पीएलए में अपने वफादार जनरलों को विशेष सैन्य बलों को खास तौर पर अलर्ट रखने के आदेश मिले हैं. चीन की सोशल मीडिया में खबर है, बीजिंग में चीन के विशेष सुरक्षा बल जिन्हें ‘ते-जिंग’ कहा जाता है, उनकी तैनाती बढ़ा दी गई है. चीन के विशेष बलों को बीजिंग का सबसे संवेदनशील सुरक्षा क्षेत्र फॉरबिडन सिटी के पास तैनात किया गया है.
चीन का पावर सेंटर खतरे में है
फॉरबिडन सिटी चीन के मिंग और किंग राजवंश के 24 सम्राटों का शाही महल है. जिसे चीन की सत्ता, इतिहास और प्रतीकात्मक शक्ति का सबसे बड़ा चिन्ह माना जाता है. यानी यह सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि चीन की शासक आत्मा मानी जाती है. यह पूरा इलाका चीन के तियाननमेन स्क्वायर के ठीक पीछे मौजूद है . जो चीन के सबसे बड़े विरोध प्रदर्शन का केंद्र रह चुका है .
और जब यहां पर सुरक्षा बढ़ाई जाती है तो मतलब साफ है . चीन का पावर सेंटर खतरे में है .
चीन जैसा देश जहां पर हर सूचना सरकार के आदेश के बाद बाहर आती है. जिस देश ने कोरोना जैसे वायरस की खबर को महीनों तक छिपाकर रखा. वहां से ऐसी तस्वीरें और ऐसी खबरें बाहर आना क्यों सामान्य घटना नहीं है. आखिरकार चीन में हुई किस घटना के बाद बीजिंग को घेरकर चीन की सेना आगे की तरफ बढ़ने लगी. हमने आपको चीन के दूसरे सबसे शक्तिशाली व्यक्ति यानी चीन के सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के वाइस चेयरमैन जनरल झांग यौश्या की गिरफ्तारी की खबर बताई थी. जिन्हें चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के आदेश पर गिरफ्तार किया गया था. अब जनरल झांग यौश्या का शी जिनपिंग को लिखा गया एक ओपन लेटर चीन में लीक हो गय है. जिसे पढ़ने के बाद चीन की सेना बगावत पर उतर आई है. आज आपको भी जानना चाहिए, आखिरकार ये लेटर लीक कैसे हुआ और जनरल झांग यौश्या ने शी जिनपिंग को लिखे ओपन लेटर में क्या कहा है.
लेटर में क्या लिखा?
चीन की सेना के जिस प्रभावशाली जनरल को शी जिनपिंग ने गिरफ्तार करवा दिया. उन्होंने ये लेटर दिसंबर 2025 में लिखा था. इस लेटर की पहली लाइन थी, अगर मुझे कुछ होता है तो इस लेटर को सार्वजनिक कर दिया जाए. यानी जिस जनरल को जिनपिंग ने गिरफ्तार करवाया. उसे अपने साथ कुछ गलत होने की आशंका पहले से थी. जनरल झांग पर जिनपिंग के तख्तापलट की कोशिश और परमाणु जानकारियां अमेरिका को लीक करने के आरोप लगे. जिनपिंग ने जनरल झांग को भ्रष्टाचार करने वाला जनरल भी कहा था, लेकिन इस लेटर के बाद चीन की पूरी सेना को पता चल गया है. आखिरकार जिनपिंग क्यों अपने सबसे भरोसेमंद जनरल और बचपन के दोस्त के दुश्मन बन गए. आपको भी चीन में तूफान लाने वाले इस लेटर में लिखी महत्वपूर्ण बातों को बहुत ध्यान से सुनना चाहिए. क्योंकि इस लेटर ने शी जिनपिंग की पोल दुनिया भर में खोल दी है.
इस लेटर से खुलासा हुआ है झांग की गिरफ्तारी भ्रष्टाचार की वजह से नहीं, बल्कि शी जिनपिंग के साथ राजनीतिक और सैन्य असहमति की वजह से हुई. झांग ने इस लेटर में बताया चीन की सेना का नियंत्रण करने वाले सेंट्रल मिलिट्री कमीशन, जिसका नेतृत्व सामूहिक होना चाहिए. शी जिनपिंग उसे व्यक्तिगत तानाशाही में बदल रहे थे. लेटर में आरोप लगाया गया है कि सेना का नियंत्रण जिनपिंग ने पूरी तरह अपने हाथ में ले लिया था, जो पार्टी परंपरा के खिलाफ है.
लेटर में दावा किया गया है कि जनरल झांग की गिरफ्तारी की सबसे बड़ी वजह बनी, ताइवान, अमेरिका और जापान के साथ युद्ध का विरोध.
