Last Updated:November 30, 2025, 11:41 IST
Positive News: देश और दुनिया में स्वच्छ ऊर्जा यानी ग्रीन एनर्जी पर लगातार जोर दिया जा रहा है. इसे अक्षय ऊर्जा भी कहा जाता है, जिसका मतलब हुए एनर्जी का ऐसा सोर्स जो कभी समाप्त नहीं होगा. इससे किसी रह का प्रदूषण भी नहीं होता है. सोलर एनर्जी या सौर ऊर्जा इसका बड़ा और महत्वपूर्ण सोर्स है.
Positive News: गुजरात के अमरेली जिले में स्थित दुधाला गांव पूरे देश में छाया है. अमरेली. गुजरात के अमरेली जिले में स्थित दुधाला गांव अब पूरे राज्य में अपनी सौर ऊर्जा क्रांति के लिए जाना जाता है. 2000 से ज्यादा आबादी वाले इस लाठी तालुका के गांव में 400 से अधिक घर ऐसे हैं जो अब सोलर पावर से जगमगाते हैं. पिछले तीन सालों से इस गांव के लोगों का बिजली बिल शून्य आ रहा है और इसका श्रेय सूरत के उद्योगपति गोविंदभाई ढोलकिया को जाता है. गोविंदभाई ढोलकिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वैकल्पिक ऊर्जा को बढ़ावा देने वाले अभियान से प्रेरित होकर हर घर में मुफ्त सोलर सिस्टम लगवाया.
पहले गांव वाले हर महीने बिजली के बिल के लिए 1000 से 1500 रुपए तक देते थे. कई लोग महंगे बिल के डर से पंखा, लाइट या फ्रिज का इस्तेमाल भी कम करते थे, लेकिन जब से हर घर पर सोलर सिस्टम लगा, तब से लोग बिना किसी झिझक के अपने सभी इलेक्ट्रिक उपकरण चला रहे हैं और फिर भी बिल शून्य आता है. यह बदलाव लोगों की जिंदगी में साफ तौर पर देखने को मिल रहा है. गांव के निवासी अशोकभाई शेलिया बताते हैं कि सोलर सिस्टम ने पूरे गांव की बिजली की समस्या हल कर दी है. हमारे गांव में पहले बिजली के खर्चे बहुत ज्यादा थे. अब हम बिना किसी चिंता के बिजली इस्तेमाल कर सकते हैं. बच्चों के लिए पढ़ाई की लाइट, घर में फ्रिज और पंखा चलाना अब आसान हो गया है.
हर महीने कितनी बचत?
ग्रामीण जयराज बराड़ का कहना है कि उनके घर में एक किलोवॉट वाला सोलर सिस्टम लगाया गया है. पहले उन्हें हर महीने करीब 1000 से 1500 रुपए बिजली बिल पर खर्च करने पड़ते थे, लेकिन अब उनका बिल शून्य है. इससे घर की आर्थिक स्थिति भी बेहतर हुई है. स्थानीय बुजुर्ग पुरुषोत्तमभाई बराड़ कहते हैं कि पूरे गुजरात में हमारे गांव जैसा कोई गांव नहीं है. यहां हर घर को सोलर ऊर्जा का फायदा मिल रहा है. हमें भी इसका बहुत फायदा मिला है. दुधाला गांव में सिर्फ घर ही नहीं, बल्कि ग्राम पंचायत, चौपाल, स्कूल और मंदिर भी अब सोलर एनर्जी से संचालित हो रहे हैं. इससे पूरे गांव का बिजली खर्च शून्य हो गया है और लोग अब ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बन गए हैं. यह गांव अब सबके लिए एक उदाहरण बन चुका है कि किस तरह सौर ऊर्जा के सही इस्तेमाल से बिजली के बिल से मुक्ति पाई जा सकती है और ग्रामीण क्षेत्र के लोग आर्थिक रूप से मजबूत बन सकते हैं.
इकोनोमी के लिए कैसे फायदेमंद?
सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने से इकोनॉमी में भी विस्तार होने की संभावना है. मसलन लोगों को बचत होगी तो वे उस पैसे को कहीं न कहीं खर्च करेंगे. इस तरह अर्थव्यवस्था को रफ्तार मिलने के साथ ही आमलोगों को भी योजना से फायदा होता है. अगर सरकार की दी जाने वाली सब्सिडी का पूरा फायदा लिया जाए तो हर गांव को दुधाला की तरह सोलर गांव बनाया जा सकता है. इससे न सिर्फ ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की बचत होगी, बल्कि लोगों पर आर्थिक बोझ भी कम पड़ेगा. सौर ऊर्जा की ओर कदम बढ़ाना ग्रामीण अर्थव्यवस्था और जीवन स्तर दोनों के लिए लाभकारी है.
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बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु...और पढ़ें
First Published :
November 30, 2025, 11:41 IST

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