Last Updated:November 30, 2025, 12:34 IST
कर्नाटक हाईकोर्ट ने रिश्तों में क्रूरता पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. जस्टिस सूरज गोविंदराज की बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि लिव-इन रिलेशन में भी 498A लागू होगी क्योंकि रिश्ता कोई भी अगर क्रूरता होती है तो सजा भी पक्की है. धारा 498A के लिए कागजी शादी जरूरी नहीं है.
रिश्ते में क्रूरता पर कर्नाटक हाई कोर्ट का बड़ा फैसला. कर्नाटक हाईकोर्ट ने लिव इन रिलेशन और धारा 498A को लेकर ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कहा कि अब ‘पति’ सिर्फ कानूनी कागजों वाला नहीं माना जाएगा. IPC की धारा 498A (अब BNS 85-86) लिव-इन रिलेशनशिप, बिना शादी के साथ रहने वाले पार्टनर पर भी पूरी तरह लागू होगी. यानी अगर कोई पुरुष किसी महिला को यह भरोसा दिलाता है कि वह उसका पति है और फिर उसके साथ मारपीट, दहेज मांग या मानसिक-शारीरिक क्रूरता करता है, तो वह कानून की पकड़ से नहीं बच सकता, चाहे शादी वैध न भी हो.
लिव-इन पर कैसे लागू होगा 498A? यह क्रांतिकारी फैसला 18 नवंबर को जस्टिस सूरज गोविंदराज की बेंच ने सुनाया. मामला एक व्यक्ति का था जिसकी पहली शादी से बेटी थी, फिर भी उसने 2010 में दूसरी महिला से शादी कर ली. 2016 में रिश्ता टूटा तो दूसरी पत्नी ने 498A का केस ठोक दिया. आरोपी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा, ‘मेरी पहली शादी वैध थी, इसलिए दूसरी शादी कानूनी नहीं. ये तो बस लिव-इन था, 498A कैसे लग सकता है?
कागज पर शादी नहीं हुआ तो क्या हुआ, सजा तो मिलेगी
कोर्ट ने उसकी दलील ठुकराते हुए कहा, ‘महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा के लिए 498A एक सामाजिक सुरक्षा कवच है.’ अगर कोई पुरुष पहली शादी छुपाकर किसी महिला के साथ पति-पत्नी की तरह रहता है और क्रूरता करता है, तो वह सिर्फ इसलिए बच नहीं सकता कि कागज पर शादी अमान्य थी. जज ने लिखा, ‘संबंध का सार मायने रखता है, कागजी वैधता नहीं. अगर जोड़ा पति-पत्नी की तरह रह रहा था और महिला को विश्वास था कि शादी वैध है, तो क्रूरता के सबूत मिलते ही 498A पूरी ताकत से लागू होगी.
तर्क स्वीकार नहीं कर सकते
कोर्ट ने यह भी कहा कि आरोपी का तर्क स्वीकार करना अन्याय होगा. इससे धोखेबाज पुरुषों को फायदा मिलेगा जो शादी का झांसा देकर महिलाओं का शोषण करते हैं. जज ने साफ शब्दों में लिखा, ‘ऐसा करने से कानून का मकसद ही खत्म हो जाएगा और धोखाधड़ी को बढ़ावा मिलेगा.’
क्रूरता हुई तो सजा पक्की
महिला संगठनों ने फैसले का स्वागत किया है. अधिवक्ता सौम्या शर्मा कहती हैं, ‘यह उन हजारों महिलाओं के लिए बड़ी राहत है जो लिव-इन या धोखे की शादी में फंसकर 498A से वंचित रह जाती थीं. अब कानून ने साफ कर दिया – क्रूरता हुई तो सजा पक्की!’ वकीलों के मुताबिक यह फैसला पूरे देश में मिसाल बनेगा. अब लिव-इन पार्टनर या दूसरी-तीसरी पत्नी भी बिना डरे 498A का सहारा ले सकेंगी. कानूनी विशेषज्ञ इसे “महिलाओं के हक में बड़ा कदम” बता रहे हैं.
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दीप राज दीपक 2022 में न्यूज़18 से जुड़े. वर्तमान में होम पेज पर कार्यरत. राजनीति और समसामयिक मामलों, सामाजिक, विज्ञान, शोध और वायरल खबरों में रुचि. क्रिकेट और मनोरंजन जगत की खबरों में भी दिलचस्पी. बनारस हिंदू व...और पढ़ें
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Bangalore,Karnataka
First Published :
November 30, 2025, 12:13 IST

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