झांग का दावा है कि शी जिनपिंग चीन की सेना को एक ऐसे युद्ध के लिए तैयार कर रहे थे . जो उनको चीन का सर्वकालिक महान नेता बना दे . जबकि जनरल झांग ऐसे किसी भी युद्ध को आत्मघाती और विनाशकारी बताकर इसका विरोध कर रहे थे
जनरल झांग ने जिनपिंग को चेतावनी दी थी..इस युद्ध में चीन के लाखों सैनिक मारे जाएंगे. तटीय चीन तबाह होगा. अमेरिका के प्रतिबंध लगेंगे. चीन के एसेट फ्रीज़ कर दिए जाएंगे और शासन के भीतर टूट-फूट होगी. जिससे चीन बहुत पीछे चला जाएगा. लेकिन जिनपिंग पर तो सबसे महान नेता बनने का जुनून सवार है. इस जुनून में उन्हें अच्छी सलाह भी अभी बुरी लग रही है.
जनरल झांग ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि चीन की सेना को ‘राष्ट्रीय सेना’ से ‘निजी सेना’ बनाया जा रहा है. तेज़ प्रमोशन, व्यक्तिगत निष्ठा और एक व्यक्ति की पूजा से पेशेवर सैन्य संस्कृति नष्ट हो रही है. यानी चीन की सेना में काबिलियत नहीं जिनपिंग से वफादारी ही तरक्की की गारंटी बन गई है.
झांग इसलिए भी चीन की सेना के ताइवान पर कब्जे के विरोध में थे. क्योंकि उनका मानना था नेता युद्ध शुरू करते हैं, सैनिक मरते हैं, और बाद में नेता हाथ मिला लेते हैं. यानी झांग चीन के सैनिकों की बलि चढ़ाने के खिलाफ थे. ये बात भी जिनपिंग को पसंद नहीं आई.
झांग ने इस लेटर में कहा है अगर उन्हें हटाया गया, तो चीन उत्तर कोरिया जैसा बन सकता है. उन्होंने दावा किया उनकी गिरफ्तारी के बाद चीन में मार्शल लॉ, और स्थायी दमन का रास्ता खुलेगा.
जनरल झांग ने कहा वो चाहते तो चीन में तख्तापलट कर सकते थे. लेकिन उन्होंने जानबूझकर ऐसा नहीं किया. गृहयुद्ध और सैनिकों के खून से बचने के लिए वो तख्तापलट से पीछे हट गए. यानी झांग ने खूनखराबे की आशंका की वजह से जिनपिंग का तख्तापलट नहीं किया.
इस लेटर में लिखा है कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और सैन्य नेतृत्व ने शी जिनपिंग को युद्ध से रोका. जिससे जिनपिंग काफी नाराज हो गए. इसके अलावा पार्टी में एक अंदरूनी सहमति बनी थी कि शी जिनपिंग दोबारा सत्ता नहीं लेंगे. लेकिन अब जिनपिंग उस समझौते से पीछे हट गए हैं. हर वो व्यक्ति जो उनके रास्ते का रोड़ा बन सकता है, उसको अपने रास्ते से हटा रहे हैं. चीन की सेना को चलाने वाले सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के ज्यादातर काबिल लोगों को हटा दिया गया है.
यह पहली बार है जब PLA का कोई शीर्ष-स्तरीय अधिकारी सिस्टम के भीतर से ही शासन के खिलाफ खड़ा हुआ है. दावा किया जा रहा है कि जनरल झांग ने अमेरिका के सहयोग से शी जिनपिंग को ताइवान वॉर से रोकने की कोशिश की थी. जनरल झांग को पता था चीन की सेना PLA अंदर से खोखली है. उसे वास्तविक युद्ध का कोई अनुभव नहीं है. उन्हें यह साफे दिख रहा था कि अमेरिका के साथ युद्ध आत्महत्या के बराबर होगा. इसीलिए उन्होंने अपने सैनिकों को कत्लगाह में झोंकने के बजाय पश्चिमी देशों के साथ सहयोग का रास्ता चुना. जब से चीन की सेना को मालूम चला है, कि जिनपिंग ने जनरल झांग को लाखों सैनिकों का खून बहने से रोकने की सजा दी है. तब से चीन की सेना का एक बड़ा तबका असंतुष्ट है. इसके अलावा चीन की सेना के बड़े अधिकारी इसलिए भी डरे हुए हैं. जब सबसे वरिष्ठ और ताकतवर जनरल चीन में सुरक्षित नहीं तो दूसरों की सिस्टम में क्या हैसियत होगी. इसका चीन की सेना के मोराल पर भी असर पड़ा है और चीन की सेना की इस हालत ने अमेरिका के राष्ट्रपतिट्रंप को बड़ा मौका दे दिया है.
