गरीब कैदियों के लिए सरकार का कदम, जिनके पास बेल के पैसे नहीं, उनकी होगी रिहाई

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Last Updated:January 02, 2026, 06:35 IST

गरीब कैदियों के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. ऐसे कैदी, जो छोटे-मोटे अपराध में जेल में सड़ रहे हैं और उनके पास बेल कराने तक का पैसा नहीं है, ऐसे कैदियों को खुद सरकार बेल के लिए पैसे देगी. जी हां, गृह मंत्रालय ने गरीब कैदियों की रिहाई तेज करने के लिए राज्यों को निर्देश दिए हैं. अब DLSA सचिव को नई जिम्मेदारी मिली है और बेल की रकम सीमा 50000 रुपये कर दी गई है.

गरीब कैदियों के लिए सरकार का कदम, जिनके पास बेल के पैसे नहीं, उनकी होगी रिहाईजो लोग बेल का खर्चा नहीं उठा सकते, उनकी रिहाई में तेज़ी लाएं: सरकार ने राज्यों से कहा (सांकेतिक फोटो)

जो कैदी बेल का खर्चा नहीं उठा पाते हैं और इस कारण वो जेल में ही पड़े रहते हैं, ऐसे लोगों के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है.सरकार ने सभी राज्यों से वैसे कैदियों की रिहाई में तेजी दिखाने के लिए कहा है जो बेल का पैसा अफॉर्ड नहीं कर पाते. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और राज्य जेलों के प्रमुखों से गरीब कैदियों की रिहाई में तेज़ी लाने का आग्रह किया है, जिन्हें बेल की रकम न दे पाने के कारण बेल नहीं मिली है.

एचटी ने मामले से जुड़े अधिकारियों के हवाले से यह जानकारी दी है. गृह मंत्रालय ने 8 अक्टूबर के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद गरीब कैदियों से जुड़े अपने दिशानिर्देशों में बदलाव किया है. इसमें 2023 की गरीब कैदियों को सहायता योजना के तहत मौजूदा दिशानिर्देशों और SOPs की समीक्षा करने को कहा गया था.
पत्र में बताया गया है कि राज्यों में इस योजना का कार्यान्वयन अपर्याप्त और असंतोषजनक था, जिससे इसके मुख्य उद्देश्यों को पूरा करने में सीधे तौर पर बाधा आ रही थी.

क्या है सरकार की योजना
कैदियों को सहायता योजना गृह मंत्रालय द्वारा 2023 में शुरू की गई थी. इसके तहत राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को वित्तीय सहायता दी जाती है, जिसका उपयोग गरीब कैदियों की बेल की रकम के लिए किया जा सकता है. यह सहायता उन मामलों में दी जाती है जहां बेल तो मिल जाती है, लेकिन कैदी रकम नहीं दे पाता और जेल में रहता है.

किन पर यह नियम लागू नहीं
नए दिशानिर्देशों में यह साफ किया गया है कि यह योजना बलात्कार, पॉक्सो एक्ट के तहत अपराध, मानव तस्करी और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में शामिल कैदियों पर लागू नहीं होगी. अधिकारियों ने बताया कि 2023 के दिशानिर्देशों में इस अंतर का पहले स्पष्ट रूप से उल्लेख नहीं किया गया था. उन्होंने बताया कि ड्रग तस्करी, आतंकी गतिविधियों, मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार के मामलों में शामिल कैदियों की अन्य श्रेणियां अपरिवर्तित रहेंगी.

क्या है नया दिशानिर्देश

नए दिशानिर्देशों के अनुसार, अगर किसी कैदी को कोर्ट के आदेश के सात दिनों के भीतर जेल से रिहा नहीं किया जाता है, तो जेल अधिकारी को जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण (DLSA) के सचिव को सूचित करना होगा. इसके बाद DLSA को तुरंत कैदी की मुलाकात जेल आने वाले वकील/पैरालीगल स्वयंसेवक या नागरिक समाज के प्रतिनिधि से करवानी होगी ताकि कैदी के मामले की पुष्टि की जा सके और 5 दिनों के भीतर DLSA को अपडेट किया जा सके.

2023 के दिशानिर्देशों के तहत जिला मजिस्ट्रेट कैदियों को उनकी बेल की रकम में मदद करने के लिए फंड को मंजूरी देने और जारी करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे. हालांकि नए नियमों ने यह जिम्मेदारी DLSA सचिव पर डाल दी है. DLSA को यह प्रक्रिया 10 दिनों के भीतर पूरी करने का आदेश दिया गया था, म मगर जेल आने वाले वकीलों का कोई उल्लेख नहीं था. नियमों के तहत बेल की रकम की लिमिट भी ₹40,000 से बढ़ाकर ₹50,000 कर दी गई है. कमिटी को ज़्यादा रकम देने का फैसला करने का अधिकार भी दिया गया है, लेकिन यह रकम ₹1 लाख से ज़्यादा नहीं होगी.

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Shankar Pandit

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January 02, 2026, 06:35 IST

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