Last Updated:August 31, 2025, 17:44 IST

बीजिंग. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से लगाए गए टैरिफ के बीच चीन के तियानजिन में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सीमा से तमाम द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई है. पीएम मोदी ने साफ किया कि भारत और चीन के सम्बन्ध को तीसरे देश की दृष्टि से नहीं देखा जाना चाहिए.
ट्रंप टैरिफ के दरम्यान पीएम मोदी के चीन दौरे का मुख्य मकसद भले ही शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन है, लेकिन इस यात्रा ने भारत और चीन संबंधों की एक नई दिशा तय कर दी है जिसका संदेश रणनीतिक भी है. गलवान हिंसा और साल 2019 के बाद पहली बार एक दूसरे के देश में मिले पीएम मोदी और शी जिनपिंग ने दोहराया कि भारत और चीन विकास साझेदार हैं, प्रतिद्वंद्वी नहीं, और मतभेदों को विवाद में नहीं बदलना चाहिए.
प्रधानमंत्री मोदी ने ज़ोर दिया कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता भारत-चीन संबंधों की प्रगति के लिए बुनियादी शर्त है. पीएम मोदी और शी जिनपिंग की बातचीत का महत्वपूर्ण आउटकम सीमा से लेकर व्यापार तक रहा…
* सीमा विवाद के न्यायसंगत और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान की प्रतिबद्धता…
* भारत-चीन सहयोग के जरिए वैश्विक व्यापार में स्थिरता और व्यापार घाटा कम करना और निवेश संबंधों को मज़बूत करना …चीन से भारत का व्यापार घाटा 100 बिलियन डॉलर है और ये तब है जब दोनों देशों का एक-दूसरे में निवेश बहुत ही कम है… सीमा के बाद चीन के साथ ये मसला भारत का सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है…
* पीएम मोदी का स्पष्ट करना की भारत और चीन रणनीतिक स्वायत्तता के हिमायती और पालन करनेवाले हैं और दोनों देशों के संबंध को तीसरे देश की दृष्टि से न देखा जाए… ट्रंप टैरिफ के बीच अमेरिका को पीएम की तरफ से ये संदेश भी है…
* आतंकवाद और निष्पक्ष व्यापार जैसे वैश्विक मुद्दों पर साझा सहयोग बढ़ाने को भी दोनों नेताओं ने आवश्यक माना
* सीधी उड़ान और वीजा सुविधा के जरिए दोनों देशों के लोगों के संपर्क बढ़ाने का संज्ञान लिया. सीधी उड़ान शुरू करने का ऐलान भी किया गया.
मोदी-जिनपिंग ने कजान बैठक के बाद द्विपक्षीय संबंधों में सकारात्मक प्रगति की भूमिका को स्वीकार किया. चीनी राष्ट्रपति ने हाथी यानी भारत और ड्रैगन यानी चीन के करीब आने को बेहद आवश्यक बताया और पंचशील के सिद्धांतों के अनुसार संबंधों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया.
गलवान के बाद भारत और चीन के बीच बातचीत कई हाईलेवल स्तर पर हुई है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ के बीच भारत और चीन का करीब आना एक रणनीतिक संदेश जरूर है. हालांकि, पीएम मोदी कह चुके हैं कि दोनों देशों के संबंधों को तीसरे देश की दृष्टि से नहीं देखा जाना चाहिए.
राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h...और पढ़ें
राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h...
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First Published :
August 31, 2025, 17:44 IST