Last Updated:April 03, 2025, 01:19 IST
Jaguar crash: भारतीय वायुसेना टू फ्रंट वॉर के लिए खुद को तैयार रखना है. भारत के पायलट दुनिया के सबसे बेहतर पायलट है. वह अपनी तैयारियों को धार देने के लिए दिन रात खुद को तैयार रखते हैं. इस तरह टू फ्रंट वॉर की चु...और पढ़ें

एक महीने के भीतर दूसरा जगुआर फाइटर क्रैश
हाइलाइट्स
गुजरात में जगुआर फाइटर विमान क्रैश हुआ.चार महीने में भारतीय वायुसेना के चार हादसे.हादसे की प्रारंभिक जांच में तकनीकी खराबी पाई गई.Jaguar crash: भारतीय वायुसेना में हादसे रुकने का नाम नहीं ले रहे. 2 अप्रैल बुधवार को भारतीय वायुसेना का डीप पेनिट्रेशन स्ट्राइक फाइटर जगुआर गुजरात के जामनगर के पास दुर्घटना का शिकार हो गया. एयरक्राफ्ट अपनी रुटीन फ्लाइट पर था. यह जगुआर ट्विन सीटर ट्रेनर एयरक्राफ्ट था. इसमें दो पायलट सवार थे. रिपोर्ट के मुताबिक एक पायलट तो सफलतापूर्वक विमान से इजेक्ट करने में कामयाब रहा. दूसरे पायलट के बारे में अभी वायुसेना की तरफ से कोई आधिकारिक बयान साझा नहीं किया गया है. प्रारंभिक जांच में तकनीकी खराबी के चलते यह हादसा हुआ. घटना के जांच के आदेश दे दिए गए हैं.
एक महीने में दूसरा जगुआर क्रैश
7 मार्च को भारतीय वायुसेना का डीप पेनिट्रेशन स्ट्राइक एयरक्राफ्ट जगुआर अंबाला में दुर्घटना का शिकार हो गया था. यह एयरक्राफ्ट ने अंबाला एयर बेस से अपनी रुटीन उड़ान पर था. उड़ान के कुछ देर बाद ही फाइटर पंचकुला के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. जगुआर फाइटर तकनीकी खराबी के चलते क्रैश हुआ था. इस हादसे में पायलट सुरक्षित इजेक्ट करने में सफल हो गया था. भारतीय वायुसेना के पास जगुआर डीप पेनिट्रेशन स्ट्राइक फाइटर के 6 स्क्वाड्रन है. इस एयरक्राफ्ट के अपग्रेडेशन का काम जारी है.
भारतीय वायुसेना में हादसों की वजह
भारतीय सेना की ट्रेनिंग सबसे अव्वल दर्जे की होती है. इसमें कोई शक नहीं कि दुनिया के सबसे बेहतरीन पायलटों में भारत वायुसेना के पायलट आते हैं. एयरक्राफ्ट उड़ता है तो अलग अलग कारणों के चलते दुर्घटनाग्रस्त भी होता है. वायुसेना में इन कारणों को इस तरह से बांटा गया है. HE(A) यानी ह्यूमन एरर एयरक्रू , TD यानी टेक्निकल डिफेक्ट, BS बर्ड स्ट्राइक, FOD फॉरन ऑब्जेक्ट डिफेक्ट , HE(S) ह्यूमन एरर सर्विसेज.
इस साल में अब 4 क्रैश
इस साल की शुरूआत वायुसेना के लिए अच्छी नहीं रही. चार महीने में 4 क्रैश वायुसेना में हो चुके हैं. पहला 6 फरवरी को मिराज 2000 दुर्घटना का शिकार हो गाया था. मिराज 2000 ने अपनी रुटीन फ्लाइंग के लिए ग्वालियर एयर बेस से उड़ा भरी थी. यह एयरक्राट मिराज का ट्रेनर वर्जन था. मध्यप्रदेश के शिवपुरी के पास दुर्घटनाग्रस्त हुआ था. अच्छी बात यह रही की एयरक्राफ्ट में सवार दोनों पायलट ठीक समय पर इज्केट कर गए. ठीक एक महीने बाद 7 मार्च को एक ही दिन में वायुसेना को दो बड़े झटके लगे. एक जगुआर फाइटर अंबाला में दुर्घटनाग्रस्त हुआ. उसके कुछ घंटे के बाद ही इस्टर्न सेक्टर में एक और हुर्घटना घटी. यह छोटा मालवाक विमान An-32 के साथ हुआ. बागडोगरा एयर बेस में ही यह दुर्घटान का शिकार हो गया. गनीमत है कि एयरक्राफ्ट में मौजूद पायलट और क्रू सुरक्षित था. लगातर होने वाले हादसों को रोकने के लिए वायुसेना ने कई तरह के कदम उठाए. काफी हद तक इसमें सफलता भी पाई है. खास तौर पर हैलिकॉप्टर हादसों में. पिछले साल दिसंबर में संसद में पेश की गई रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है. खास तौर पर हैलिकॉप्टर क्रैश में जो आंकडे दिए हैं साल 2017 से लेकर 2022 के बीच कुल 20 फाइटर, 7 हेलिकॉप्टर, 6 ट्रेनर एयरक्राफ्ट और 1 ट्रांसपोर्टर विमान हादसे का शिकार हुए है.
हादसों में आई कमी का दावा
रक्षा मंत्रालय ने संसद में यह बताया था कि 2017 से 2022 तक कुल 34 जांचें की गई. इन जांचों के आधार पर कई सुधारात्मक उपाय किए गए. मंत्रालय ने यह भी बताया कि क्रैश के मामलों में सुधार हुआ है. दुर्घटनाओं की दर कम हुई है. वायुसेना में हादसों के प्रतिशत को 10 हजार घंटे की फ्लाइंग में दुर्घटना की संख्या से निकाला जाता है. साल 2000 से 2005 में जो एक्सिडेंट रेट 0.93 था वह साल 2017 से 2022 में घट कर 0.27 पर आ गया. साल 2020 से 2024 के बीच तो यह 0.20 हो गया. यह रिपोर्ट इस बात का संकेत देती है कि वायुसेना दुर्घटनाओं को रोकने के लिए लगातार सुधारों पर काम किया है.
First Published :
April 03, 2025, 01:19 IST