जेल में मौत के बाद किया गया बरी, ट्रेन ब्‍लास्‍ट में कमाल की फैमिली का दर्द

6 hours ago

Last Updated:August 31, 2025, 17:10 IST

Mumbai Train Blast: मुंबई ट्रेन ब्लास्ट केस में कमाल अहमद अंसारी समेत सभी आरोपी बरी हुए, लेकिन कमाल की जेल में मौत हो चुकी थी. परिवार ने फैसले को अधूरा बताया, वहीद शेख ने न्याय व्यवस्था पर सवाल उठाए.

जेल में मौत के बाद किया गया बरी, ट्रेन ब्‍लास्‍ट में कमाल की फैमिली का दर्दकोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया. (File Photo)

मुंबई ट्रेन ब्‍लास्‍ट तो याद ही होगा. साल 2006 में हुए इन धमाकों में 187 लोगों की जान चली गई थी. साथ ही 800 से ज्‍यादा लोग घायल हुए. इस मामले में आरोपी कमाल अहमद अंसारी की चार साल पहले ही जेल में मौत हो चुकी है. अब 21 जुलाई को कोर्ट ने इस मामले में कमाल सहित तमाम आरोपियों को बरी कर दिया. कब्र के पास जुटे कमाल अहमद अंसारी के परिवार वालों और रिश्‍तेदारों से इंडियन एक्‍सप्रेस ने बात की.

चिकन की दुकान चलाता था कमाल
कमाल अंसारी बिहार के मधुबनी जिले का रहने वाला एक साधारण मजदूर था. गुजारा चलाने के लिए वह कभी चिकन की छोटी दुकान चलाता, तो कभी सब्जी बेचता. 2006 में जब उसे गिरफ्तार किया गया, तब उसके परिवार को उम्मीद थी कि जल्दी न्याय मिलेगा. लेकिन न्याय का पहिया इतना धीमा चला कि कमाल को 16 साल सलाखों के पीछे गुजारने पड़े.

ट्रायल कोर्ट ने सुनाई थी फांसी
साल 2015 में स्पेशल मकोका कोर्ट ने उसे मौत की सजा सुना दी. फिर 2021 की महामारी के दौरान नागपुर सेंट्रल जेल में उसने अंतिम सांस ली. उसके मरने के चार साल बाद आया हाई कोर्ट का फैसला, जिसमें साफ कहा गया कि केस गवाही और तथाकथित कुबूलनामों पर टिकाया गया था, जिनकी विश्वसनीयता ही संदिग्ध थी.
रविवार को कब्रिस्‍तान में हुए इस छोटे से आयोजन में उसके भाई जमाल अहमद दिल्ली से पहुंचे थे. कब्र पर खड़े होकर उनकी आंखें भर आईं. उन्होंने कहा, “भाई का नाम तो अदालत ने साफ कर दिया, लेकिन वह अब इस दुनिया में नहीं है. हमारे लिए यह फैसला अधूरा है.” उनके साथ डॉ. अब्दुल वहीद शेख भी मौजूद थे, जो इस केस के अकेले ऐसे आरोपी थे जिन्हें 2015 में ही बरी कर दिया गया था.

पत्‍नी ने झेले सामाजिक तानें
वहीद ने कहा, “कमाल निर्दोष था. उसके 16 साल जेल में बीते, बच्चे बाप के बिना बड़े हुए और पत्नी समाज की नजरों में झुककर जीती रही. इस सबका हिसाब कौन देगा?”यह घटना केवल एक परिवार का दर्द नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था की धीमी रफ्तार और खामियों का आईना है. निर्दोष होकर भी सज़ा काटते रहना और फिर अपनी बेगुनाही साबित होने से पहले ही मर जाना, किसी भी लोकतंत्र के लिए शर्मनाक स्थिति है.

Sandeep Gupta

पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्‍त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्‍कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और...और पढ़ें

पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्‍त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्‍कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और...

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Location :

Mumbai,Maharashtra

First Published :

August 31, 2025, 17:01 IST

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जेल में मौत के बाद किया गया बरी, ट्रेन ब्‍लास्‍ट में कमाल की फैमिली का दर्द

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