ट्रंप इस वक्त पूरी दुनिया को अपने हिसाब से चलाने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन उनकी इस मुहिम में सबसे बड़ा रोड़ा चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग हैं. माना जा रहा है इसी वजह से ट्रंप चीन में भी सत्ता परिवर्तन चाहते हैं. जनरल झांग के साथ अमेरिका की डील भी इसका हिस्सा मानी जा रही थी. लेकिन जनरल झांग के बाद उनके वफादारों के जरिए भी जिनपिंग को अस्थिर करने का ट्रंप कार्ड व्हाइट हाउस से चलाया जा रहा है. वहीं जिनपिंग अपनी कमजोर होती स्थिति को दुनिया से छिपाने की कोशिश कर रहे हैं. सेना की नाराजगी के बीच जिनपिंग ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर का बीजिंग में स्वागत कर रहे हैं. इस मीटिंग के दौरान भी जिनपिंग टेंशन में दिखे. दूसरी ओर ट्रंप भी लगातार बीजिंग पर नजर बनाए हुए हैं.
ट्रंप यूरोप में अपने सबसे बड़े सहयोगी ब्रिटेन को सलाह दे रहे हैं, कनाडा को सलाह दे रहे हैं कि चीन से व्यापार करना खतरनाक है. लेकिन कोई उनकी मान नहीं रहा, लेकिन ट्रंप ऐसा क्यों कह रहे हैं? क्या ट्रंप को पता है कि चीन जल्द अस्थिर होने वाला है. क्या ट्रंप ने खुद चीन के खिलाफ ये साजिश रची है? क्योंकि जिस तरह अमेरिकी राष्ट्रपति वेनेजुएला पर हमला करते हैं, ईरान पर हमले की तैयारी में हैं. ग्रीनलैंड पर कब्जे के लिए यूरोपीय से दुश्मनी मोल लेते हैं तो इसके पीछे सबसे बड़ी वजह चीन और जिनपिंग को नुकसान पहुंचाना ही है.
ट्रंप ने वेनेजुएला और ईरान को निशाना क्यों बनाया अब आप ये समझिए. चीन दुनिया का सबसे बड़ा तेल आयातक है. वो अपनी कुल खपत का लगभग 72% तेल आयात करता है. यानी चीन का रोजाना तेल आयात 11 से 12 मिलियन बैरल प्रति दिन है. इतने तेल से पाकिस्तान का काम लगभग 1 महीने तक चल सकता है. वेनेजुएला और ईरान इस तेल की सप्लाई में सबसे महत्वपूर्ण देश हैं. क्योंकि ये दोनों देश चीन को डिस्काउंट पर तेल देते हैं.
सस्ते तेल का खेल
चीन, ईरान का सबसे बड़ा तेल खरीदार है. चीन ईरान से रोजाना 1.5 मिलियन बैरल तेल का आयात करता है. यह ईरान के कुल निर्यात का 80 से 90% है . यानी ईरान ज्यादातर तेल चीन को बेचता है. ईरान, अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से चीन को 10–15 डॉलर प्रति बैरल का डिस्काउंट देता है. यानी सिर्फ इस डिस्काउंट से चीन को सालाना 6 अरब डॉलर से ज्यादा की बचत होती है. ईरान पर हमले के साथ ही चीन को मिल रहे सस्ते तेल की सप्लाई भी रुक जाएगी. इसके अलावा चीन वेनेजुएला से 400 से 600 हजार बैरल सस्ता तेल रोजाना आयात करता था. लेकिन अब वेनेजुएला के तेल पर अमेरिकी कब्जे के बाद ये सप्लाई रुक गई. चीन ने वेनेजुएला में 70 अरब डॉलर का निवेश किया था, अमेरिका के कब्जे से ये निवेश भी फंस गया.
यानी वेनेजुएला और ईरान पर निशाना साधकर ट्रंप, जिनपिंग को कमजोर कर रहे हैं. इसके अलावा ट्रंप चीन पर सेमीकंडक्टर प्रतिबंध लगा चुके हैं. AI, चिप्स, क्वांटम टेक पर रोक लगा चुके हैं. सप्लाई चेन को चीन से वियतनाम, मैक्सिको की ओर मोड़ रहे हैं. जिससे चीन की ग्रोथ धीमी हुई है. चीन में बेरोजगारी बढ़ी है और जिनपिंग के खिलाफ असंतोष बढ़ता जा रहा है. जिनपिंग कोई बड़ा युद्ध छेड़कर इस नाराजगी की भरपाई करना चाहते थे. ताइवान पर कब्जा करके चीन का सबसे महान नेता बनना चाहते थे. लेकिन जनरल झांग उनके रास्ते का रोड़ा बन गए. जिनको ट्रंप प्रशासन का साथ भी मिला. अब झांग की गिरफ्तारी के बाद बीजिंग की तरफ चीन की सेना का कूच जिनपिंग के लिए बड़ा खतरा बन गया है. जिनपिंग सेना की इस नाराजगी से नहीं निपट पाए तो ईरान से पहले चीन में भी तख्तापलट हो सकता है.

1 hour ago
